कोईलवर के गिद्धा आयुष्मान आरोग्य मंदिर में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर रिफ्रेशर ट्रेनिंग, दवा को बताया सुरक्षा कवच

Arrah News: भोजपुर जिले के कोईलवर प्रखंड अंतर्गत गिद्धा आयुष्मान आरोग्य मंदिर में सीएचओ पीएसपी सदस्यों के लिए एक दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य सदस्यों को फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम में उनके महत्व और जिम्मेदारियों के प्रति दोबारा जागरूक करना था.

Arrah News: (नरेन्द्र प्रसाद सिंह की रिपोर्ट) भोजपुर जिले के कोईलवर प्रखंड अंतर्गत गिद्धा स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर सीएचओ पीएसपी सदस्यों के लिए एक विशेष रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों और सदस्यों को फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के प्रति उनकी जिम्मेदारियों, इसके महत्व और तकनीकी बारीकियों के बारे में दोबारा प्रशिक्षित व उन्मुख करना था.

यह कार्यक्रम ‘सिफार’ (CFAR) की जिला प्रतिनिधि जुलेखा फातमा के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ. कार्यशाला में जीविका की कम्युनिटी न्यूट्रीशन रिसोर्स पर्सन (CNRP) सह सीएचओ-पीएसपी सदस्य पूजा कुमारी, एएनएम सरीना और पूनम, आशा फैसिलिटेटर, स्थानीय आशा कार्यकर्ता तथा फाइलेरिया के कई मरीज मुख्य रूप से उपस्थित रहे.

संक्रमित क्यूलेक्स मच्छर से फैलता है फाइलेरिया, स्वच्छता को बनाएं आदतों का हिस्सा

प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित सदस्यों को जागरूक करते हुए एएनएम सरीना और पूनम ने स्वच्छता पर विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि घर और घर के आसपास साफ-सफाई का महत्व सबसे अधिक है.

स्वास्थ्य कर्मियों ने निम्नलिखित मुख्य बातें बताईं:

  • मच्छरों से बचाव: अक्सर लोग मच्छर के काटने को बहुत सामान्य मानते हैं और लापरवाही बरतते हैं. लेकिन हमें यह समझना होगा कि इन्हीं मच्छरों में से कुछ संक्रमित ‘क्यूलेक्स’ मच्छर भी हो सकते हैं, जो फाइलेरिया का संक्रमण फैलाते हैं.
  • साफ-सफाई की आदत: मच्छरों के प्रजनन को रोकने और उनसे सुरक्षित रहने के लिए स्वच्छता के महत्व को हर नागरिक को समझने की जरूरत है. इसे केवल एक अभियान न मानकर अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा.

एमडीए अभियान के दौरान दवा का सेवन ही असली सुरक्षा कवच

सिफार की जिला प्रतिनिधि जुलेखा फातमा ने उपस्थित सदस्यों और आशा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार हर साल फाइलेरिया से समाज को मुक्त कराने के लिए मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी एमडीए (MDA) अभियान चलाती है. उन्होंने कहा कि इस अभियान के दौरान जितनी अधिक से अधिक संख्या में लोग खुद आगे आकर फाइलेरिया रोधी दवा खाएंगे, देश से फाइलेरिया उन्मूलन की राह उतनी ही आसान होगी. यह दवा इस गंभीर और दिव्यांग बनाने वाली बीमारी के खिलाफ इंसान का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है.

जुलेखा फातमा ने आगे कहा कि इस रिफ्रेशर प्रशिक्षण का मुख्य मकसद यही है कि फील्ड में काम कर रहे सदस्यों को उनकी जिम्मेदारियों और उनके द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों के प्रति दोबारा रीचार्ज किया जा सके, ताकि आगामी अभियानों में बेहतर परिणाम हासिल हों.

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By Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

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