Arrah News: खटाल के कारण पश्चिमी रेलवे ओवरब्रिज पर मंडरा रहा खतरा, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

आरा के पश्चिमी रेलवे ओवरब्रिज के नीचे वर्षों से चल रहे खटाल और अतिक्रमण से पुल की संरचना पर खतरा बढ़ गया है. दीवारों और पिलरों पर गोबर से गोईठा बनाए जा रहे हैं. गंदगी और यातायात बाधा से लोग परेशान हैं, लेकिन प्रशासन अब तक कार्रवाई नहीं कर रहा है.

Arrah News: (नरेन्द्र प्रसाद सिंह की रिपोर्ट) जिला प्रशासन द्वारा शहर में लगातार अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन आरा के महत्वपूर्ण पश्चिमी रेलवे ओवरब्रिज के नीचे किए गए अतिक्रमण पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है. पुल के नीचे लंबे समय से चल रहे खटाल के कारण न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है, बल्कि पुल की संरचना पर भी खतरा मंडराने लगा है. स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.

हजारों वाहनों की आवाजाही वाला महत्वपूर्ण पुल

पश्चिमी गुमटी पर बना रेलवे ओवरब्रिज शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है. इस पुल से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन और पैदल यात्री गुजरते हैं. बक्सर और उत्तर प्रदेश की ओर से आने-जाने वाले वाहन भी इसी मार्ग का उपयोग करते हैं. इसके बावजूद पुल के नीचे संचालित खटाल को हटाने की दिशा में प्रशासन और नगर निगम की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है.

पुल की दीवारों और पिलरों को पहुंच रहा नुकसान

खटाल संचालकों द्वारा पुल की दीवारों और पिलरों पर गोबर से गोईठा बनाया जा रहा है. लगातार गंदगी और नमी के कारण पुल की स्थिति दयनीय होती जा रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पुल की मजबूती पर भी असर पड़ सकता है.

सड़क पर पसरी गंदगी से लोगों की बढ़ी परेशानी

खटाल के कारण आसपास हमेशा गोबर और गंदगी फैली रहती है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी होती है. कई बार स्थानीय लोगों और खटाल संचालकों के बीच विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो चुकी है.

चुनाव में वादे, लेकिन समाधान नहीं

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम चुनाव, विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान नेताओं द्वारा खटाल हटाने और समस्या के समाधान का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है.

2009 में हुआ था पहुंच पथ का उद्घाटन

जानकारी के अनुसार पश्चिमी गुमटी पर रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण 1980 के दशक में कराया गया था. हालांकि पहुंच पथ नहीं होने के कारण लंबे समय तक इसका समुचित उपयोग नहीं हो सका. वर्ष 2009 में पहुंच पथ का उद्घाटन होने के बाद इस पुल पर यातायात का दबाव काफी बढ़ गया. अब लगातार बढ़ती आवाजाही के बीच पुल के नीचे हो रहे अतिक्रमण को लेकर लोगों की चिंता भी बढ़ती जा रही है.

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लेखक के बारे में

Published by: Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.

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