Arrah News: (दीपक गुप्ता की रिपोर्ट) बिहार सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करने के उद्देश्य से शुरू किया गया राज्यव्यापी “सहयोग शिविर” कोईलवर प्रखंड में महज एक सरकारी खानापूर्ति साबित हो रहा है. मंगलवार को प्रखंड की तीन प्रमुख पंचायतों-नरबीरपुर, मथुरापुर और वीरमपुर में सहयोग शिविरों का आयोजन किया गया था. इन शिविरों में अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर सैकड़ों ग्रामीण और फरियादी पहुंचे थे, लेकिन वहां प्रशासनिक कुप्रबंधन और अफरातफरी के माहौल के कारण लोगों को भारी निराशा हाथ लगी.
42 विभागों के स्टॉल लगे, लेकिन दोपहर 2 बजे तक खाली रहीं कुर्सियां
नियमतः इन शिविरों में राजस्व, सामाजिक सुरक्षा (पेंशन), शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, मनरेगा, आपूर्ति (राशन), बिजली, पेयजल एवं स्वच्छता, श्रम और पशुपालन समेत कुल 42 विभागों के स्टॉल लगाए गए थे. इसका उद्देश्य आम लोगों से उनकी शिकायतों से संबंधित आवेदन प्राप्त कर उनका त्वरित निष्पादन करना था.
परंतु, धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत थी. नरवीरपुर पंचायत के चांदी हाई स्कूल में आयोजित मुख्य शिविर में दोपहर दो बजे तक जिलास्तर का कोई भी जिम्मेदार पदाधिकारी मौजूद नहीं था. वहीं, प्रखंडस्तरीय पदाधिकारी भी किसी काउंटर पर बैठकर जनता की सुध लेते नहीं दिखे. ग्रामीणों का आरोप है कि जो भी अधिकारी शिविर में आए, वे केवल औपचारिकता पूरी कर और घूम-फिर कर वापस चले गए.
आवेदन लेने के बजाय लोगों को टरकाने में जुटे रहे कर्मी
शिविर के दौरान सबसे बदतर स्थिति वीरमपुर और मथुरापुर पंचायतों की रही. वीरमपुर पंचायत भवन में आयोजित शिविर में तो कई महत्वपूर्ण विभागों के काउंटर पूरी तरह खाली पड़े थे और वहां तैनात कर्मी ही गायब थे. हालांकि, वीरमपुर में हेल्प डेस्क पर बैठा एक कर्मी जरूरतमंदों की डिटेल लेकर उन्हें संबंधित काउंटरों पर भेजता दिखा, लेकिन काउंटरों पर अधिकारियों के न होने से जनता परेशान रही. फरियादियों का आरोप है कि काउंटर पर मौजूद कर्मी भी आवेदन जमा करने और रसीद देने के बजाय उन्हें अगले दिन ब्लॉक आने की बात कहकर टरकाने की जुगत में लगे दिखे.
क्या कहते हैं बीडीओ?
इस पूरे मामले और अव्यवस्था को लेकर जब कोईलवर के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) बीरबहादुर पाठक से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि प्रखंड की तीन पंचायतों में शिविर का शांतिपूर्ण आयोजन किया गया था. उनके अनुसार, इन शिविरों में विभिन्न विभागों से जुड़े 150 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिन्हें संबंधित विभागों को भेजकर जल्द ही निष्पादित करा दिया जाएगा. अधिकारियों की अनुपस्थिति पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिविर के सुचारू संचालन के लिए प्रखंडस्तरीय पदाधिकारियों को नोडल अफसर बनाया गया था और कई कर्मियों की स्थायी रूप से प्रतिनियुक्ति की गई थी.
बीडीओ के दावों के उलट, जमीन पर आम जनता भीषण गर्मी के बीच अपनी-अपनी शिकायतें हाथों में लेकर अधिकारियों की राह ताकती और भटकती नजर आई.
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