Arrah News:(नरेन्द्र प्रसाद सिंह) भोजपुर जिले के आरा में उस समय अजीब स्थिति पैदा हो गई, जब महादलित मुसहर समाज के कई लोग जिलाधिकारी के जनता दरबार में हाथ जोड़कर न्याय की गुहार लगाने पहुंचे. लोगों ने आरोप लगाया कि उदवंतनगर अंचलाधिकारी जमीन की ऑनलाइन राजस्व रसीद काटने के बदले एक लाख रुपये की मांग कर रहे हैं. पीड़ितों ने कहा कि वे बेहद गरीब परिवार से आते हैं और इतनी बड़ी रकम देना उनके बस की बात नहीं है. उनकी फरियाद सुनकर जनता दरबार में मौजूद अधिकारी भी कुछ देर के लिए सन्न रह गए.
सरकार ने दी थी जमीन, अब हो रहा अधिग्रहण
बताया जा रहा है कि बिहार सरकार ने नियमों के तहत महादलित परिवारों को जमीन उपलब्ध कराई थी. अब पटना-आरा-सासाराम फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 119ए के निर्माण के लिए इस जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है. भूमि अधिग्रहण के बदले प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाना है। इसके लिए संबंधित विभाग की ओर से नोटिस भी जारी किया गया है.
मुआवजे के लिए मांगी गई ऑनलाइन रसीद
पीड़ित परिवारों का कहना है कि मुआवजा प्रक्रिया पूरी करने के लिए विभाग ने जमीन की ऑनलाइन राजस्व रसीद अनिवार्य बताई है. लेकिन अब तक उनकी जमीन की ऑनलाइन रसीद नहीं कट सकी है. परिवारों को चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय के भीतर ऑनलाइन रसीद नहीं देने पर जमीन को दोबारा विभाग के खाते में वापस किया जा सकता है.
सीओ पर रिश्वत मांगने का आरोप
महादलित परिवारों का आरोप है कि जब वे अपनी समस्या लेकर उदवंतनगर अंचलाधिकारी के पास पहुंचे तो उन्हें डांट-फटकार कर भगा दिया गया. आरोप है कि अंचलाधिकारी ने कहा कि एक लाख रुपये दोगे तभी ऑनलाइन रसीद बनेगी. इसके बाद निराश परिवारों ने जिलाधिकारी के जनता दरबार में पहुंचकर कार्रवाई की मांग की.
जांच और कार्रवाई की उठी मांग
मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल बढ़ गई है. अब लोगों की नजर जिलाधिकारी की कार्रवाई पर टिकी है कि आखिर गरीब महादलित परिवारों को न्याय कब मिलेगा और रिश्वत मांगने के आरोपों की जांच कैसे होगी.
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