Arrah News: (नरेन्द्र प्रसाद सिंह की रिपोर्ट) भोजपुर जिला मुख्यालय का कृषि भवन इस समय प्रशासनिक उदासीनता और उपेक्षा का जीता-जागता उदाहरण बना हुआ है. जिला कृषि पदाधिकारी का यह कार्यालय पूरी तरह जर्जर हो चुका है, जिससे यहां कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी हर वक्त खतरों के साए में काम करने को मजबूर हैं. मजबूरी ऐसी है कि रोज अपनी जान जोखिम में डालकर कर्मी दफ्तर आते हैं और दिनभर किसी अनहोनी की आशंका के बीच काम निपटाते हैं.
गिर रही है छत, साफ दिख रही हैं लोहे की छड़ें
कृषि भवन की स्थिति इतनी भयावह है कि कमरों और बरामदे की छत का प्लास्टर टूट-टूटकर गिर रहा है. छतों से कंक्रीट गिरने के कारण अब अंदर लगी लोहे की छड़ें साफ दिखाई देने लगी हैं. हालत यह है कि दफ्तर के दौरान कब किस अधिकारी या कर्मचारी के सिर पर छत का हिस्सा गिर जाए, कोई नहीं जानता. इसके बावजूद इस महत्वपूर्ण भवन की मरम्मत को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है.
महत्वपूर्ण योजनाओं का केंद्र, फिर भी बदहाली के आंसू रो रहा भवन
किसानों के लिहाज से जिला कृषि कार्यालय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. जिले में अनाज उत्पादन बढ़ाने से लेकर सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं को धरातल पर उतारने में इस कार्यालय की मुख्य भूमिका होती है. इतने महत्वपूर्ण विभाग के दफ्तर की दुर्दशा देखकर यहां आने वाले किसान भी हैरान रह जाते हैं.
इसी भवन में चल रहे हैं कई अन्य सरकारी दफ्तर
कृषि भवन का महत्व इस बात से भी समझा जा सकता है कि लगभग 3 वर्ष पूर्व जब समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) का नया भवन बन रहा था, तब अस्थायी रूप से समाहरणालय का संचालन इसी इमारत से हो रहा था. वर्तमान में भी इस परिसर के भीतर केवल कृषि विभाग ही नहीं, बल्कि:
- प्रखंड सह अंचल कार्यालय
- माप-तौल विभाग (लीगल मेट्रोलॉजी)
- सहायक निदेशक कृषि का कार्यालय
सहित लगभग 4 से 5 अलग-अलग सरकारी विभागों के दफ्तर संचालित हो रहे हैं. इतने बड़े कार्यबल के बाद भी इस इमारत की दुर्दशा पर संज्ञान न लेना व्यवस्था की संवेदनहीनता को दर्शाता है.
जिलाधिकारी के पत्राचार को बीता एक साल, फिर भी कार्रवाई नहीं
एक तरफ जहां राज्य सरकार सभी विभागों के पुराने और जर्जर कार्यालयों को तोड़कर आधुनिक सुविधाओं से लैस नए भवन बनवा रही है, वहीं आरा के कृषि भवन को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है. कृषि कार्यालय के नए निर्माण और मरम्मत को लेकर खुद भोजपुर जिलाधिकारी (डीएम) भवन निर्माण विभाग से लिखित पत्राचार कर चुके हैं. जिलाधिकारी द्वारा पत्र भेजे गए एक वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है. विभागीय कार्यशैली का यह आलम तब है जब रोजाना सैकड़ों कर्मियों और आम जनता का यहां आना-जाना होता है.
