Ara News : शाहपुर की 20 पंचायतें बाढ़ग्रस्त, 16 का सड़क संपर्क टूटा

जल स्तर में लगातार वृद्धि से गंगा नदी ने अब विकराल रूप धारण कर लिया है, जिससे लोग अब डरने लगे हैं.

शाहपुर. जल स्तर में लगातार वृद्धि से गंगा नदी ने अब विकराल रूप धारण कर लिया है, जिससे लोग अब डरने लगे हैं. इसके चलते शाहपुर नगर पंचायत की उत्तर दिशा में चारों तरफ सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है. शाहपुर दियारा क्षेत्र के सभी मुख्य एवं ग्रामीण सड़कों पर पानी चढ़ गया है, जिसके कारण सड़क मार्ग भंग हो गया है.

प्रखंड क्षेत्र के दियारांचल क्षेत्र के लिए लाइफ लाइन कहे जाने वाली शाहपुर-करनामेपुर व बिहिया चौरस्ता-गौरा पथ पर यातायात परिचालन ठप हो गया है. यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इन इलाकों में रहने वाले लोगों की लाइफ लाइन ही कट चुकी है. वहीं बाढ़ के कारण प्रभावित तटबंधों व अन्य आश्रय स्थलों पर शरण लिए लोग के लिए होने वाली वर्षा जब भी आती है मुसीबत लिए आती है. एक पखवारे से प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में प्रलयंकारी बाढ़ ने जिस तरह से तांडव मचाया है, उससे लोगों की घबराहट बढ़ गयी है. बाढ़ का विकराल रूप अब लोगों को डरावना लगने लगा है. रात के समय तो बाढ़ के पानी की तेज धाराओं से उठने वाली गर्जना भरी आवाज लोगों में सिहरन पैदा कर देती है. गांवों में घरबार छोड़कर तटबंधों व ऊंचे शरण स्थलों पर शरण लिये हुए लोग अब चारों तरफ से बाढ़ से घिर चुके हैं. मानो लोगों का जीवन राहत शिविर में सिमट कर रह गया है. लोग अपने परिवार के साथ तटबंधों पर गुजर करते हुए यह भी सोच रहे हैं कि घरबार तो गंगा नदी में विलीन हो गया. लेकिन अब क्या करेंगे, कहां रहेंगे, अगला ठिकाना कहां होगा? यह चिंता लोगों को भीतर से खाये जा रही है. बांध पर दुबक कर सिर्फ भोजन करने से तो जिंदगी चलने वाली है नहीं. सरकारी सहायता भी अब बाढ़ग्रस्त लोगों के लिए अपर्याप्त साबित हो रही है. क्योंकि बाढ़ के कारण तटबंधों व ऊंचे आश्रय स्थलों पर विस्थापित लोगो की संख्या काफी बढ़ गयी है. लेकिन उस अनुपात में सामुदायिक रसोई व नावें नहीं चल रही हैं. नाव नहीं मिलने के कारण लोग जुगाड़ तकनीक वाला नाव भी बनाकर अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं. वहीं लोगों का मानना है कि अब तक सरकार द्वारा चलायी जा रही नाव बाढ़ को देखते हुए नाकाफी है. क्योंकि प्रखंड के सभी पंचायत बाढ़ के चपेट में आने से बुरी तरह से प्रभावित है. बाढ़ से प्रभावित लगभग सौ से अधिक गांवों का आवागमन का एकमात्र साधन नाव रह गया है. इधर गुरुवार को एसडीएम जगदीशपुर संजीत कुमार के नेतृत्व में डीसीएलआर अमरेंद्र कुमार, बीडीओ शत्रुंजय कुमार सिंह व सीओ रश्मि सागर ने तटबंध पर शरण लिये लोगों से मिले और उनसे बातचीत की. इसके बाद गुरुवार की शाम से लालू के डेरा, श्याम बाबा के पास बांध पर व सुहिया में सामुदायिक रसोई चलाने की बात कही. वहीं, शाहपुर नगर पंचायत के डेढ़ हजार एकड़ में लगी फसल डूबकर नष्ट हो चुकी है. साथ ही वार्ड संख्या दो, तीन, छह, सात (गोपालपुर) एवं आठ के लगभग सैकड़ों घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है, जिसके कारण शाहपुर नगर पंचायत के लगभग तीन हजार लोग प्रभावित बताये जा रहे हैं.

भरौली पुल बना वाहन स्टैंड

गंगा के प्रलयकारी बाढ़ के कारण धर्मावती नदी के ऊपर बना भरौली पुल अब वाहन स्टैंड बन गया है, जहां पर विभिन्न जगहों के लिए छोटे-बड़े वाहन उपलब्ध हैं. पहले जहां लालू डेरा एवं कारनामेपुर दियारा क्षेत्र का मुख्य वाहन स्टैंड था. अब वहां बाढ़ के कारण इन साभी जगहों पर पानी भर गया है. अब मात्र नाव ही सहारा है. दर्जनों गांवों के लोग नावों द्वारा भरौली पुल पर उतरते हैं और वहां से ऑटो, टैक्सी एवं बस से विभिन्न जगहों के लिए आ-जा रहे हैं.

भरौली पुल पर शिफ्ट हुआ सुहिया भागड़ का मछली बाजार

पटना प्रमंडल का सबसे बड़ा जलखर सुहिया भागड़ जो मछली उत्पादन के लिए मशहूर माना जाता है. वहीं सोनकी-सुहिया भगड़ तट पर बड़े पैमाने पर खुदरा एवं थोक विक्रेता विभिन्न प्रकार की मछली खरीद कर बिहार एवं उसके आसपास के राज्यों में ले जाकर बेचते हैं. गंगा के जल स्तर में वृद्धि के साथ चारों तरफ बाढ़ के पानी भर जाने के कारण अब वह बाजार भरौली पुल के पास लग रहा है. वहां से सभी खुदरा एवं थोक व्यापारी विभिन्न प्रकार की मछलियां खरीद कर क्षेत्र के विभिन्न बाजारों में ले जा रहे हैं.

बाढ़ का नजारा देखने भरौली पुल पर पहुंचे रहे लोग

शाहपुर के दियारा में आई बाढ़ को देखने के लिए काफी संख्या में महिला एवं पुरुष भरौली पुल के पास पहुंच रहे हैं और बाढ़ प्रभावित लोग भी विभिन्न नव से वहां पहुंच रहे हैं, जिसके चलते वहां बहुत भीड़भाड़ और मेले जैसा माहौल बन गया है. लोग मोबाइल से रील बना रहे हैं. सड़कों पर चढ़े हुए पानी में चलकर बाढ़ का आनंद ले रहे हैं. खाने-पीने वाला सामान भी वहां ठेले पर मिल रहा है.

प्रतिवर्ष बाढ़ की विभीषिका झेल रहे दियारावासी

प्रखंड का पूरा क्षेत्र दियारा इलाके के नाम से प्रसिद्ध है, जहां बसने वाले वह लोग हैं, जो प्रत्येक वर्ष बाढ़ की त्रासदी से ग्रस्त होते हैं. यह वैसे लोग में शुमार हैं, जिनके सपने उनकी आंखों के सामने बाढ़ के पानी में बह जाते हैं. घर धंस जाते हैं. बेचारे बेघर हो जाते हैं. दियारा क्षेत्र के लोग प्रत्येक वर्ष बाढ़ की विभीषिका से दो-चार होते रहते हैं. कभी उनके अरमान, सपने बाढ़ में बह जाते हैं, तो कभी अथक परिश्रम से पेट काटकर बनाया गया आशियाना. कभी उनपर विस्थापन की मुहर लग जाती है, तो कभी बाढ़पीड़ित का ठप्पा. बावजूद इसके अपने वजूद को बचाये रखने वाले और बाढ़ जैसी त्रासदी से प्रत्येक वर्ष रूबरू होने वालों को राहत के नाम पर कुछ खाद्यान्न का वितरण तथा नावों का परिचालन करा दिया जाता है.

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