25 लाख रुपये की डस्टबिनों पर जमी धूल, वितरण अधर में

आरोप है कि मोहल्लों में नियमित सफाई नहीं हो रही

प्रभात फॉलोअप

अररिया नप में ठप पड़ी डोर-टू-डोर कचरा उठाव योजना

राहुल कुमार सिंह, अररियास्वच्छ भारत मिशन के तहत अररिया नगर परिषद की डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण योजना कागजों से बाहर ही नहीं निकल पायी. करीब 25 लाख रुपये खर्च कर खरीदी गयीं हजारों गीला व सूखा कचरा सहित कचरा डस्टबिन महीनों से अशोक सम्राट भवन में धूल फांक रही हैं.

घर-घर पहुंचनी थीं दो बाल्टियां

योजना के तहत शहर के हर होल्डिंग धारक को गीले व सूखे कचरे के लिए दो अलग बाल्टियां दी जानी थीं. मकसद था लोगों में कचरा अलग- अलग करने की आदत डालना व वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन करना. सफाई कर्मियों को घर-घर से कचरा उठाना था. लेकिन खरीदारी के कई महीने बाद भी अधिकतर डस्टबिनें भवन में ही पड़ी हैं. योजना का क्रियान्वयन अब तक शुरू नहीं हो सका.

शहर में जगह-जगह कचरे का ढेर

स्थानीय लोगों का आरोप है कि मोहल्लों में नियमित सफाई नहीं हो रही. सड़कों पर कचरे के ढेर लगे हैं. नागरिकों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि टैक्सपेयर्स के पैसे से खरीदी गई सामग्री उपयोग में नहीं लाई जा रही. लोगों का कहना है कि नगर परिषद सिर्फ योजनाओं की घोषणा कर जिम्मेदारी पूरी मान लेती है, जमीन पर असर नहीं दिखता.

अधिकारियों का दावा: 15 दिन में होगा वितरण

स्वच्छता पदाधिकारी मो अजहर का कहना है कि सभी होल्डिंग धारकों को एक-एक गीला व सूखा कचरा बाल्टी दी जायेगी. वितरण की तैयारी पूरी है. अगले 15 दिनों में सभी घरों तक बाल्टियां पहुंच जाएंगी. सफाई कर्मियों को भी घर-घर कचरा उठाने के निर्देश दिए जाएंगे.

कार्यपालक अभियंता ने कहा, कुछ जगह बांटी गयीं

कार्यपालक अभियंता चंद्र प्रकाश राज ने बताया कि कुछ लोगों को पहले ही बाल्टियां दी जा चुकी हैं. बाकी होल्डिंग धारकों की सूची तैयार है. जल्द ही शेष वितरण पूरा कर लिया जायेगा. हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे आश्वासन पहले भी मिल चुके हैं, पर नतीजा शून्य रहा.

स्वच्छ भारत मिशन पर सवाल

विशेषज्ञ मानते हैं कि कचरा अलग करने की आदत से प्रबंधन आसान होता है. इससे शहर साफ रहेगा व पर्यावरण को भी फायदा होगा. लेकिन अररिया में सुस्त क्रियान्वयन से मिशन के उद्देश्य पर सवाल उठ रहे हैं.

आम नागरिकों की मांग

लोगों ने नप प्रशासन से जल्द वितरण शुरू करने व नियमित कचरा संग्रहण लागू करने की मांग की है. उनका कहना है कि सिर्फ खरीदारी से शहर साफ नहीं होगा. योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना जरूरी है. फिलहाल नगर परिषद के दावों व जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर दिख रहा है.

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