अररिया के 12 सीमावर्ती गांवों के लिए ₹12.89 करोड़ की योजना: वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में 190 प्रोजेक्ट मंजूर, देखें गांवों की सूची

अररिया जिले के 12 सीमावर्ती गांवों में 12.89 करोड़ रुपये की 190 विकास योजनाओं को मंजूरी मिली है. वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा दिया जाएगा.

भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बिहार के अररिया जिले के सीमावर्ती गांवों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए जिला प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है. 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II' (Vibrant Villages Programme - Phase II) के तहत जिले के तीन सीमावर्ती प्रखंडों के 12 गांवों में कुल 190 विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की प्रशासनिक तैयारी पूरी कर ली गई है.

समाहरणालय स्थित परमान सभागार में जिलाधिकारी विनोद दूहन की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय समिति की बैठक में विभिन्न विभागों से प्राप्त 12.89 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इन सभी योजनाओं को हरी झंडी दे दी गई.

जमीन व तकनीकी जांच के बाद VVP पोर्टल पर अपलोड होगा DPR

जिलाधिकारी विनोद दूहन ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में हिदायत दी कि योजनाएं केवल कागजों और फाइलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए:

  • भूमि व तकनीकी व्यवहार्यता: संबंधित विभागों के समन्वय से जमीन की उपलब्धता और तकनीकी उपयुक्तता (Technical Feasibility) की सघन जांच की जाए.
  • समयबद्ध डीपीआर: जिन योजनाओं की तकनीकी रिपोर्ट सकारात्मक आए, उनका अविलंब डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कर केंद्र सरकार के आधिकारिक VVP पोर्टल पर अपलोड किया जाए ताकि समय पर राशि जारी हो सके.

शिक्षा, बाल विकास और सुरक्षा ढांचे पर बड़ा निवेश

सीमावर्ती आबादी के जीवन स्तर को सुधारने के लिए कई अहम सेक्टरों में काम होगा:

  • शिक्षा का आधुनिकीकरण: 7 स्मार्ट क्लासरूम, 8 अतिरिक्त वर्ग कक्ष (ACR), 98 क्लासरूम का विद्युतीकरण, 16 स्कूलों में आधुनिक सैनिटेशन (शौचालय) सुविधाएं और 9 विद्यालयों में बाउंड्री वॉल का निर्माण होगा.
  • आंगनबाड़ी केंद्र: ग्रामीण बच्चों और धात्री माताओं की पोषण सुरक्षा के लिए 5 नए मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र बनाए जाएंगे.
  • सीमा सुरक्षा व्यवस्था: सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा तंत्र और निगरानी मजबूत करने के लिए 40 मिनी सुरक्षा स्तंभ स्थापित किए जाएंगे.

डेयरी, स्वास्थ्य और सुंदरी धाम में स्वरोजगार का हब

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अनूठे प्रस्ताव शामिल किए गए हैं:

  • डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर: पशुपालकों को दूध का उचित मूल्य दिलाने के लिए 1 मिल्क चिलिंग प्लांट और 1 साइलेज (पशु चारा) प्लांट की स्थापना होगी.
  • स्वास्थ्य सुविधा: कुर्साकांटा के लैलोखर में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (HWC) का निर्माण कराया जाएगा.
  • सुंदरी मंदिर में धार्मिक उद्यम: ऐतिहासिक सुंदरी मंदिर परिसर के समीप मंदिर के वेस्ट फ्लावर (चढ़ाए गए फूलों) की प्रोसेसिंग यूनिट, अगरबत्ती निर्माण और शुद्ध प्रसाद निर्माण केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय महिलाओं को स्वरोजगार मिलेगा.

इन 12 सीमावर्ती गांवों में लागू होंगी योजनाएं

प्रखंड (Block)चयनित गांव (Villages)
फारबिसगंजबैजनाथपुर (पिपरा), दामादिघी (पिपरा), हथवा (कुशमाहा) और पोखरिया (कुशमाहा)
नरपतगंजधुरना (पथराहा), डुमरबन्ना (बबुवान), बेला (बेला), मानिकपुर (मानिकपुर), गोसाई पुछहरी (सोनापुर) और भवानीपुर (मानिकपुर)
कुर्साकांटालैलोखर (लैलोखर) और सुंदरी (डुमरिया)

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By Pankaj jha

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