अररिया जिले के पलासी प्रखंड अंतर्गत आमगाछी गांव निवासी अमर कुमार मंडल 108 किलोग्राम वजनी कांवड़ लेकर सुल्तानगंज से 257 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकले हैं. 26 जुलाई को सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर चले अमर अपनी यात्रा के 23वें दिन अररिया पहुंचे, जहां उन्होंने मां खड़गेश्वरी काली मंदिर में पूजा-अर्चना की और बाबा खड़गेश्वर का जलाभिषेक किया. इसके बाद वे बाबा सुंदरनाथ धाम में जलाभिषेक के लिए पैदल ही रवाना हो गए.
सुल्तानगंज से सुंदरनाथ धाम तक 257 किलोमीटर की कठिन यात्रा
अमर कुमार मंडल ने 26 जुलाई को सुल्तानगंज से अपनी कांवड़ यात्रा शुरू की थी. यात्रा के 21वें दिन वे रामपुर कोदरकट्टी पंचायत स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज पहुंचे, जहां उन्होंने विश्राम किया. इसके बाद 23वें दिन वे मां खड़गेश्वरी काली मंदिर पहुंचे और विधिवत पूजा-अर्चना की. इस यात्रा में अमर के साथ चार अन्य श्रद्धालु भी शामिल हैं.
85 किलो जल और 108 किलो का कांवड़
एनएच 27 पर पॉलिटेक्निक कॉलेज के सामने पड़ाव के दौरान अमर कुमार मंडल ने बताया कि सुल्तानगंज से बाबा सुंदरनाथ धाम की दूरी 257 किलोमीटर है. वे सुल्तानगंज से 85 किलो गंगाजल भरकर 108 किलो वजन का कांवड़ लेकर निकले हैं. अमर ने बताया कि रास्ते में आम लोगों का भरपूर सहयोग मिल रहा है और लोग पानी, दवा और भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि बाबा की कृपा से यात्रा निर्विघ्न चल रही है और उनका लक्ष्य समय पर जल चढ़ाकर देश व समाज की सुख-शांति की कामना करना है.
स्थानीय लोगों ने किया सेवा सत्कार
रामपुर कोदरकट्टी पंचायत पहुंचने पर स्थानीय ग्रामीणों और राजपूत टोला के लोगों ने अमर और उनके साथियों का सेवा सत्कार किया. इस दौरान पूर्व चेयरमैन नवीन सिंह, अजय सिंह, ऋतिक उर्फ सोनू सिंह, रंजीत सिंह, गौरव सिंह, यश सिंह, चिक्कू सिंह, बादल सिंह, कामेश्वर पोद्दार और अजहर आलम सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे.
2024 में 21 दिनों में पूरी की थी 2001 किमी की तिरंगा दौड़
अमर कुमार मंडल ने वर्ष 2024 में अररिया काली मंदिर से भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित अटारी बॉर्डर (पंजाब) तक 2001 किलोमीटर की तिरंगा दौड़ 21 दिनों में पूरी की थी. वे 15 अगस्त 2024 को अटारी बॉर्डर पहुंचे थे और उन्होंने अपनी यह यात्रा देश के वीर सैनिकों को समर्पित की थी. स्थानीय लोगों ने अमर और उनके साथियों के इस संकल्प की सराहना की और उनके सुरक्षित धाम तक पहुंचने की कामना की.
