मूर्तिकारों को नहीं मिल वाजिब मेहनताना

पेट पालने के लिए इसी धंधे में टिके रहना मजबूरी

By PRAPHULL BHARTI | September 14, 2025 6:11 PM

पुश्तैनी धंधे को जिंदा रखना मजबूरी भरगामा. प्रखंड क्षेत्र के चरैया, खूटहा बैजनाथपुर, भरगामा, महथावा, जयनगर, शेखपुरा, हरिपुर कला, कढ़महा, शंकरपुर, सिमरबनी सहित विभिन्न पूजा स्थलों पर दुर्गापूजा की तैयारी जोर-शोर से चल रही है. जगह-जगह पंडाल निर्माण का काम तेजी से हो रहा है. वहीं मां दुर्गा की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में मूर्तिकार पूरी तन्मयता से जुटे हैं. महथावा स्थित सार्वजनिक दुर्गा मंदिर परिसर में विशाल पंडाल का निर्माण किया जा रहा है. यहां सिरसिया कला से आये कलाकार पिछले 15 दिनों से मिट्टी की मूर्तियों को आकार देने में लगे हैं. प्रतिमाओं पर बारीक नक्काशी, रंगाई-पुताई व सजावट देखकर कोई भी उनकी कला की सराहना किए बिना नहीं रह सकता. लेकिन इस मेहनत व हुनर के पीछे की सच्चाई कड़वी है. ये कलाकार अपनी कला से आत्मसंतुष्टि तो पा रहे हैं. मगर आर्थिक तंगी व महंगाई ने उनकी कमर तोड़ दी है. मूर्तिकार महावीर पंडित, सुबोध व राकेश ने बताया कि उनके साथ कुल चार लोग दिन-रात काम कर रहे हैं. मगर कड़ी मेहनत के बाद भी उन्हें उचित पारिश्रमिक नहीं मिलता. यह हमारा पुश्तैनी धंधा है. चाहकर भी इसे छोड़ नहीं सकते. बांस, लकड़ी, सुतरी, मिट्टी, पेंट व कपड़े की कीमतें हर साल बढ़ती जा रही हैं. इस बार तो पिछले वर्ष की तुलना में लागत लगभग दोगुनी हो गयी है लेकिन मजदूरी वही है. अब मजबूरी है कि पेट पालने के लिए इसी धंधे में टिके रहना पड़ता है. कलाकारों की बेबसी उस समय और भी साफ झलकती है जब वे पसीने से तर-बतर होकर हाथों में ब्रश लिए प्रतिमा को रंग भरते हैं. प्रतिमा की भव्यता देखने वाले लोग भले ही वाहवाही करते हों मगर इस कला को जिंदा रखने वाले कलाकारों की दशा पर शायद ही कोई ध्यान देता है. इस वर्ष महथावा दुर्गा मंदिर प्रांगण में 22 सितंबर से 02 अक्तूबर तक 11 दिवसीय नवाह संकीर्तन का आयोजन होने जा रहा है. 22 सितंबर को विधिवत कलश स्थापना के साथ दुर्गापूजा की शुरुआत होगी. आयोजन समिति ने बताया कि पूजा को भव्य बनाने के लिए बाहर से कलाकारों व टी 20 बैंड सहित संगीत मंडलियों को भी आमंत्रित किया गया है.

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