Road Protest: परवाहा (अररिया) से रवीन्द्र कुमार यादव की रिपोर्ट: यूं तो चुनाव से लेकर सामान्य दिनों तक जवाबदेह जनप्रतिनिधियों से लेकर सरकार के आला अधिकारियों तक मंचों से यह दावा करते नहीं थकते कि ग्रामीण इलाकों में चमचमाती सड़कों और पुल-पुलियों का मजबूत जाल बिछा दिया गया है. लेकिन धरातल पर इन दावों की हकीकत कोसों दूर नजर आती है. ताजा मामला फारबिसगंज प्रखंड क्षेत्र का है, जहां दो पंचायतों की सीमा को जोड़ने वाली एक मुख्य संपर्क सड़क पिछले दो साल से पूरी तरह जर्जर और गड्ढों में तब्दील हो चुकी है. प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज अड़राहा और परवाहा पंचायत के दर्जनों ग्रामीणों ने बुधवार को सड़क पर उतरकर विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया.
एस.एच 92 घीवाहा चौक से महथावा को जोड़ती है यह सड़क, राहगीरों का चलना दूभर
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि यह महत्वपूर्ण ग्रामीण सड़क फारबिसगंज प्रखंड अंतर्गत अड़राहा और परवाहा पंचायत के बिल्कुल सीमा के बीचोबीच से होकर गुजरती है.
- महत्वपूर्ण लिंक रोड: यह सड़क परवाहा-छातापुर मुख्य मार्ग (SH-92) के ‘घीवाहा चौक’ से शुरू होकर ‘महथावा’ जाने वाली मुख्य सड़क में जाकर मिलती है.
- दो साल से बदहाल: पिछले करीब दो वर्षों से इस सड़क की सुध लेने वाला कोई नहीं है. पूरी सड़क की पिच उखड़ चुकी है और बड़े-बड़े नुकीले पत्थर व गड्ढे बाहर निकल आए हैं.
इस जर्जर मार्ग के कारण हर दिन यहां से गुजरने वाले हजारों राहगीरों, स्कूली बच्चों, मरीजों और स्थानीय दुकानदारों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है. आए दिन इस मार्ग पर बाइक और ई-रिक्शा पलटने से लोग चोटिल हो रहे हैं, जिससे स्थानीय आबादी में व्यवस्था के प्रति गहरा आक्रोश है.
“सिर्फ वोट के समय आते हैं नेता” — सड़क पर फूटा युवाओं और ग्रामीणों का गुस्सा
बुधवार को अड़राहा और परवाहा पंचायत के सीमा पर एकत्रित हुए ग्रामीणों ने हाथ में विरोध की तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया. प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे स्थानीय ग्रामीण उमेश सरदार और कुलेश्वर सरदार ने कहा:
“दो साल से हम लोग इस नारकीय स्थिति को झेल रहे हैं. हल्की बारिश में यह सड़क तालाब बन जाती है और सूखे के दिनों में धूल के गुबार से सांस लेना दूभर हो जाता है. जनप्रतिनिधि सिर्फ चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं और बड़े-बड़े वादे कर भूल जाते हैं. अगर जल्द ही इस सड़क का पक्का निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो हम लोग आने वाले समय में उग्र आंदोलन करेंगे और वोट का पूरी तरह बहिष्कार करेंगे.”
इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से दोनों पंचायतों के दर्जनों युवा, किसान और प्रबुद्ध नागरिक शामिल रहे, जिन्होंने एक सुर में विभाग से अविलंब संवेदक (ठेकेदार) को काम अलॉट करने की मांग की.
कनीय अभियंता का आश्वासन: निर्माण के लिए कागजी प्रक्रिया है जारी
इस सड़क की बदहाली और ग्रामीणों के उग्र प्रदर्शन को लेकर जब ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) के कनीय अभियंता (JE) राजीव कुमार से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया:
“उक्त सड़क की जर्जर स्थिति की जानकारी विभाग को है. सड़क के नए सिरे से सुदृढ़ीकरण और निर्माण कार्य को लेकर जो भी जरूरी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं होती हैं, वे विभागीय स्तर पर की जा रही हैं. हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द निविदा (टेंडर) की प्रक्रिया को फाइनल कर धरातल पर निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाए, ताकि ग्रामीणों की समस्या का स्थाई समाधान हो सके.”
अब देखना यह होगा कि विभागीय इंजीनियर का यह आश्वासन कितनी जल्दी हकीकत में बदलता है या ग्रामीणों को आने वाले मानसून में भी इसी कीचड़ और गड्ढों से होकर गुजरना पड़ेगा.
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