अंतिम चरण में है जिले को कालाजार मुक्त घोषित करने की प्रक्रिया

कालाजार उन्मूलन की निर्णायक घड़ी, अररिया में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित

अररिया. जिले में अब कालाजार लगभग खत्म होने की स्थिति में है. निरंतर उपचार, सर्वेक्षण व जागरूकता संबंधी गतिविधियों की वजह से जिले को कालाजार मुक्त घोषित करने की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में है. इस तैयारी को सुदृढ़ व समन्वित करने के उद्देश्य से सदर अस्पताल सभा भवन में राज्य स्तरीय अधिकारियों, जिला स्वास्थ्य टीम व सहयोगी संस्थाओं की सहभागिता से एक दिवसीय कालाजार उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन मंगलवार को किया गया. जो जिले के सभी प्रखंडों में पूर्व कालाजार मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति का पुनर्मूल्यांकन, नये संभावित मामलों की पहचान व आवश्यक दस्तावेज़ीकरण को मजबूत बनाने पर केंद्रित था.

केंद्रीय दल के निरीक्षण से पहले तैयारियों की समीक्षा

कार्यशाला में राज्य स्वास्थ्य विभाग से विभीषण झा व रणविजय कुमार ने भाग लिया. वहीं सिविल सर्जन डॉ केके कश्यप, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ अजय कुमार सिंह, डीपीएम संतोष कुमार, डीएमएनई पंकज झा, बीडीसीओ राम कुमार दास व एफएलए प्रभात कुमार उपस्थित थे. पिरामल स्वास्थ्य के संजय झा, प्रफुल्ल झा, सिफार की ख़ुशबू कुमारी व अन्य संस्थाओं की भागीदारी रही. बैठक में बताया गया कि केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की टीम जल्द ही विभिन्न प्रखंडों का भ्रमण कर यह सुनिश्चित करेगी कि पूर्व में चिन्हित सभी वीएल व पीकेडीएल मरीज पूरी तरह स्वस्थ हैं व कहीं संक्रमण का जोखिम मौजूद नहीं है. यह निरीक्षण अररिया को कालाजार मुक्त घोषित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा.

2027 तक देश को कालाजार मुक्त बनाने का लक्ष्य

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ अजय कुमार सिंह ने कहा कि भारत सरकार 2027 तक देश को कालाजार मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. इस दिशा में अररिया ने उल्लेखनीय प्रगति की है. जिले में लक्षण आधारित जांच, घर-घर सर्वे, सक्रिय केस खोज, तत्काल उपचार व समुदाय आधारित जागरूकता गतिविधियों से नये मामलों की संख्या बेहद कम हुई है. लगातार निगरानी के बावजूद संक्रमण में गिरावट स्पष्ट करती है कि अररिया अब उन्मूलन के अंतिम चरण में है.

डोजियर प्रमाणपत्र हेतु दस्तावेजीकरण तेज

सिविल सर्जन डॉ केके कश्यप ने बताया कि कालाजार मुक्त जिला घोषित करने के लिए आवश्यक डोजियर प्रमाणपत्र तभी मिलेगा जब 2018 से अब तक के सभी मामलों की चिकित्सा, निगरानी व सहायता से जुड़ी सूचनाएं सटीक हों. केंद्रीय टीम मरीजों की रिपोर्ट, उपचार दस्तावेज, फॉलो-अप रिकॉर्ड व वित्तीय सहायता की स्थिति का मूल्यांकन करेगी. सभी प्रखंडों के रिकॉर्ड व्यवस्थित कर केंद्रीय दल को उपलब्ध कराया जा रहा है.

2024–25 में मामलों में बड़ी गिरावट

डीवीबीडीसीओ डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2024 में जिले में वीएल के 10 व पीकेडीएल के 02 मरीज मिले, जबकि 2025 में अब तक वीएल के 04 व पीकेडीएल का 01 मामला दर्ज किया गया है. सभी मरीज पूरी तरह स्वस्थ हैं.

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