अररिया जिले के फारबिसगंज प्रखंड अंतर्गत सीमांचल का प्रसिद्ध व्यापारिक केंद्र परवाहा हाट इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाली का दंश झेल रहा है. महज हल्की बारिश होते ही पूरा हाट परिसर और परवाहा-छातापुर मुख्य मार्ग झील में तब्दील हो जाता है. सड़क पर घुटनों तक गंदा पानी भर जाने के कारण स्थानीय दुकानदारों, किसानों और खरीदारी करने पहुंचे हजारों लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है. स्थिति यह है कि जलजमाव और कीचड़ के खौफ से खरीदारों ने हाट की ओर रुख करना कम कर दिया है, जिससे साप्ताहिक कारोबार बुरी तरह चरमरा गया है.
राजस्व में आगे, लेकिन बुनियादी सुविधाओं में पिछड़ा
परवाहा हाट की गिनती जिले के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण ग्रामीण बाजारों में होती है:
- व्यापार को भारी झटका: स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यह हाट सरकारी खजाने में भारी राजस्व देता है, लेकिन यहां बुनियादी ढांचे के नाम पर कुछ भी नहीं है. गंदे पानी के जमाव से लोग हाट में आने से कतरा रहे हैं, जिससे रोजमर्रा का व्यापार ठप होने के कगार पर पहुंच गया है.
- परवाहा-छातापुर मार्ग बाधित: बारिश के बाद मुख्य सड़क पर भारी जलभराव से दोपहिया, ई-रिक्शा और मालवाहक वाहनों का आवागमन खतरनाक हो जाता है. पैदल चलने वाले बुजुर्ग और महिलाएं फिसलकर चोटिल हो रहे हैं.
तकनीकी खामियों का शिकार बना नया सोख्ता
स्थानीय ग्रामीणों और दुकानदारों के अनुसार हाल ही में कराया गया सरकारी निर्माण कार्य गले की फांस बन चुका है:
- राहत के बजाय मुसीबत: जल निकासी के लिए हाल ही में बनाए गए सोख्ते (Soak Pit) में गंभीर तकनीकी खामियां हैं. बिना किसी सुव्यवस्थित जल निकासी योजना के इसका निर्माण कराए जाने के कारण यह पानी सोखने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है.
- दुर्गंध और बीमारियों का खतरा: कई-कई दिनों तक गंदा और सड़ता हुआ पानी जमा रहने से आसपास असहनीय बदबू फैल रही है. इसके कारण मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है और डेंगू, मलेरिया व चर्म रोग जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलने की गंभीर आशंका बन गई है.
आक्रोशित व्यवसायियों ने उठाई स्थायी नाले की मांग
परवाहा हाट के आक्रोशित व्यापारियों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से आर-पार के समाधान की गुहार लगाई है:
- पक्के नाले का निर्माण: स्थानीय लोगों की मांग है कि हाट परिसर से लेकर मुख्य मार्ग तक वैज्ञानिक तरीके से पक्के ड्रेनेज (नाले) का निर्माण कराया जाए, ताकि बारिश का पानी तुरंत बड़े आउटलेट में निकल सके.
- सोख्ते की तकनीकी जांच: निर्माण कार्य में हुई लापरवाही की जांच कराकर जल निकासी की वैकल्पिक और स्थायी व्यवस्था तत्काल प्रभाव से बहाल की जाए.
