डोली पर होगा मां दुर्गा का आगमन, जबकि हाथी पर करेंगी प्रस्थान
काली मंदिर में होगी रोजाना पूजा-अर्चना
By MRIGENDRA MANI SINGH | Updated at :
गुरुवार से होगा चैती नवरात्र आरंभषष्ठी, सप्तमी, अष्टमी व महानवमी को लगेगा काली मंदिर में महाभोग अररिया. वासंतिक नवरात्र गुरुवार को कलश स्थापना के साथ शुरू होगा. पहले दिन मां शैल पुत्री की पूजा-अर्चना होगी. नवरात्र को लेकर पूजा सामग्री की खरीदारी के लिए बाजार में भीड़ होने लगी है. नवरात्र को लेकर मंदिर व घर में कलश स्थान की तैयारी की जा रही है. अधिकांश लोग अपने घर में कलश स्थापना कर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं. पूजा को लेकर बरतन, पूजन सामग्री, फल दुकानों में काफी खरीदारी होती है. नवरात्रि के महापर्व पर देवी का आगमन व प्रस्थान का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है. यह भविष्य का संकेत भी करती है. पंचांग के अनुसार इस बार चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा का आगमन डोली पर हो रहा है. जबकि उनका प्रस्थान हाथी पर होगा, जो शुभ संकेत नहीं है. बताया कि नवरात्र का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. प्रथम दिन कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जायेगी. मां देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा नौ दिनों तक विधिपूर्वक होगी.
डोली पर होगा मां दुर्गा का आगमन
विश्व प्रसिद्ध मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर के साधक नानू बाबा ने बताया कि डोली पर सवार होकर आयेंगी. माता दुर्गा नवरात्रि के दौरान जब भी डोली या पालकी पर सवार होकर आती हैं तो इसे अच्छा संकेत नहीं माना जाता. माता का डोली पर सवार होकर आना कई मुश्किल स्थितियों को सामना कर सकता है. नवरात्रि के इस महापर्व पर देवी का आगमन व प्रस्थान का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है. यह भविष्य का संकेत भी करती है. इस बार चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा का आगमन डोली पर हो रहा है. जबकि उनका प्रस्थान हाथी पर होगा, जो शुभ संकेत नहीं है.
रामनवमी का महत्व
नानू बाबा ने बताया कि हिंदू कैलेंडर का त्योहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी मनाया जाता है. हिंदू धर्मशास्त्रों में इस बात का जिक्र है कि इस दिन मर्यादा-पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था. हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को राम नवमी का पर्व मनाया जाता है. हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार त्रेतायुग में रावण का वध करने व धर्म की पुन: स्थापना करने के लिए भगवान विष्णु ने मृत्यु लोक में श्रीराम के रूप में अवतार लिया था. श्रीरामचंद्र का जन्म चैत्र शुक्ल की नवमी तिथि के दिन पुनर्वसु नक्षत्र व कर्क लग्न में रानी कौशल्या की कोख से, अयोध्या में राजा दशरथ के घर में हुआ था. इसी उमंग में रामनवमी के दिन देश भर में राम जन्मोत्सव का त्योहार रामनवमी मनाया जाता है. इस दिन भगवान श्रीराम की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है.
काली मंदिर में रोजाना होगा पूजा
नानू बाबा ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी चैत्र नवरात्रि को लेकर प्रसिद्ध मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर में विशेष पूजा- अर्चना किया जायेगा. साथ ही मां खड्गेश्वरी महाकाली को षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी व महानवमी महाभोग लगाया जायेगा. पहला चैती नवरात्र के पहला पूजा से ही काली मंदिर में रोजाना विशेष पूजा-अर्चना किया जायेगा. रोजाना रात्रि आठ बजे आरती व पुष्पांजलि किया जायेगा. इसमें भाड़ी संख्या में भक्तगण शामिल होते हैं.नौ दिनों तक नौ रूपों की होगी पूजा19 मार्च (गुरुवार)- प्रतिपदा, मां शैलपुत्री की पूजा व घटस्थापना20 मार्च (शुक्रवार)- द्वितीया, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा21 मार्च (शनिवार)- तृतीया, मां चंद्रघंटा की पूजा22 मार्च (रविवार)- चतुर्थी, मां कूष्मांडा की पूजा23 मार्च (सोमवार)- पंचमी, स्कंदमाता की पूजा24 मार्च (मंगलवार)- षष्ठी, मां कात्यायनी की पूजा25 मार्च (बुधवार)- सप्तमी, मां कालरात्रि की पूजा26 मार्च (गुरुवार)- अष्टमी, मां महागौरी की पूजा और दुर्गा अष्टमी27 मार्च (शुक्रवार)- रामनवमी, कन्या पूजन व नवरात्र का समापन