Dragon Fruit Farming Success: भरगामा, अररिया से राष्ट्र भूषण पिंटू की खबर. अररिया जिले के भरगामा प्रखंड में किसानों ने ड्रैगन फ्रूट की खेती को नई उम्मीद और बेहतर आमदनी के विकल्प के रूप में अपनाना शुरू कर दिया है. स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माना जाने वाला यह फल अब किसानों के लिए आर्थिक मजबूती का जरिया बनता जा रहा है. बाजार में बढ़ती मांग और बेहतर मुनाफे के कारण किसान पारंपरिक खेती छोड़कर इस ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं.
‘सुपरफूड’ बन रहा किसानों का सहारा
ड्रैगन फ्रूट को दुनियाभर में सुपरफूड के रूप में पहचान मिल चुकी है. इसमें एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन सी, आयरन और फाइबर भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यह इम्यूनिटी बढ़ाने, वजन नियंत्रित रखने और पाचन तंत्र को मजबूत करने में मददगार माना जाता है.
स्वास्थ्य के प्रति लोगों की बढ़ती जागरूकता ने बाजार में इसकी मांग को तेजी से बढ़ाया है. यही वजह है कि भरगामा के किसान अब इसे लाभकारी फसल के रूप में देख रहे हैं.
भरगामा की मिट्टी और मौसम बने वरदान
स्थानीय किसान गुड्डू यादव बताते हैं that भरगामा क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए काफी अनुकूल है. उन्होंने कृषि विभाग की “आत्मा” योजना से प्रेरित होकर इसकी खेती शुरू की थी. अब यह खेती उन्हें पारंपरिक फसलों की तुलना में कहीं ज्यादा फायदा दे रही है.
ड्रैगन फ्रूट की खेती में पानी की जरूरत कम होती है और यह शुष्क मौसम में भी आसानी से उगाया जा सकता है. यही कारण है कि किसान इसे कम जोखिम और ज्यादा मुनाफे वाली फसल मान रहे हैं.
एक बार लगाओ, वर्षों तक कमाओ
ड्रैगन फ्रूट की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी उत्पादन क्षमता है. किसान बताते हैं कि इसके पौधे 20 से 25 वर्षों तक फल देते हैं. शुरुआती वर्षों में उत्पादन कम होता है, लेकिन तीसरे और पांचवें साल तक उत्पादन कई गुना बढ़ जाता है.
बाजार में इसका थोक भाव करीब 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाता है. ऐसे में एक यूनिट से लाखों रुपये की कमाई संभव हो रही है. किसानों का कहना है कि जहां गेहूं और मक्का की खेती में लागत ज्यादा और मुनाफा कम था, वहीं ड्रैगन फ्रूट ने उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत की है.
भरगामा बन सकता है नया हब
किसानों और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह खेती का विस्तार हुआ तो आने वाले समय में भरगामा ड्रैगन फ्रूट उत्पादन के लिए नई पहचान बना सकता है. इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि क्षेत्र की कृषि व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.
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