अररिया के सिकटी में एक दिवसीय प्रशिक्षण, सेविकाओं को मिली जिम्मेदारी और अधिकारों की जानकारी

Child Marriage Awareness Drive : बाल विवाह रोकने की मुहिम में गांव-गांव तक जागरूकता फैलाने की तैयारी, सेविकाओं को बनाया गया बदलाव का आधार

Child Marriage Awareness Drive : अररिया के सिकटी से संजय प्रताप सिंह की रिपोर्ट अररिया जिले के सिकटी प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सभागार में बाल विवाह रोकथाम और महिला सुरक्षा को लेकर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस अभियान का उद्देश्य आंगनबाड़ी सेविकाओं और महिला पर्यवेक्षिकाओं के माध्यम से समाज में जागरूकता बढ़ाना और बाल विवाह मुक्त जिला बनाने की दिशा में ठोस पहल करना है.

कार्यक्रम में बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा, उनके अधिकारों तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी पर विस्तार से चर्चा की गई. बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी सेविकाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया और प्रशिक्षण प्राप्त किया.

बाल विवाह उन्मूलन पर केंद्रित प्रशिक्षण

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करना और किशोरियों को शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना था. इस दौरान प्रतिभागियों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के साथ इसके कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी दी गई.

कार्यक्रम में सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने की शपथ भी दिलाई गई, जिससे सेविकाओं ने अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया.

अधिकारों और योजनाओं की दी गई जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना सहित कई सरकारी योजनाओं पर भी विस्तृत जानकारी दी गई. गर्भवती और धात्री महिलाओं को इन योजनाओं का लाभ कैसे मिले, इस पर विशेष चर्चा हुई.

इसके साथ ही महिलाओं और किशोरियों के लिए उपलब्ध हेल्पलाइन नंबर 1098, 112, 181 और 15001 जैसी आपातकालीन सेवाओं की जानकारी भी साझा की गई.

अधिकारियों और विशेषज्ञों की मौजूदगी

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी कंचन कुमारी ने की. इस अवसर पर सिकटी थानाध्यक्ष रौशन कुमार, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अजमत राणा, राजस्व पदाधिकारी सतीश कुमार सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे.

जागरण कल्याण भारती, फारबिसगंज के अध्यक्ष संजय कुमार ने प्रशिक्षण का संचालन करते हुए सेविकाओं से अपने क्षेत्र में सतर्कता और जागरूकता फैलाने की अपील की.

गांव स्तर पर बदलाव की उम्मीद

अधिकारियों ने कहा कि यदि आंगनबाड़ी सेविकाएं सक्रिय रूप से काम करें, तो बाल विवाह जैसी कुप्रथा को काफी हद तक रोका जा सकता है. यह प्रशिक्षण कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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