अररिया में करोड़ों की इमारत बेकार, अररिया में उपस्वास्थ्य केंद्र बना नशेड़ियों का अड्डा

Health Center Crisis: अररिया के रानीगंज प्रखंड में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए बना उपस्वास्थ्य केंद्र आज खुद बदहाली का शिकार है. कई साल बाद भी अस्पताल शुरू नहीं हो सका और अब वहां नशेड़ियों का जमावड़ा लगने लगा है.

Health Center Crisis: रवाहा(अररिया)से रवीन्द्र कुमार यादव की रिपोर्ट. रानीगंज प्रखंड के पचीरा पंचायत में वर्षों पहले बनाए गए प्राथमिक उपस्वास्थ्य केंद्र का संचालन आज तक शुरू नहीं हो सका है. स्वास्थ्य विभाग के दावों के बावजूद इलाके के लोगों को अब भी बुनियादी चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की गई इमारत अब उपेक्षा का शिकार हो चुकी है और यहां नशेड़ियों का जमावड़ा लगने लगा है.

अस्पताल बनने पर जगी थी उम्मीद

पचीरा पंचायत के लोगों को उम्मीद थी कि उपस्वास्थ्य केंद्र शुरू होने के बाद इलाज के लिए उन्हें दूर नहीं जाना पड़ेगा. पचीरा, विशनपुर और राघोपुर समेत आसपास के गांवों के लोगों को लगा था कि अब छोटी-बड़ी बीमारी के इलाज के लिए रानीगंज रेफरल अस्पताल की दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी. लेकिन निर्माण पूरा होने के कई साल बाद भी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा शुरू नहीं हो सकी.

वीरान भवन बना खतरे की जगह

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल भवन अब वीरान पड़ा रहता है. यहां सांप-बिच्छू के साथ-साथ नशेड़ियों का जमावड़ा लगा रहता है. भवन की देखरेख नहीं होने से आसपास के लोगों में डर और नाराजगी दोनों बढ़ रही है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते अस्पताल चालू नहीं किया गया तो भवन पूरी तरह जर्जर हो जाएगा.

विभागीय दावों पर उठ रहे सवाल

स्वास्थ्य विभाग लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का दावा करता है, लेकिन पचीरा का उपस्वास्थ्य केंद्र उन दावों की हकीकत बयां कर रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि भवन बनने के बाद भी डॉक्टर, नर्स या दवा की कोई व्यवस्था नहीं की गई. इससे लोगों में विभाग के प्रति निराशा बढ़ रही है.

“विभाग को भेजा गया है प्रस्ताव”

डॉ. रोहित कुमार झा ने बताया कि पचीरा उपस्वास्थ्य केंद्र को चालू कराने के लिए विभाग को पत्र भेजा गया है. विभागीय निर्देश मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. हालांकि ग्रामीण अब जल्द से जल्द अस्पताल शुरू कराने की मांग कर रहे हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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