जोगबनी : करीब एक सदी पुराने नेपाल-भारत जूट व्यापार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. भारत सरकार की ओर से नेपाल से निर्यात होने वाले जूट और जूट उत्पादों पर 400 प्रतिशत तक एंटी-डंपिंग शुल्क लगाने की सिफारिश के बाद विराटनगर और आसपास के जूट उद्योगों पर बंद होने का खतरा पैदा हो गया है. उद्योग जगत का कहना है कि प्रस्तावित शुल्क लागू हुआ तो इसका सीधा असर श्रमिकों, किसानों और सीमा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.
100 साल से जुड़ा है भारत-नेपाल का जूट कारोबार
बताया जाता है कि नेपाल ने करीब 100 वर्ष पहले जूट और जूट उत्पादों का भारत को निर्यात शुरू किया था. मोरंग, सुनसरी, झापा और उदयपुर में कच्चे जूट की खेती होती थी. इसके बाद सुनसरी-मोरंग औद्योगिक गलियारे में जूट का प्रसंस्करण कर भारत भेजा जाता रहा.
विराटनगर में जूट मिलों की स्थापना के साथ पूरे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला. इससे नेपाल के किसान, श्रमिक और उद्योगपति लाभान्वित हुए. सीमा पार बिहार के हजारों लोगों को भी इन मिलों में रोजगार मिला. माना जाता है कि जूट उद्योग ने जोगबनी शहर के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.
400% शुल्क की सिफारिश से बढ़ी चिंता
जूट उद्योग संघ के अध्यक्ष राजकुमार गोलछा के अनुसार, भारत के व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) ने जूट उत्पादों पर 400 प्रतिशत तक एंटी-डंपिंग शुल्क लगाने की सिफारिश की है. उद्योग संघ के अनुसार, अभी नेपाल से आने वाले जूट उत्पादों पर करीब 4 से 8 प्रतिशत तक शुल्क वसूला जाता है.
गोलछा ने कहा कि यदि वित्त मंत्रालय ने DGTR की सिफारिश को मंजूरी दे दी तो नेपाली जूट उद्योगों के लिए कारोबार जारी रखना बेहद मुश्किल हो जाएगा और कई उद्योगों को बंद करने की नौबत आ सकती है. प्रस्तावित शुल्क अगले सितंबर से लागू होने की संभावना जतायी जा रही है.
उन्होंने कहा कि नेपाल में बिजली शुल्क पर वैट और निर्यात सब्सिडी में कटौती के कारण जूट उद्योग पहले से ही आर्थिक दबाव में है. ऐसे में अतिरिक्त शुल्क उद्योग के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है.
20 हजार से अधिक लोगों पर पड़ेगा असर
प्रस्तावित शुल्क से सुनसरी-मोरंग औद्योगिक गलियारे में संचालित छह जूट उद्योग सीधे प्रभावित होने की आशंका है.
संभावित प्रभाव :
- करीब 13 हजार श्रमिकों के रोजगार पर संकट
- 7,500 से अधिक किसान परिवारों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका
- सीमा क्षेत्र के व्यापार और परिवहन कारोबार पर असर
- जूट उद्योग से जुड़े छोटे-बड़े व्यवसायों पर भी दबाव
उद्योग संघ के अनुसार पिछले वर्ष नेपाल से भारत को करीब 10.66 अरब रुपये मूल्य के जूट उत्पादों का निर्यात हुआ था. इन उत्पादों में नेपाल, भारत और बांग्लादेश से प्राप्त कच्चे माल से तैयार वस्तुएं शामिल थीं.
सरकार से तत्काल पहल की मांग
जूट उद्योग संघ के अध्यक्ष राजकुमार गोलछा ने नेपाल सरकार से इस मामले में तत्काल संस्थागत पहल करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि एक सदी से चले आ रहे भारत-नेपाल जूट व्यापार को बचाने के लिए दोनों देशों के स्तर पर संवाद जरूरी है.
जूट उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि प्रस्तावित 400 प्रतिशत तक शुल्क लागू हुआ तो नेपाल से जूट उत्पादों का भारत निर्यात लगभग ठप हो सकता है. इसका असर सिर्फ उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि श्रमिकों, किसानों और सीमावर्ती क्षेत्र की पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.
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