अररिया में खाद की बढ़ी कीमतों से किसान और दुकानदार दोनों परेशान, डीएओ ने बुलाई 8 अगस्त की बैठक

अररिया के भरगामा प्रखंड में खाद की कीमतों को लेकर किसानों और खुदरा दुकानदारों में भारी नाराजगी है. यूरिया और डीएपी तय कीमत से काफी अधिक दर पर बिक रहे हैं, जिससे खेती करना मुश्किल हो गया है. इस मामले में जिला कृषि पदाधिकारी ने 8 अगस्त को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है.

Araria News: अररिया जिले के भरगामा प्रखंड में खाद की कीमतों को लेकर किसानों में भारी नाराजगी है. प्रभात खबर से बातचीत में कई किसानों ने आरोप लगाया कि बाजार में यूरिया और डीएपी की बिक्री तय कीमत से काफी अधिक दर पर की जा रही है. किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन के दौरान खाद की जरूरत सबसे अधिक होती है और इसी समय उन्हें सबसे ज्यादा आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है.

किसान बोले- यूरिया 400-500 रुपये और DAP 4600 रुपये तक मांगा

भरगामा के धनेश्वरी निवासी किसान बिनोद मंडल ने बताया कि यूरिया 400 से 500 रुपये प्रति बोरा तक बेचा जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि एक दुकानदार ने डीएपी के लिए 4600 रुपये तक की मांग कर दी. किसानों का आरोप है कि कई दुकानदार खाद के साथ जिंक, बोरॉन, कैल्शियम, जाइम, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे उत्पाद अनिवार्य रूप से जोड़ देते हैं, जिससे उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ती है.

किसानों का कहना है कि यदि वे केवल खाद खरीदना चाहते हैं, तब भी उन्हें अतिरिक्त उत्पाद लेने के लिए मजबूर किया जाता है. उनका आरोप है कि जिंक और जाइम का पैसा जबरन खाद के बोरे के साथ जोड़कर वसूला जा रहा है.

खेती करना मुश्किल हो गया है

नया भरगामा निवासी किसान भोला पासवान ने बताया कि उन्होंने यूरिया 450 रुपये में खरीदा. डीएपी महंगी होने के कारण उन्होंने मिश्रित खाद खरीदी, जिसके लिए उन्हें 1900 से 2000 रुपये तक चुकाने पड़े. उनका कहना है कि लगातार बढ़ती लागत के कारण खेती करना अब पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है.

किसानों के अनुसार बीज, डीजल, मजदूरी और सिंचाई की लागत पहले से ही बढ़ी हुई है. ऐसे में खाद की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे उनकी आय और उत्पादन लागत पर असर डाल रही है.

खुदरा दुकानदार भी बोले- हम भी मजबूर हैं

खुदरा खाद विक्रेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें भी निर्धारित दर पर खाद नहीं मिल रही है. उनके अनुसार थोक विक्रेता यूरिया का बोरा 280 से 300 रुपये में दे रहे हैं. इसके अलावा रानीपतरा रेक प्वाइंट से दुकान तक खाद लाने में प्रति बोरा 40 से 60 रुपये तक परिवहन खर्च भी देना पड़ता है.

डीएपी को लेकर भी दुकानदारों ने गंभीर स्थिति बताई. उनका कहना है कि थोक विक्रेता डीएपी 1700 से 1800 रुपये में दे रहे हैं, जबकि उन्हें यह 1325 रुपये के आसपास मिलना चाहिए. ऐसी स्थिति में खुदरा विक्रेता 1700 से 1800 रुपये में खरीदकर 2000 से 2200 रुपये में बेचने को मजबूर हैं, जबकि डीएपी का निर्धारित मूल्य लगभग 1350 रुपये होना चाहिए.

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Araria News: प्रशासन पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि खाद की कीमतों की निगरानी और नियंत्रण की जिम्मेदारी जिला कृषि पदाधिकारी की है. किसानों और दुकानदारों दोनों ने प्रशासन से कालाबाजारी और ओवररेटिंग पर रोक लगाने की मांग की है.

जिला कृषि पदाधिकारी पंकज कुमार ने कहा कि सभी थोक और खुदरा विक्रेताओं को निर्धारित दर पर खाद बेचने का निर्देश जारी कर दिया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

उन्होंने यह भी कहा कि रेक प्वाइंट से खाद उठाव और परिवहन खर्च की भी जांच होगी. यदि परिवहन मद में पहले से राशि दी जा रही है, तो खुदरा विक्रेताओं पर अतिरिक्त बोझ डालना गलत है.

8 अगस्त को होगी बैठक, किसानों के लिए हेल्पलाइन भी जारी

डीएओ ने बताया कि 8 अगस्त को थोक और खुदरा खाद विक्रेताओं की बैठक बुलाई गई है, जिसमें सख्त निर्देश दिए जाएंगे. खाद की कीमतों पर नियंत्रण और शिकायतों के समाधान के लिए एक नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है.

यह नियंत्रण कक्ष प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित होगा. किसान 9304462840, 8789285045 और 9199691927 नंबर पर सीधे शिकायत दर्ज करा सकते हैं. जिला कृषि पदाधिकारी ने कहा कि प्रत्येक शिकायत की जांच कर दोषी पाए जाने पर कार्रवाई निश्चित रूप से की जाएगी.

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लेखक के बारे में

By मृगेंद्रमणि सिंह

मृगेंद्रमणि सिंह प्रिंट माध्यम में 16 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. प्रभात खबर के अररिया कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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