मौत का बंद लिफाफा और चेन्नई कनेक्शन! अररिया कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी के पीछे आखिर कौन? जांच में घूमा पुलिस का सिर

अररिया सिविल कोर्ट को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली है, इस बार बंद लिफाफे में आए पत्र से. पत्र में खुद को सरकारी वकील बताने वाले व्यक्ति का चेन्नई कनेक्शन सामने आया है. पुलिस मामले की तह तक पहुंचने के लिए जांच में जुटी है.

अररिया. अररिया सिविल कोर्ट को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली है. इस बार धमकी ई-मेल या फोन के जरिये नहीं, बल्कि बंद लिफाफे में भेजे गये पत्र के माध्यम से दी गयी है. पत्र में 10 सितंबर से पहले कोर्ट को बम से उड़ाकर ‘डिस्ट्रॉय’ करने की बात लिखी गयी है. पत्र मिलते ही कोर्ट परिसर में हड़कंप मच गया. जिला जज की ओर से मामले की सूचना एसपी को दी गयी, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल कोर्ट परिसर की सघन जांच शुरू कर दी. राहत की बात रही कि जांच के दौरान कहीं से कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक नहीं मिला.

बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वायड ने खंगाला पूरा परिसर

सूचना मिलते ही सदर एसडीपीओ सुशील कुमार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और जवान कोर्ट परिसर पहुंचे. एसटीएफ पूर्णिया के डीएसपी मो. अली साबरी, अररिया साइबर डीएसपी रघुनाथ सिंह और नगर थानाध्यक्ष मनीष कुमार रजक भी टीम के साथ मौजूद रहे.

बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड की मदद से कोर्ट परिसर के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली गयी. जजों के चेंबर, कोर्ट रूम, बरामदा, कार्यालय और पार्किंग समेत अन्य स्थानों की सघन जांच की गयी. कई घंटे तक चले जांच अभियान के दौरान कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक नहीं मिला.

पत्र लिखने वाले ने खुद को बताया सरकारी वकील

धमकी भरे पत्र में भेजने वाले ने खुद को सरकारी वकील बताया है. पत्र में दावा किया गया कि उसकी पत्नी के मोबाइल नंबर पर धमकी भरा कॉल आया था. पत्र में कथित पत्नी का मोबाइल नंबर भी लिखा गया था. पुलिस ने जब उस नंबर का सत्यापन किया तो पत्र में किये गये दावे पर सवाल खड़े हो गये.

पुलिस जांच में चेन्नई का निकला मोबाइल नंबर

सदर एसडीपीओ सुशील कुमार ने बताया कि पत्र में दिया गया मोबाइल नंबर चेन्नई का निकला. पुलिस ने नंबर पर संपर्क किया तो संबंधित महिला ने बताया कि उसका पति सरकारी वकील नहीं है. महिला ने यह भी कहा कि उसे किसी तरह का धमकी भरा कॉल नहीं आया है. पुलिस अब पत्र की भाषा, लिफाफे और डाक के जरिये इसे भेजने वाले व्यक्ति की पहचान करने में जुटी है. साइबर सेल के साथ पुलिस डाक विभाग की मदद से भी पत्र के स्रोत तक पहुंचने का प्रयास कर रही है.

प्राथमिकी दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस

एसपी जितेंद्र कुमार ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज करायी जा रही है. पुलिस धमकी भरे पत्र के पीछे के व्यक्ति और उसके उद्देश्य का पता लगाने में जुटी है. पत्र कहां से डाक किया गया, किस माध्यम से भेजा गया और इसे भेजने वाले तक कैसे पहुंचा जा सकता है, इन बिंदुओं पर जांच की जा रही है.

एहतियात के तौर पर कोर्ट परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर सुरक्षा बढ़ा दी गयी है. कोर्ट में आने-जाने वाले लोगों की सघन जांच भी की जा रही है.

आठ माह में पांचवीं बार मिली कोर्ट उड़ाने की धमकी

अररिया सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकियों का सिलसिला पिछले आठ महीनों से जारी है. ताजा मामला इस अवधि में पांचवीं धमकी है. इससे पहले भी ई-मेल और फोन के माध्यम से धमकियां मिल चुकी हैं. हर बार पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने कोर्ट परिसर की सघन जांच की, लेकिन कोई विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली. लगातार धमकियों के कारण न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और कर्मचारियों में चिंता बढ़ी है. पुलिस की ओर से हर बार सुरक्षा जांच और तलाशी अभियान चलाया गया है.

8 जनवरी को पहली बार मिली थी धमकी

पहली धमकी - 8 जनवरी 2026. बिहार के चार बड़े सिविल कोर्ट को एक साथ बम से उड़ाने की धमकी वाला ई-मेल आया था. इसमें अररिया कोर्ट भी निशाने पर था. इसके बाद पूरे कोर्ट परिसर को खाली कराकर जांच की गयी थी, लेकिन कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली थी.

28 जनवरी को फिर कई जिला न्यायालय निशाने पर

दूसरी धमकी - 28 जनवरी 2026. अररिया समेत बिहार के कई जिला न्यायालयों को फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली थी. इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर आ गयी थीं और न्यायालय परिसरों में जांच की गयी थी.

12 फरवरी को सीधे अररिया कोर्ट को मिली धमकी

तीसरी धमकी - 12 फरवरी 2026. इस दिन भी अररिया सिविल कोर्ट को सीधे तौर पर निशाना बनाकर धमकी दी गयी थी. पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने परिसर की जांच की थी, लेकिन कोई विस्फोटक नहीं मिला.

13 अप्रैल को ई-मेल से भेजी गयी धमकी

चौथी धमकी - 13 अप्रैल 2026. इस बार ई-मेल के जरिये अररिया कोर्ट को उड़ाने की धमकी दी गयी. साइबर सेल ने मामले की जांच की, लेकिन धमकी भेजने वाले की पहचान नहीं हो सकी.

3 सितंबर की धमकी सबसे अलग

पांचवीं धमकी - 3 सितंबर 2026. ताजा धमकी पहले के मामलों से अलग है. इस बार ई-मेल या फोन की जगह बंद लिफाफे में पत्र भेजा गया. पत्र में 10 सितंबर से पहले कोर्ट को ‘डिस्ट्रॉय’ करने की बात कही गयी है. पुलिस अब पत्र और लिफाफे के जरिये भेजने वाले तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.

शरारत या सोची-समझी साजिश, जांच में जुटी पुलिस

लगातार मिल रही धमकियों के बीच अब यह सवाल भी उठ रहा है कि मामला किसी शरारती तत्व की करतूत है या न्यायिक व्यवस्था को अस्थिर करने की कोई सोची-समझी कोशिश. हालांकि अब तक मिली धमकियों की जांच में कोई विस्फोटक नहीं मिला है, लेकिन बार-बार धमकी मिलने के कारण पुलिस इसे गंभीरता से ले रही है. सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ धमकी भेजने वाले की पहचान करना पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती है.

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लेखक के बारे में

By राहुल सिंह

राहुल सिंह प्रिंट माध्यम में 10 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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