अररिया के कस्तूरबा विद्यालय में छात्राओं से राशन और गैस सिलिंडर ढुलवाने का आरोप, अभिभावकों और ग्रामीणों में आक्रोश

अररिया जिले के बथनाहा प्रखंड स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय से चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां छात्राओं पर पढ़ाई के समय आलू-प्याज की बोरियां और गैस सिलिंडर ढुलवाने का आरोप है. इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे अभिभावकों और ग्रामीणों में भारी रोष है.

बथनाहा(अररिया) से विनय कुमार ठाकुर

Araria News: अररिया जिले के बथनाहा प्रखंड स्थित सोनापुर पंचायत के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय से शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है. आरोप है कि विद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं से पढ़ाई के समय आलू-प्याज की बोरियां और गैस सिलिंडर ढुलवाया जा रहा है. इस घटना के सामने आने के बाद अभिभावकों, ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश है.

किताबों की जगह राशन की बोरियां और सिलिंडर

स्थानीय लोगों के अनुसार विद्यालय परिसर में छात्राओं से राशन सामग्री उठवाने का काम कराया गया. आरोप है कि छात्राएं आलू-प्याज की बोरियां और भारी गैस सिलिंडर विद्यालय परिसर के भीतर ले जाती हुई देखी गईं. यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब राज्य सरकार बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार योजनाएं चला रही है और कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों को विशेष रूप से वंचित और जरूरतमंद बालिकाओं के लिए सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने का माध्यम माना जाता है.

अभिभावकों का कहना है कि वे अपनी बेटियों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद से विद्यालय भेजते हैं. यदि विद्यालय में पढ़ाई के समय उनसे इस प्रकार का काम कराया जाएगा तो इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होगी और शिक्षा का मूल उद्देश्य कमजोर पड़ेगा.

विद्यालय प्रबंधन की कार्यशैली पर उठे सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि केवल राशन ढुलवाने तक मामला सीमित नहीं है. उनके अनुसार छात्राओं से झाड़ू लगवाने, आलू-प्याज छिलवाने, बर्तन साफ कराने और बाथरूम की सफाई जैसे कार्य भी कराए जाते हैं. यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल विद्यालय प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि बालिका शिक्षा और छात्राओं के अधिकारों से जुड़े गंभीर मुद्दों को भी सामने लाता है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि आवासीय विद्यालयों में रहने वाली बच्चियों का अधिकांश समय पढ़ाई, खेल, सह-पाठयक्रम गतिविधियों और व्यक्तित्व विकास में लगना चाहिए. इस प्रकार के कार्य उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं.

अभिभावकों और ग्रामीणों में भारी नाराजगी

घटना की जानकारी सामने आने के बाद गांव में चर्चा का माहौल है. कई अभिभावकों ने विद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा है और कहा है कि यदि बच्चियों से घरेलू या श्रम संबंधी कार्य कराए जा रहे हैं, तो इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए.

ग्रामीणों का कहना है कि कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों की स्थापना विशेष रूप से उन बालिकाओं के लिए की गई थी, जिन्हें शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध नहीं हो पाते. ऐसे संस्थानों में यदि छात्राओं के साथ इस तरह का व्यवहार होगा, तो समाज में गलत संदेश जाएगा.

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी जताई चिंता

इस मामले पर शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी चिंता व्यक्त की है. उनका कहना है कि सरकार बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है, लेकिन यदि विद्यालय स्तर पर छात्राओं से श्रम कराया जाता है तो यह पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है.

उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. साथ ही सभी आवासीय विद्यालयों में छात्राओं की गरिमा, सुरक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट निगरानी व्यवस्था लागू की जाए.

Araria News: प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार

फिलहाल स्थानीय लोगों की नजर शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की संभावित कार्रवाई पर टिकी है. ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी आवासीय विद्यालय में छात्राओं से इस प्रकार का काम न कराया जाए.

यह मामला केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यह उन व्यवस्थाओं की भी परीक्षा है जिनका उद्देश्य बेटियों को सुरक्षित, सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है.

Also Read: बांकीपुर में हार के बाद BJP में मंथन शुरू, CM सम्राट चौधरी अचानक पहुंचे प्रदेश कार्यालय, बंद कमरे में चल रही है बैठक

Also Read: मनोज तिवारी फ्रॉड आदमी हैं', विधायक बनने के बाद प्रशांत किशोर का चैलेंज- हिम्मत है तो भरत तिवारी के परिवार को न्याय दिलाकर दिखाएं


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >