अररिया : पति की मौत के बाद दो बच्चों और मां की जिम्मेदारी संभालना अंजू देवी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था. आर्थिक तंगी के कारण उन्हें दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा कर परिवार का भरण-पोषण करना पड़ता था. लेकिन जीविका से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी ने नई राह पकड़ ली. आज अंजू अपना ब्यूटी पार्लर चला रही हैं और इससे प्रतिमाह करीब 15 से 20 हजार रुपये की आमदनी कर रही हैं.
2018 में जीविका से जुड़कर मिली नई राह
पलासी प्रखंड के बलुआ कलियागंज की रहने वाली अंजू वर्ष 2018 में सना जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं. समूह की बैठकों में शामिल होने के दौरान उन्हें बचत, स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिली. आर्थिक स्थिति को देखते हुए समूह की महिलाओं ने उनका नाम सतत जीविकोपार्जन योजना के लाभार्थी के रूप में अनुमोदित किया.
रोजगार के विकल्प के रूप में अंजू ने ब्यूटी पार्लर का काम चुना. उन्होंने मायके में ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण लिया था. इसी हुनर को रोजगार का माध्यम बनाने के लिए जीविका की ओर से उन्हें 10 हजार रुपये की सहायता दी गयी. कारोबार बढ़ाने के लिए बाद में 20 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि भी उपलब्ध करायी गयी.
मेहनत से कारोबार ने पकड़ी रफ्तार
अंजू ने मिली राशि का इस्तेमाल ब्यूटी पार्लर शुरू करने और आवश्यक सामान खरीदने में किया. धीरे-धीरे ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी और उनकी आमदनी में भी सुधार हुआ. शुरुआती संघर्ष के दौरान जीविका की ओर से सात महीने तक प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता भी दी गयी.
इसके अलावा मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत उन्हें 10 हजार रुपये की राशि मिली, जिसका उपयोग उन्होंने ब्यूटी पार्लर के लिए जरूरी सामान खरीदने में किया. लगातार मेहनत और लगन के बल पर आज उनका कारोबार बेहतर स्थिति में पहुंच गया है.
परिवार चलाने के साथ कर रहीं बचत
अंजू अब ब्यूटी पार्लर से हर महीने करीब 15 से 20 हजार रुपये कमा रही हैं. इसी आमदनी से वह परिवार का खर्च चला रही हैं और कुछ राशि बचत भी कर पा रही हैं. कभी दूसरों के घरों में काम करने वाली अंजू आज अपने हुनर के दम पर खुद का रोजगार चला रही हैं.
बोलीं अंजू, जीविका ने दिखाई आत्मनिर्भरता की राह
अंजू बताती हैं कि जीविका से जुड़ने से पहले जिंदगी बेहद मुश्किल थी. अगर जीविका का सहयोग नहीं मिला होता तो शायद आज भी उन्हें दूसरों के घरों में काम करना पड़ता. जीविका से जुड़ने के बाद उन्हें अपने हुनर को रोजगार में बदलने का अवसर मिला. अब वह अपने व्यवसाय से परिवार का भरण-पोषण करने के साथ आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं.
