अधिवक्ताओ ने इंस्पेक्टिंग जज का किया भव्य स्वागत

गुलदस्ता देकर किया स्वागत

63प्रतिनिधि, अररिया पटना हाई कोर्ट के जस्टिस सह न्याय मंडल अररिया के इंस्पेक्टिंग जज अशोक कुमार पांडेय का एक दिवसीय इंस्पेक्शन के दौरान शनिवार को सिविल कोर्ट अररिया के अधिवक्ताओं ने उनका स्वागत सम्मान समारोह के रूप में किया. शनिवार को जिला बार एसोसिएशन व जिला अधिवक्ता संघ के संयुक्त तत्वावधान में लल्लू बाबू सभागार में उपस्थित अधिवक्ताओं ने जोश व उल्लास के साथ इंस्पेक्टिंग जज का स्वागत किया. सम्मान समारोह की अध्यक्षता वरीय अधिवक्ता सह लोक अभियोजक (पीपी) लक्ष्मी नारायण यादव ने की. मुख्य अतिथि के रूप में इंस्पेक्टिंग जज अशोक कुमार पांडेय, विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रिंसिपल जिला एवं सत्र न्यायाधीश गूंजन पांडेय व सम्मानित अतिथि के रूप में अवर न्यायाधीश सह डीएलएसए सेक्रेटरी रोहित श्रीवास्तव उपस्थित हुए. अधिवक्ताओं ने सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि इंस्पेक्टिंग जज अशोक कुमार पांडेय को गुलदस्ता व माला पहनाकर स्वागत किया वही, शॉल ओढ़ाकर उनका अभिनंदन किया गया. इस अवसर पर इंस्पेक्टिंग जज अशोक कुमार पांडेय ने अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि बार व बेंच एक सिक्के के दो पहलू होते हैं. केवल वादों से बातें नहीं बनती, हमें सिस्टम को एडॉप्ट कर काम को अंजाम देना होता है. इसके लिए हमें पूर्व के सभी पत्राचार के साथ आप हमें समुचित जानकारी मुहैया करावें तो समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर प्राथमिकता के साथ उसके समाधान का प्रयास करूंगा. अधिवक्ताओ ने इंस्पेक्टिंग जज अशोक कुमार पांडेय की बातों को काफी सराहा. इसी क्रम में जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक पांडेय, महासचिव कामाख्या यादव व जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष तपन कुमार बनर्जी, महासचिव छंगुरी मंडल ने अपने अपने अभिभाषण मे इंस्पेक्टिंग जज के आगमन को सुखद बताया. जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक पांडेय ने जिला बार एसोसिएशन व जिला अधिवक्ता संघ द्वय द्वारा संयुक्त रूप से इंस्पेक्टिंग जज को अधिवक्ताओं की ओर से अभिनंदन पत्र भी समर्पित किया. वरीय अधिवक्ता सह लोक अभियोजक (पीपी) लक्ष्मी नारायण यादव ने जिला स्थापना सहित यहां जजशीप की स्थापना का संक्षिप्त जानकारी देते हुए अधिवक्ताओं की समस्याओं की ओर ध्यान आकृष्ट कराया. कहा कोर्ट परिसर में निर्माण कार्य के बावजूद अधिवक्ताओं के लिए भवन का निर्माण अब तक नहीं हो पाया है. अधिवक्ताओं की भावना के मद्देनजर वकालत खाना का नवनिर्माण की अनुमति देने के विचार पर जोर दिया गया. जबकि एससी-एसटी, पोक्सो आदि कोर्ट भवन भी सिविल कोर्ट के आसपास होने से न्यायार्थियों को आर्थिक व मानसिक परेशानी से निजात मिलने की उम्मीद जताया.

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