मृगेंद्र मणि सिंह, अररिया : नगर परिषद अररिया के मुख्य पार्षद की कुर्सी पर 2007 से ही नजर लगने का सिलिसिला जारी हो गया. हालांकि मुख्य पार्षद को गिराने का प्रयास तो पहले भी होता रहा लेकिन कोई भी सफल नहीं हो पाया. लेकिन यह बताना लाजिमी होगा कि 2007 ही ऐसा वर्ष था
जब निर्वाचित हुई मुख्य पार्षद अंजनी जयसवाल को दो साल पूरा होने पर वर्ष 2009 में उनके बोर्ड की ही उप मुख्य पार्षद अफसाना प्रवीण ने अविश्वास की चपत लगायी. वर्ष 2012 में नये बोर्ड का गठन हुआ. स्वीटीदास गुप्ता मुख्य पार्षद बनी. लेकिन फिर उप मुख्य पार्षद अफसाना प्रवीन ने उन्हें गच्चा दिया व दो वर्ष बाद 2014 में नप के चेयरमन का पद हाशिल करने में सफल हो गयीं. उनके साथ गौतम साह को उप मुख्य पार्षद बने.
वर्ष 2017 में हुए चुनाव में रीतेश कुमार राय वार्ड संख्या 17 से निर्विरोध निर्वाचित हुए. उनके साथ उप मुख्य पार्षद अफसाना प्रवीन कदम से कदम मिलाकर चलीं. नतीजा 29 में से 22 मत लाकर रीतेश निर्विरोध मुख्य पार्षद निर्वाचित हुए. वे दो वर्ष के कार्यकाल के दौरान पार्षदों को मिलाकर चलने का प्रयास किये. हालांकि कुछ दिनों पूर्व पार्षदों का एक धरा कुछ कार्यों को पूरा कराने की मांग को लेकर आक्रामक हुआ.
लेकिन पुन: मामला सुलझता दिखा. 08 जून को नप बोर्ड की बजट की बैठक हुई. कई योजनाओं को लिया गया. 157 करोड़ का बजट भी बना. लेकिन दो दिन बाद ही 10 जून को अविश्वास की कवायद ने अररिया नप की फिजा में गर्माहट घोल दिया. इधर सूत्रों की मानें तो 29 पार्षद वाले अररिया नप में मुख्य पार्षद व विरोधी खेमा का नेतृत्व कर रहे सुमित कुमार सुमन फील गुड में हैं. अब देखना दिलचस्प होगा कि रीतेश अपनी कुर्सी बचा पाते हैं कि या फिर वे बाहर हो जाते हैं.
निर्णय कर लेना होगी जल्दबाजी
छात्र राजनीति से ही भाजपा के कार्यकर्ता रहे रीतेश कुमार के जीवन में वर्तमान सांसद प्रदीप कुमार सिंह का मजबूती के साथ सर पर हाथ रहा है. वे हमेशा उनके हित के लिए अच्छा करते आये हैं.
खुद एक बार चर्चा के क्रम में मुख्य पार्षद रीतेश कुमार राय ने भी बताया था कि नप अररिया में आइएचएसडीपी योजना के तहत 715 आवास दिलाये जाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही थी. वे सांसद थे जबकि उनकी सरकार भी नहीं थी. बावजूद बिहार के अररिया शहर के लोगों के प्रति उनकी सोच समारात्मकता की प्रतिरूप रही है.
उनके बदोलत ही शहर के लोगों को आइएचएसडीपी योजना का लाभ मिल पाया था. ऐसे में सांसद भी प्रदीप कुमार सिंह हैं सरकार भी उनकी है. उनके विश्वास पात्र रीतेश के साथ उनका कितना साथ रहता है देखना दिलचस्प होगा. हालांकि यह चर्चा भी रही है कि अभी तक अररिया की राजनीति में बगैर सांसद प्रदीप कुमार सिंह के हस्तक्षेप के चित व पट का निर्णय ले लेना जल्दबाजी होगी.
11 करोड़ की योजनाओं का टेंडर कर सभी पार्षदों को दिया था बराबर का हक
लोकसभा चुनाव प्रक्रिया शुरू करने से पहले नप में मुख्य पार्षद व ईओ के द्वारा लगभग 11 करोड़ की योजनाओं का टेंडर जारी किया गया था. इसमें सभी पार्षदों को सामान्य तौर पर काम बांटे गये. उन्होंने कमोबेश सभी वार्डों में योजनाओं का टेंडर निकाला. इससे पार्षदों का साथ मिलने के आसार दिख रहे थे. लेकिन उप मुख्य पार्षद के पति मो इम्तियाज ने यह कह कर पूर्व में ही सकते में लोगों को डाल दिया था कि 09 जून के बाद मुख्य पार्षद के विरुद्ध अविश्वास लाया जायेगा. जो सही होता प्रतीत हो रहा है.
