New Rail Line: बिहार और उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों के लंबे इंतजार को अब राहत मिलने वाली है. आरा-बलिया रेल लाइन परियोजना अब कागजों से निकलकर जमीन पर उतरने वाली है. वर्षों से अटकी इस योजना को लेकर अब तैयारियां तेज हो गई हैं. फाइनल लोकेशन सर्वे, ड्रोन मैपिंग और डीपीआर तैयार कर रेलवे मंत्रालय को सौंप दी गई है. अब जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है.
करीब 2300 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना भोजपुर, बक्सर, सारण और बलिया के साथ दियारा इलाके के लाखों लोगों के लिए बड़ी सौगात मानी जा रही है. इस रेल लाइन के शुरू होने से आरा और बलिया के बीच की दूरी लगभग 40 किलोमीटर तक कम हो जाएगी.
रघुनाथपुर होकर तैयार किया गया नया रूट
नई रेल लाइन बलिया जिले के रघुनाथपुर स्थित जीत बाबा स्थान के पास से गुजरेगी. वहां से यह वीर लोरिक स्थान, जलालपुर खुर्द, रामपुर बस्तर, पिंडारी और बादिलपुर होते हुए गंगा नदी पार कर भोजपुर जिले में दाखिल होगी. इसके बाद यह जगजीवन हॉल्ट के पास आरा रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगी.
रेलवे अधिकारियों के अनुसार शुरुआती सर्वे के दौरान कुछ हिस्सों में दलदली जमीन मिलने की वजह से तकनीकी दिक्कतें सामने आई थीं. खासकर बकुल्हा-आरा और संहतवार-बादिलपुर के बीच चुनौती ज्यादा थी. इसी कारण रूट में बदलाव कर इसे रघुनाथपुर की ओर मोड़ा गया.
ड्रोन सर्वे और थ्रीडी मैपिंग से तैयार हुई रिपोर्ट
इस परियोजना के लिए रेलवे ने लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का सहारा लिया है. हैदराबाद की आरबी एसोसिएट सर्वे कंपनी की 16 सदस्यीय टीम ने पूरे रूट पर ग्राउंड लेवलिंग, मिट्टी जांच और जीपीएस आधारित सर्वे पूरा किया. इससे पहले ड्रोन सर्वे और थ्रीडी मैपिंग भी कराई गई थी.
अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी जांच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेज दी गई है. परियोजना में दो बड़ी नदियों पर एलिवेटेड रेल पुल बनाने की योजना भी शामिल है, जिससे रेल संचालन और सुरक्षित हो सके.
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1960 के दशक का सपना अब पकड़ रहा रफ्तार
आरा-बलिया रेल लाइन की मांग कोई नई नहीं है. इस परियोजना की मांग 1960 के दशक से लगातार उठती रही है. 2009 के रेल बजट में इसकी घोषणा भी हुई थी, लेकिन लंबे समय तक यह योजना फाइलों में ही सीमित रही. पिछले कुछ वर्षों में पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह और पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त के प्रयासों से इस योजना ने फिर गति पकड़ी. पूर्व सांसद ने कहा कि अगले एक-दो महीने में टेंडर प्रक्रिया शुरू हो सकती है.
इस परियोजना के पूरा होने के बाद जिन गांवों में अब तक बेहतर सड़क और रेल संपर्क नहीं था, वहां व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे. किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी. छात्रों के लिए आवागमन बेहतर होगा और व्यापारियों को भी बड़ा लाभ मिलेगा.
रेलवे के मुख्य जनसंपर्क पदाधिकारी सुमित कुमार के अनुसार सर्वे रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी जा चुकी है. करीब 78 करोड़ रुपये सर्वे पर खर्च हो चुके हैं, इसलिए दोबारा सर्वे की संभावना बेहद कम है. अब तकनीकी और इंजीनियरिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मंजूरी का इंतजार है.
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