Success Story: सफलता की राह हमेशा आसान नहीं होती. कई बार मंजिल तक पहुंचने से पहले बार-बार असफलता का सामना करना पड़ता है. ऐसे में जो लोग हार मानने के बजाय अपनी गलतियों से सीखते हैं, वही आखिरकार सफलता हासिल करते हैं. मध्य प्रदेश की रहने वाली आस्था दमेले की कहानी भी कुछ ऐसी ही है.
आस्था ने एक-दो नहीं, बल्कि 14 प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता का सामना किया. इसके बावजूद उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी. आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई. बिहार लोक सेवा आयोग यानी BPSC की परीक्षा में उन्होंने 23वीं रैंक हासिल की और प्रशासनिक सेवा अधिकारी यानी SDM बन गईं. अब वे बिपार्ड में ट्रेनिंग ले रही हैं.
सातवीं कक्षा में छोड़ना पड़ा घर
आस्था मूल रूप से मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र की रहने वाली हैं. उनके पिता बिजनेसमैन हैं. शुरुआती जीवन में पढ़ाई के लिए कई चुनौतियां थीं.
पलेरा में उच्च शिक्षा के सीमित संसाधनों को देखते हुए उनकी मां ने सातवीं कक्षा में ही उन्हें पढ़ाई के लिए छतरपुर भेज दिया. यहां उन्होंने महर्षि मंदिर स्कूल में पढ़ाई की.
कम उम्र में परिवार से दूर रहना आसान नहीं था. हालांकि, इस अनुभव ने आस्था को कम उम्र में ही आत्मनिर्भर और मजबूत बना दिया. उन्होंने सीबीएसई बोर्ड से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की.
DU के रामजस कॉलेज से की पढ़ाई
स्कूली शिक्षा के बाद आस्था ने दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने इग्नू से पोस्ट ग्रेजुएशन किया.
कॉलेज के दिनों से ही उनके मन में सिविल सेवा में जाने का सपना था. इसी वजह से उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी.
21 परीक्षाएं दीं, 14 में मिली असफलता
आस्था का प्रतियोगी परीक्षाओं का सफर आसान नहीं रहा. उन्होंने UPSC, MPPSC, UPPSC और राजस्थान PSC समेत कुल 21 प्रतियोगी परीक्षाएं दीं. इनमें से 14 परीक्षाओं में उन्हें असफलता मिली. UPSC के तीन प्रयास भी सफल नहीं रहे. कई परीक्षाओं में वह बेहद कम अंकों के अंतर से पीछे रह गईं.
इतनी असफलताओं के बाद भी आस्था ने हार नहीं मानी. उन्होंने हर नतीजे से अपनी कमियां समझीं. फिर अपनी तैयारी की रणनीति में बदलाव किया.
सीमित किताबें और बेहतर टाइम मैनेजमेंट
आस्था का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में बहुत ज्यादा किताबें पढ़ना जरूरी नहीं है. सीमित संसाधनों को बार-बार पढ़ना और सही टाइम मैनेजमेंट ज्यादा अहम है.
BPSC की तैयारी के दौरान उन्होंने पढ़ाई को लेकर एक तय रणनीति अपनाई.
टारगेट बेस्ड पढ़ाई: आस्था हर दिन का लक्ष्य तय करती थीं. रात में ही अगले दिन का स्टडी प्लान तैयार कर लेती थीं.
PYQs पर फोकस: वह पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों को नियमित रूप से हल करती थीं. इससे उन्हें परीक्षा के पैटर्न को समझने में मदद मिली.
डिजिटल संसाधनों का इस्तेमाल: बस से सफर के दौरान या खाली समय में वह ऑनलाइन वीडियो और नोट्स के जरिए पढ़ाई करती थीं.
योग और मेडिटेशन: लगातार मिल रही असफलताओं के तनाव से निपटने के लिए उन्होंने योग और मेडिटेशन का सहारा लिया.
BPSC में मिली 23वीं रैंक
आस्था के लिए BPSC परीक्षा एक और मौका था. इस बार उन्होंने पूरी मेहनत के साथ अपनी तैयारी पर फोकस किया. वर्षों की मेहनत, धैर्य और लगातार खुद को बेहतर करने की कोशिश आखिरकार रंग लाई.
BPSC के रिजल्ट में आस्था ने 23वीं रैंक हासिल की. इसके साथ ही उनका SDM बनने का सपना पूरा हो गया.
छोटे कस्बे से SDM बनने तक का सफर
मध्य प्रदेश के एक छोटे से कस्बे से निकलकर बिहार में SDM बनने तक आस्था का सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार असफल हो रहे हैं.
उनकी कहानी बताती है कि असफलता मंजिल का अंत नहीं है. यह सिर्फ उन कमियों के बारे में बताती है, जिन पर काम करने की जरूरत है. आस्था ने 14 बार मिली हार को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. उन्होंने हर असफलता से सीखा और आखिरकार अपनी मंजिल हासिल कर ली.
