Indian Cricket Team Fielding Problems: भारतीय क्रिकेट टीम एक समय दुनिया की सबसे बेहतरीन फील्डिंग यूनिट में गिनी जाती थी. शानदार कैच, तेज रन आउट और मैदान पर ऊर्जा भारतीय टीम की पहचान बन चुके थे. लेकिन हाल के समय में यही ताकत टीम की बड़ी कमजोरी बनती नजर आ रही है. लगातार कैच छूटने और मैदान पर गलतियों के कारण भारत की फील्डिंग को लेकर सवाल उठने लगे हैं. दिलचस्प बात यह है कि टीम के कोचिंग सेटअप में फील्डिंग विशेषज्ञों की कमी नहीं रही है. भारत के साथ आर श्रीधर जैसे अनुभवी फील्डिंग कोच काम कर चुके हैं, जबकि टी दिलीप और रयान टेन डोशेट जैसे विशेषज्ञ भी टीम से जुड़े रहे हैं. इसके बावजूद मौजूदा दौर में भारतीय टीम की कैचिंग दक्षता में गिरावट देखने को मिली है.
आंकड़ों में दिखी भारत की फील्डिंग की कमजोरी
हालिया अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारत ने बड़ी संख्या में कैच छोड़े हैं. जून के बाद से पुरुष टीम के तीनों फॉर्मेट के मैचों में भारत ने 28 कैच गंवाए. इस दौरान टीम की कुल कैचिंग दक्षता करीब 76.8 प्रतिशत रही. अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट में भारत ने चार कैच छोड़े, वनडे सीरीज में एक कैच छूटा. आयरलैंड के खिलाफ दो टी20 मैचों में छह, इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में पांच और वनडे मुकाबलों में दो कैच भारतीय खिलाड़ियों से छूटे. जिम्बाब्वे दौरे पर स्थिति और खराब नजर आई, जहां तीन टी20 मैचों में भारत ने 10 कैच गंवाए. जिम्बाब्वे सीरीज में भारत की कैचिंग दक्षता (Catching Efficiency) सिर्फ 64.2 प्रतिशत रही. भारतीय टीम ने 18 कैच पकड़े और 10 छोड़े. इसके उलट जिम्बाब्वे ने 92.3 प्रतिशत की शानदार दक्षता के साथ 12 कैच पकड़े और केवल एक कैच छोड़ा.
आर श्रीधर ने फील्डिंग को लेकर क्या कहा
पूर्व भारतीय फील्डिंग कोच आर श्रीधर का मानना है कि
फील्डिंग अचानक बेहतर नहीं हो सकती. इसके लिए खिलाड़ियों की इच्छा और लगातार मेहनत जरूरी है. श्रीधर ने कहा कि कोच योजना बना सकता है, लेकिन असली जिम्मेदारी खिलाड़ियों की होती है. उनके मुताबिक, कम समय में किसी टीम को विश्वस्तरीय फील्डिंग यूनिट बनाना मुश्किल है. उन्होंने लगातार बदलती टीम को भी एक बड़ी चुनौती बताया. आईपीएल 2026 के बाद भारत ने 17 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 35 खिलाड़ियों को आजमाया है, जिससे खिलाड़ियों की भूमिकाएं तय करना मुश्किल हुआ है.
मूनी बोले- बल्लेबाजी जितना समय फील्डिंग को नहीं मिलता
दिल्ली कैपिटल्स के फील्डिंग कोच जॉन मूनी ने कहा कि
भारतीय खिलाड़ी बल्लेबाजी और गेंदबाजी पर काफी मेहनत करते हैं, लेकिन फील्डिंग को उतना समय नहीं देते. मूनी के अनुसार, एक बल्लेबाज नेट्स में घंटों अभ्यास करता है, जबकि कई बार फील्डिंग के लिए कुछ ही मिनट मिलते हैं. यही अंतर लंबे समय में कमजोरी बन जाता है. उन्होंने कहा कि अच्छी फील्डिंग के लिए सिर्फ फिटनेस नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती और हर गेंद के लिए तैयार रहने की आदत जरूरी है.
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मूनी ने बताया ऑस्ट्रेलिया की सफलता का राज
मूनी ने कहा कि
ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में खिलाड़ी बचपन से कई खेल खेलते हैं, जिससे उनकी प्रतिक्रिया क्षमता और एथलेटिक क्षमता बेहतर होती है. वहीं, दक्षिण एशिया में कई खिलाड़ी शुरुआत से सिर्फ क्रिकेट पर ध्यान देते हैं. उनके मुताबिक, अलग-अलग खेलों का अनुभव खिलाड़ियों को बेहतर मूवमेंट और फील्डिंग कौशल देता है.
श्रीलंका दौरे पर नई चुनौती
भारत के लिए श्रीलंका दौरा फील्डिंग सुधारने का बड़ा मौका होगा. स्पिन के अनुकूल परिस्थितियों में स्लिप और क्लोज-इन कैचिंग बेहद महत्वपूर्ण होगी. नए फील्डिंग कोच शुभदीप घोष के सामने टीम इंडिया की पुरानी फील्डिंग पहचान वापस लाने की चुनौती होगी. खिलाड़ियों की सोच और अभ्यास में बदलाव के बिना इस कमजोरी को दूर करना आसान नहीं होगा.
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