Gyaneshwari Yadav Periods During CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की 22 वर्षीय वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव ने महिलाओं की 53 किलोग्राम स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता. उन्होंने कुल 199 किलोग्राम वजन उठाया और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया. सबसे बड़ी बात यह रही कि उन्होंने यह ऐतिहासिक प्रदर्शन अपने पीरियड के पहले दिन किया, जब शरीर में काफी शारीरिक चुनौतियां और थकान होती है. अपनी गजब की मानसिक मजबूती और तकनीक से उन्होंने यह साबित कर दिया कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी कड़ी मेहनत से सफलता हासिल की जा सकती है.
पीरियड के बावजूद खेलने उतरीं ज्ञानेश्वरी यादव
मेडल जीतने के बाद ज्ञानेश्वरी ने अपनी इस चुनौती के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता वाले दिन उनके पीरियड का पहला दिन था और उन्हें खुद भी नहीं पता था कि शरीर किस तरह प्रतिक्रिया देगा.
उन्होंने कहा,
“आज मेरे पीरियड का पहला दिन था. मुझे नहीं पता था कि मेरा शरीर साथ देगा या नहीं.”
उनका यह बयान महिला खिलाड़ियों के सामने आने वाली उन शारीरिक चुनौतियों पर चर्चा का कारण बना, जिनके बारे में अक्सर खेल की दुनिया में कम बात होती है.
मासिक धर्म के दौरान शरीर में क्या बदलाव होते हैं?
पीरियड के पहले दिन महिलाओं को पेट दर्द, कमर दर्द, थकान, सिरदर्द और कमजोरी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसा शरीर में बनने वाले प्रोस्टाग्लैंडिन केमिकल और हॉर्मोन (एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) के कम होने के कारण होता है, जो गर्भाशय के सिकुड़ने में मदद करते हैं. हर महिला का अनुभव अलग होता है; कुछ खिलाड़ियों पर इसका असर नहीं पड़ता, तो कुछ को बहुत दर्द और कमजोरी महसूस होती है. विज्ञान के अनुसार, पीरियड का खेल प्रदर्शन पर हर बार एक जैसा असर नहीं पड़ता है. यही वजह है कि दुनिया भर के कई बड़े खेल संस्थान अब खिलाड़ियों के मासिक चक्र को समझकर उसी हिसाब से उनकी ट्रेनिंग की योजना बना रहे हैं.
हर प्रयास में दिखा आत्मविश्वास
ज्ञानेश्वरी ने स्नैच राउंड में शानदार शुरुआत की. उन्होंने 82 किग्रा, 85 किग्रा और 88 किग्रा के तीनों प्रयास सफलतापूर्वक पूरे किए और एक भी लिफ्ट मिस नहीं की. क्लीन एंड जर्क में उन्होंने पहले 103 किग्रा उठाया. इसके बाद 107 किग्रा का सफल प्रयास किया. आखिरी प्रयास में उन्होंने 111 किग्रा वजन उठाकर इतिहास रच दिया. यह लिफ्ट न सिर्फ उन्हें सिल्वर मेडल दिलाने के लिए काफी थी, बल्कि इससे उन्होंने क्लीन एंड जर्क और कुल भार दोनों में भारतीय रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए.
मीराबाई चानू से मिली प्रेरणा
ज्ञानेश्वरी ने अपनी सफलता में भारत की दिग्गज वेटलिफ्टर मीराबाई चानू की प्रेरणा को भी अहम बताया.
उन्होंने कहा कि
जब मीराबाई ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए पदक जीते, तो नई पीढ़ी के खिलाड़ियों में विश्वास पैदा हुआ कि वे भी दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के साथ मुकाबला कर सकते हैं.
ज्ञानेश्वरी ने कहा,
“जब मीराबाई दीदी ने 48 किग्रा वर्ग में भारत के लिए गोल्ड जीता, तो मुझे ऊर्जा मिल. मैंने सोचा कि अगर दीदी ऐसा कर सकती हैं तो मैं क्यों नहीं कर सकती?”
चुनौतियों को बनाया ताकत
ग्लासगो में लगातार दो दिनों में भारतीय महिला वेटलिफ्टिंग की दो अलग-अलग कहानियां सामने आईं. जहां मीराबाई चानू ने वजन प्रबंधन जैसी कठिन चुनौती के बारे में बात की, वहीं ज्ञानेश्वरी ने मासिक धर्म के दौरान प्रतिस्पर्धा करने के अनुभव को साझा किया. दोनों खिलाड़ियों ने अपनी चुनौतियों को कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी यात्रा का हिस्सा बताया. ज्ञानेश्वरी ने कहा कि
उनके कोचों ने उन पर भरोसा किया और उन्हें 111 किग्रा उठाने का मौका दिया. उन्होंने बताया कि उन्होंने यह वजन ट्रेनिंग में उठाया था, लेकिन प्रतियोगिता मंच पर पहली बार ऐसा करने में सफल रहीं.
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