Bhuvneshwar Kumar: भुवनेश्वर को सता रहा इस बात का अफसोस, बोले- काश पहले ही कर लेता ये काम

भारतीय तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने अपने लंबे क्रिकेट करियर पर एक बड़ा अफसोस जाहिर किया है. उन्होंने बताया कि काश उन्होंने शुरुआत में ही पर्सनल ट्रेनर और फिजियो की मदद ली होती. इससे चोटों से बचा जा सकता था.

Bhuvneshwar Kumar: भारतीय तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने अपने लंबे क्रिकेट करियर को लेकर एक बड़ा पछतावा जाहिर किया है. उनका मानना है कि अगर उन्होंने करियर के शुरुआती दौर में ही पर्सनल ट्रेनर और फिजियो की मदद ली होती, तो शायद चोटों से जुड़ी कई परेशानियों से बचा जा सकता था. भुवनेश्वर ने यह बात जतीन सप्रू के साथ एक इंटरव्यू पॉडकास्ट में कही.

करियर पर पड़ता सकारात्मक असर

भुवनेश्वर कुमार ने कहा कि उनके करियर में एक चीज ऐसी है जिसे वह बदलना चाहते. उन्होंने माना कि शुरुआती दौर में पर्सनल ट्रेनर और फिजियो रखने से उनकी फिटनेस बेहतर रह सकती थी और इससे उनके करियर पर भी सकारात्मक असर पड़ता.

उन्होंने कहा कि अगर उन्हें समय में पीछे जाने का मौका मिलता, तो वह उन सीरीज और वर्षों को दोबारा जीना चाहते, जिन्हें चोट के कारण मिस करना पड़ा. भुवनेश्वर की इच्छा थी कि वह उसी दौर में उन्हीं खिलाड़ियों के साथ मैदान पर होते और अपना क्रिकेट जारी रखते.

क्या संन्यास को लेकर डरते हैं भुवनेश्वर?

भुवनेश्वर कुमार से जब उनके संन्यास को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि उस समय उनके मन में किस तरह की भावना होगी. उन्होंने हाल ही में संन्यास लेने वाले कर्ण शर्मा का उदाहरण दिया.

भुवनेश्वर ने बताया कि कर्ण शर्मा के आखिरी मैच को देखते हुए वह भावुक हो गए थे. उस दौरान उनके मन में यह विचार आया कि जब वह खुद क्रिकेट को अलविदा कहेंगे, तो उन्हें कैसा महसूस होगा.
उन्होंने कहा कि वह संन्यास से डरते नहीं हैं, लेकिन क्रिकेट को छोड़ना निश्चित तौर पर भावुक पल होगा. बचपन से जिस खेल को पूरी जिंदगी जिया हो, उसे एक दिन छोड़ना आसान नहीं होगा. भुवनेश्वर ने माना कि उस समय भावनाएं जरूर हावी होंगी, लेकिन अभी वह यह नहीं कह सकते कि उन्हें वास्तव में कैसा महसूस होगा.

ये भी पढ़ें: Tilak Verma: तिलक वर्मा को कौन सा फॉर्मेट है सबसे ज्यादा पसंद? जवाब सुनकर चौंक जाएंगे

वापसी को लेकर भुवी ने कही ये बात

टीम इंडिया में वापसी को लेकर भुवनेश्वर कुमार ने कहा कि वह फिलहाल किसी उम्मीद के साथ नहीं खेल रहे हैं और न ही खुद को साबित करने के लिए मैदान पर उतर रहे हैं. हालांकि, भारतीय टीम के लिए खेलने की उनकी इच्छा अभी भी है.

उन्होंने कहा कि अगर उन्हें टीम इंडिया से बुलावा मिलता है, तो वह तुरंत उपलब्ध रहेंगे.

ये भी पढ़ें: Richest Cricket League: आखिर कौन है दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट लीग? कितने नंबर पर है IPL, देखें टॉप-10 की लिस्ट

2018 से चोटों ने बढ़ाई परेशानी

भुवनेश्वर कुमार के करियर में 2018 से 2020 के बीच चोटों ने काफी असर डाला. 2018 में इंग्लैंड के खिलाफ भारत की विदेशी सीरीज में उनकी कमी टीम को खली थी. उस समय वह शानदार फॉर्म में थे, लेकिन पीठ के निचले हिस्से की समस्या के कारण उन्हें सीरीज से बाहर होना पड़ा.


भुवनेश्वर कुमार (फोटो—एक्स)

इसके बाद भी चोटों का सिलसिला जारी रहा. 2019 वनडे वर्ल्ड कप के दौरान और उसके बाद भी फिटनेस से जुड़ी परेशानियों ने उनके करियर को प्रभावित किया. लगातार चोटों के कारण वह लंबे समय तक भारतीय टीम से बाहर रहे और उनका इंटरनेशनल करियर भी समय से पहले खत्म हो गया.

RCB के साथ शानदार वापसी

हालांकि भुवनेश्वर ने बाद के वर्षों में अपनी फिटनेस और खेल पर काफी काम किया. इसका असर उनके प्रदर्शन में भी देखने को मिला. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए उन्होंने लगातार दो शानदार सीजन(2025-26) खेले और टीम को लगातार दो खिताब जीतने में अहम योगदान दिया. उनके प्रदर्शन के बाद एक बार फिर भारतीय टीम में उनकी वापसी की चर्चा तेज हुई है. 36 साल की उम्र में भी भुवनेश्वर की गेंदबाजी को लेकर क्रिकेट जगत में दिलचस्पी बनी हुई है.

ये भी पढ़ें: IND vs AFG T20I Series: 41 की उम्र में भी नहीं थम रहा इस अफगान खिलाड़ी का जलवा, अब भी बल्ले और गेंद से दिखा रहें दम

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By अभिजीत कुमार

अभिजीत कुमार युवा पत्रकार हैं, जिन्हें खेल और खासकर क्रिकेट की दुनिया को करीब से समझने और उसकी अनकही कहानियों को पाठकों तक पहुंचाने का जुनून है. उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), ढेंकानाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है. अपने पेशेवर सफर में उन्होंने रिपोर्टिंग, सब-एडिटिंग, पेज डिजाइन और डिजिटल कंटेंट के क्षेत्र में काम किया है.

वर्तमान में वह स्पोर्ट्स डेस्क पर कार्यरत हैं, जहां खेल जगत से जुड़ी खबरों के लेखन, संपादन और प्रस्तुतीकरण की जिम्मेदारी संभालते हैं. क्रिकेट उनके लिए सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि आंकड़ों, रोमांच, संघर्ष और भावनाओं से जुड़ी कहानियों की दुनिया है. खिलाड़ियों के प्रदर्शन से लेकर मैदान के पीछे की दिलचस्प घटनाओं तक, वह हर कहानी को सरल, सटीक और रोचक अंदाज में पेश करने की कोशिश करते हैं.

उनका मानना है कि एक अच्छी स्पोर्ट्स स्टोरी सिर्फ खबर नहीं बताती, बल्कि पाठक को उस पल का हिस्सा महसूस कराती है. यही सोच उनके लेखन की पहचान है और यही वजह है कि उनके आर्टिकल्स में खबर के साथ कहानी, संदर्भ और क्रिकेट का जुनून भी नजर आता है.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >