फुटबॉल में अक्सर सुर्खियां गोल करने वाले खिलाड़ी बटोरते हैं, लेकिन 2026 फीफा विश्व कप के पहले सेमीफाइनल में स्पेन ने साबित कर दिया कि खिताब जीतने की राह मजबूत रक्षा पंक्ति से होकर भी गुजरती है. फ्रांस को 2-0 से हराकर स्पेन ने 16 साल बाद विश्व कप फाइनल में जगह बना ली. इसके साथ ही उसने 96 साल पुराने विश्व कप इतिहास में ऐसा रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया, जो पहले कभी किसी टीम ने नहीं बनाया था.
96 साल में पहली बार छह क्लीन शीट
स्पेन एक ही विश्व कप में छह क्लीन शीट दर्ज करने वाली पहली टीम बन गई है. फ्रांस के खिलाफ मुकाबले में मिकेल ओयार्जाबेल और पेड्रो पोरो ने गोल किए, लेकिन जीत की असली कहानी स्पेन की रक्षा पंक्ति और गोलकीपर उनाई सिमोन ने लिखी. पूरे टूर्नामेंट में स्पेन ने सात मैचों में सिर्फ एक गोल खाया है, जबकि छह मुकाबलों में विरोधी टीम एक भी गोल नहीं कर सकी.
एम्बाप्पे और फ्रांस का हमला रहा बेअसर
किलियन एम्बाप्पे, माइकल ओलिसे और फ्रांस की स्टार आक्रमण पंक्ति से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन स्पेन की रणनीति के सामने उनका जादू नहीं चला. स्पेनिश खिलाड़ियों ने एम्बाप्पे को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया और फ्रांस पूरे मैच में लय हासिल नहीं कर सका. यही वजह रही कि टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाली फ्रांसीसी टीम फाइनल से एक कदम पहले बाहर हो गई.
पुराना रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ा
इससे पहले एक विश्व कप अभियान में सबसे ज्यादा पांच क्लीन शीट का रिकॉर्ड नीदरलैंड्स (1974), इटली (1990), ब्राजील (1994), फ्रांस (1998) और स्पेन (2010) के नाम था. स्पेन ने फ्रांस के खिलाफ क्लीन शीट हासिल कर यह रिकॉर्ड तोड़ दिया और नया इतिहास रच दिया.
44 साल बाद बना खास रिकॉर्ड
मौजूदा यूरो चैंपियन स्पेन अब विश्व कप फाइनल में पहुंचने वाली दूसरी टीम बन गई है, जिसने यूरो चैंपियन रहते हुए दो बार विश्व कप फाइनल में जगह बनाई हो. इससे पहले वेस्ट जर्मनी ने 1974 और 1982 में यह उपलब्धि हासिल की थी. स्पेन ने 2008 यूरो जीतने के बाद 2010 विश्व कप जीता था और अब यूरो 2024 चैंपियन रहते हुए 2026 विश्व कप फाइनल में पहुंच गई है.
अजेय अभियान जारी
स्पेन की यह जीत लगातार 37वां अजेय मैच भी रही. टीम ने इटली के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है. अब फाइनल में जीत दर्ज करते ही स्पेन लगातार 38 मैचों तक अजेय रहने वाली पहली राष्ट्रीय टीम बन सकती है.
40 साल बाद नॉकआउट में फ्रांस की सबसे बड़ी हार
फ्रांस के लिए यह हार कई मायनों में निराशाजनक रही. 1986 विश्व कप में वेस्ट जर्मनी से 0-2 की हार के बाद यह नॉकआउट चरण में उसकी सबसे बड़ी हार है. सेमीफाइनल जैसे बड़े मुकाबले में फ्रांस का आक्रमण पूरी तरह विफल रहा और टीम स्पेन की तकनीकी श्रेष्ठता के सामने संघर्ष करती नजर आई.
फ्रांसीसी मीडिया और दिग्गजों ने उठाए सवाल
हार के बाद फ्रांसीसी मीडिया ने टीम के प्रदर्शन की आलोचना की है. कई पूर्व खिलाड़ियों और विशेषज्ञों का मानना है कि स्पेन ने सामरिक और तकनीकी स्तर पर फ्रांस को पीछे छोड़ दिया. खुद एम्बाप्पे ने भी मैच के बाद स्वीकार किया कि टीम से कुछ रणनीतिक और तकनीकी गलतियां हुईं, जिनका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा.
क्या खत्म हो रहा है डेशॉम्प्स युग?
फ्रांस के मुख्य कोच डिडिएर डेशॉम्प्स का यह आखिरी विश्व कप माना जा रहा है. उनके नेतृत्व में फ्रांस ने 2018 में विश्व कप जीता, 2022 में फाइनल खेला और 2026 में सेमीफाइनल तक का सफर तय किया. हालांकि स्पेन के खिलाफ हार के बाद अब फ्रांसीसी फुटबॉल में उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
स्पेन अब 19 जुलाई को होने वाले फाइनल में उतरेगा, जहां उसकी नजर सिर्फ ट्रॉफी पर नहीं, बल्कि कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम करने पर भी होगी. फिलहाल दुनिया की सबसे संतुलित और मजबूत टीम के रूप में उभरी स्पेन ने यह साबित कर दिया है कि फुटबॉल में सिर्फ गोल नहीं, मजबूत डिफेंस भी इतिहास लिखता है.
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