नयी दिल्ली : साल 2019 भारतीय खेल के लिए काफी उत्तार चढ़ाव वाला रहा. खेल की दुनिया में कई ऐसे क्षण आये जिसके लिए यह साल हमेशा के लिए याद रखा जाएगा. भारतीय क्रिकेट की अगर बात करें तो भारतीय टीम ने जनवरी में न्यूजीलैंड को हराकर साल की शानदार शुरुआत की और वेस्टइंडीज को अपने ही घर में रौंदकर साल 2019 की विदाई की. आइये एक-एक कर साल 2019 में खेल की दुनिया में हुई बड़ी घटनों के बारे में जानें.
1. वर्ल्ड कप में टीम इंडिया की करारी हार के साथ विदाई
भारतीय क्रिकेट के लिए साल 2019 बेहद यादगार रहा. विराट कोहली की अगुआई में टीम इंडिया ने साल की शुरुआत जीत के साथ की. साल की शुरुआत में टीम इंडिया न्यूजीलैंड दौरे पर गयी, जहां टीम ने धाकड़ जीत दर्ज कर न्यूजीलैंड को उसी की धरती पर रौंदकर वनडे सीरीज पर 4-1 से कब्जा किया.लेकिन भारतीय क्रिकेट के लिए सबसे निराशा भरा क्षण उस समय रहा जब टीम इंडिया को वर्ल्ड कप में न्यूजीलैंड के हाथों सेमीफाइनल में करारी हार का सामना करना पड़ा था.
वर्ल्ड कप में टीम इंडिया को ट्रॉफी का प्रबल दावेदार माना जा रहा था. विराट कोहली की अगुआई में भारतीय टीम ने सेमीफाइनल तक शानदार प्रदर्शन भी किया और एक भी मैच नहीं हार. लेकिन रोमांचक मुकाबले में न्यूजीलैंड ने भारत को 18 रन से हराया.
हालांकि उसके बाद टीम इंडिया ने अपने प्रदर्शन में काफी सुधार की और कई बड़े सीरीज जीते. साल के आखिर में वेस्टइंडीज जैसी टीम को अपने घर पर वनडे और टी20 सीरीज में हराया और 2019 की विदाई की.
2. सौरव गांगुली बने बीसीसीआई के अध्यक्ष
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली इस साल काफी चर्चा में रहे. ‘बंगाल टाइगर’ को बीसीसीआई का अध्यक्ष बनाया गया. सबसे बड़ी बात रही कि इस पद के चुनाव में गांगुली को सर्वसम्मति से चुन लिया गया. बीसीसीआई अध्यक्ष चुने जाने के बाद उच्चतम न्यायालय से नियुक्त सीओए का कार्यकाल समाप्त हो गया. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस आर एम लोढ़ा की सिफारिशों के आधार पर बीसीसीआई के संचालन के लिए 2017 में प्रशासकों की समिति यानी कमिटी ऑफ ऐडमिनिस्ट्रेटर्स (CoA) का गठन किया था.गांगुली ने अध्यक्ष पद संभलते ही कई बड़े काम किये. सबसे पहले तो उन्होंने भारत में पहली बार डे-नाइट टेस्ट मैच कराया, जो उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है.
3. भारत में पहला डे-नाइट टेस्ट
भारतीय जमीन पर पहला डे-नाइट टेस्ट 22 नवंबर 2019 को भारत और बांग्लादेश के बीच कोलकाता में खेला गया. इसके साथ ही डे-नाइट टेस्ट खेलने वाले देशों में भारत भी शामिल हो गया. इससे पहले 11 डे-नाइट टेस्ट मैच खेले गये थे. पहला डे-नाइट खेलने वाला देश ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड है, जिसमें ऑस्ट्रेलियाई टीम को शानदार जीत मिली थी.भारत में हुए पहले डे-नाइट टेस्ट का श्रेय बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली को जाता है. उन्होंने इसके लिए भारतीय टीम और बांग्लादेशी टीम को मनाया और खेलने के लिए राजी किया.
4. भारतीय मुक्केबाजों के शानदार प्रदर्शन के नाम रहा साल 2019
भारतीय मुक्केबाजी के लिए रिंग में यह साल सफलता यें हासिल करने वाला रहा जिसमें अमित पंघाल ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया. इसके साथ ही डोपिंग मामले में मुक्केबाजों का नाम आने से एक बार फिर शर्मशार होना पड़ा तो वहीं ओलंपिक क्वालीफिकेशन के लिए टीम चयन भी विवादों में रहा. सकारात्मक पहलुओं की बात करें तो 23 साल के पंघाल पुरुष विश्व चैम्पियनशिप में रजत पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने जबकि छह बार की विश्व चैम्पियन मैरी कॉम भी लय में रही.
यूरोप के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित स्ट्रैंद्जा मेमोरियल में पंघाल ने 49 KG भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता. पूर्व जूनियर विश्व चैम्पियन निकहत जरीन और मीना कुमारी भी इस टूर्नामेंट में शीर्ष पर रही. निकहत के ओलंपिक क्वालीफिकेशन के लिए मैरी कॉम से ट्रायल करने की मांग सुर्खियों में रही.
हालांकि छह बार की विश्व चैम्पियन एम सी मैरी कॉम (51 किग्रा) ने 28 दिसंबर को हुए ट्रायल मुकाबले में निकहत जरीन को 9-1 से हराकर चीन में अगले साल होने वाले ओलंपिक क्वालीफायर के लिये भारतीय टीम में जगह बनायी. मैरी कॉम को विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा.
5. दुती चंद और हिमा ने भारतीय एथलेटिक्स को दिलाई पहचान
भारतीय एथलेटिक्स के दो बड़े सितारे नीरज चोपड़ा और हिमा दास चोटों के कारण सुर्खियों से दूर रहे जिससे वैश्विक पदक के मामले में यह साल देश के एथलेटिक्स के लिये सूखा रहा जिसमें डोपिंग के अलावा उम्र में हेरफेर के विवाद जारी रहे.
निराशाओं के बीच हालांकि दुती चंद ने इतिहास रच दिया. वह 100 मीटर की स्पर्धा जीतकर वर्ल्ड यूनिवर्सिटी खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गयीं. दुती चंद को टाइम पत्रिका ने दुनिया के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची ‘टाइम 100 नेक्स्ट’ में शामिल किया.
2019 की बड़ी उपलब्धि रहा कि भारत ने मिश्रित चार गुणा 400 मीटर रिले और पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा (अविनाश साबले) में 2020 ओलंपिक खेलों में स्थान पक्का किया.भारत की नयी उड़न परी हिमा दास ने साल 2019 में इतिहास रचा और 400 मीटर की रेस में 52.09 सेकेंड का समय निकालते हुए गोल्ड मेडल जीता. हिमा ने चेकगणराज्य में नोवे मेस्टो नाड मेटुजी ग्रां प्री में महिलाओं की 400 मीटर स्पर्धा में पहला पायदान हासिल किया. इसके साथ ही हिमा ने एक महीने के भीतर ही पांचवां गोल्ड मेडल जीत लिया.
6. भारतीय तीरंदाजी में हावी रहा निलंबन और गुटबाजी
भारतीय तीरंदाजों के कुछ प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन पर वर्ष 2019 में राष्ट्रीय महासंघ का निलंबन और गुटबाजी हावी रही और अब जबकि तोक्यो ओलंपिक में कुछ महीनों का समय बचा है तब भी हालात सुधरने के बजाय बिगड़ते जा रहे हैं.
भारतीय तीरंदाजी को अगस्त में करारा झटका लगा जब विश्व तीरंदाजी ने भारतीय तीरंदाजी संघ (एएआई) को निलंबित कर दिया था. विश्व संस्था ने यह फैसला दो गुटों द्वारा दिल्ली और चंडीगढ़ में समानांतर चुनाव कराने के कारण लिया क्योंकि यह उसके दिशानिर्देशों के खिलाफ है. इस निलंबन के कारण बैकाक एशियाई चैंपियनशिप में एक स्वर्ण, दो रजत और चार कांस्य पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन करने वाले तीरंदाजों पर किसी का ध्यान नहीं गया और उन्हें विश्व तीरंदाजी के ध्वज तले तटस्थ तीरंदाज के रूप में भाग लेने पर मजबूर होना पड़ा.
हालांकि झारखंड की दीपिका कुमारी ने तोक्यो ओलंपिक के लिये कोटा हासिल कर लिया है. इसके अलावा रियो ओलंपिक में जगह बनाने से चूकने वाली भारतीय पुरुष टीम ने डेन बोस्क विश्व चैंपियनशिप से तोक्यो ओलंपिक में अपना स्थान पक्का किया. इस टीम में तरुणदीप राय, अतनु दास और प्रवीण जाधव शामिल हैं.
7. निशानेबाजी के लिए शानदार रहा साल 2019
भारतीय निशानेबाजों ने वर्ष 2019 में लगातार अच्छा प्रदर्शन करके अपना दबदबा बनाया है. जिसके चलते तोक्यो ओलंपिक में इस खेल से अधिक से अधिक पदक बटोरेने की उम्मीद बंध गयी है.
भारत के इस प्रदर्शन में युवा निशानेबाजों का अहम योगदान रहा. साल 2019 में भारत ने राइफल-पिस्टल विश्व कप और फाइनल्स में कुल मिलाकर 21 स्वर्ण, छह रजत और तीन कांस्य पदक जीते. भारत निशानेबाजी में अभी तक 15 ओलंपिक कोटा हासिल कर चुका है जो कि रिकार्ड है और जिससे देश की इस खेल में प्रगति का पता चलता है.
8. युवराज सिंह ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास
भारतीय क्रिकेट के स्टार क्रिकेटर और 2011 विश्वकप विजेता टीम के मैन ऑफ दि सीरीज युवराज सिंह ने साल 2019 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया.संन्यास की घोषणा करते हुए युवराज सिंह काफी भावुक थे. उन्होंने कहा, 25 साल 22 यार्ड के बीच और लगभग 17 साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बिताने के बाद मैंने संन्यास का फैसला लिया है. इस खेल ने मुझे सिखाया कि कैसे लड़ते हैं, कैसे गिरते हैं, कैसे धूल से उठते हैं और फिर खड़े होते हैं. मैं आज अपने पुराने दिनों को याद कर रहा हूं, जब मैंने देश के लिए खेला. जिसमें 2011 का विश्वकप जीतना सबसे यादगार पल था.
युवी ने कैंसर से लड़कर टीम इंडिया में वापसी की और वर्ल्ड कप भी दिलाया. युवी ने अपने कैरियर में 40 टेस्ट 304 वनडे और 58 टी-20 खेले. टेस्ट में युवराज ने 1,900, वनडे में 8,701 और टी-20 में 1,177 रन बनाया है. युवराज सिंह ने वनडे में 14 शतक और टेस्ट में तीन शतक बनाये.
9. भारतीय हॉकी में उम्मीद की नयी किरण जगा गया वर्ष 2019
नयी दिल्ली : भारतीय हॉकी के लिए अगर 2018 मौके चूकने के कारण निराशा से जुड़ा रहा तो वर्ष 2019 इस खेल में उम्मीद की नयी किरण लेकर आया जिसमें पुरुष और महिला दोनों टीमों ने अगले साल तोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिये क्वालीफाई किया.भारतीय टीमों ने 2019 में अधिकतर मौकों का पूरा फायदा उठाया और इनमें से सबसे बड़ा था तोक्यो ओलंपिक के लिये अपना टिकट पक्का करना. भारतीयों टीमों ने हालांकि वर्ष 2019 में अधिकतर द्विपक्षीय शृंखलाओं और अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (एफआईएच) की एक प्रतियोगिता में हिस्सा लिया.
इस बीच अप्रैल में ग्राहम रीड ने भारतीय सीनियर पुरुष टीम का जिम्मा संभाला और जूनियर टीम के कुछ खिलाड़ियों ने सीनियर टीम में जगह बनायी.
10. पीवी सिंधु ने विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप में स्वर्ण जीत रचा इतिहास
ओलंपिक रजत पदक विजेता पीवी सिंधु ने अगस्त में बीडब्ल्यूएफ बैडमिंटन विश्व चैम्पियनशिप-2019 के फाइनल में दुनिया की चौथे नंबर की खिलाड़ी जापान की नोजोमी ओकुहारा को हराकर चैम्पियनशिप में पहली बार स्वर्ण पदक जीता और ऐसा करने वाली वो पहली भारतीय बन गयीं.
