Max O'Dowd on ICC World Cup format: आईसीसी के बदले हुए वर्ल्ड कप फॉर्मेट को लेकर विवाद शुरू हो गया है. नीदरलैंड्स के बल्लेबाज मैक्स ओ’डाउड ने एसोसिएट देशों के लिए बनाई गई क्वालिफिकेशन प्रक्रिया पर नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि छोटे देशों को वर्ल्ड कप खेलने के लिए कई मुश्किल चरणों से गुजरना पड़ता है. इस लंबी प्रक्रिया के कारण उनके लिए बड़ी टीमों के साथ खेलने और अपनी जगह बनाने के मौके कम हो जाते हैं. ICC ने बुधवार को 2027 में दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और जिम्बाब्वे में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप के नए प्रारूप की घोषणा की. इस टूर्नामेंट में 14 टीमें हिस्सा लेंगी और प्रतियोगिता को तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा. आईसीसी का दावा है कि नए प्रारूप से हर मुकाबला ज्यादा महत्वपूर्ण होगा और शुरुआती दौर से ही टीमों पर बेहतर प्रदर्शन का दबाव रहेगा.
14 टीमों वाला होगा 2027 वनडे वर्ल्ड कप
नए फॉर्मेट के अनुसार, सभी 14 क्वालिफाइड टीमें तीन चरणों में टूर्नामेंट खेलेंगी. पहले चरण में 12वीं, 13वीं और 14वीं रैंक वाली टीमें आपस में राउंड रॉबिन ‘सुपर सीरीज’ खेलेंगी. इस चरण की शीर्ष टीम अगले दौर में पहुंचेगी. दूसरे चरण में कुल 12 टीमें दो ग्रुप में बांटी जाएंगी. दोनों ग्रुप से शीर्ष तीन-तीन टीमें और दोनों ग्रुप में सातवें स्थान पर रहने वाली सबसे बेहतर टीम सुपर-7 चरण में जगह बनाएगी. इसके बाद शीर्ष चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी. आईसीसी का उद्देश्य टूर्नामेंट को अधिक रोमांचक बनाना है, ताकि शुरुआती मैचों का भी महत्व बना रहे और प्रशंसकों को ज्यादा रोमांचक मुकाबले देखने को मिलें.
मैक्स ओ’डाउड ने उठाए सवाल
नीदरलैंड्स के क्रिकेटर मैक्स ओ’डाउड ने सोशल मीडिया पर आईसीसी (ICC) की विश्व कप क्वालीफिकेशन प्रक्रिया (चयन प्रक्रिया) पर नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि छोटी टीमों (एसोसिएट टीमों) के लिए वर्ल्ड कप तक पहुंचना बहुत ही कठिन बना दिया गया है. इन टीमों को वर्ल्ड कप में जगह बनाने के लिए कई सालों तक अलग-अलग टूर्नामेंट और क्वालीफायर मैच खेलने पड़ते हैं, जो काफी थका देने वाला और मुश्किल काम है. ओ’डाउड का मानना है कि इन उभरती हुई टीमों को बड़ी टीमों के खिलाफ ज्यादा मैच खेलने के मौके मिलने चाहिए, ताकि वे बेहतर प्रदर्शन कर सकें और खुद को साबित कर सकें.
अश्विन ने भी जताई चिंता
पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भी आईसीसी के फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी. उन्होंने माना कि नया फॉर्मेट प्रतियोगिता बढ़ाने के लिहाज से बेहतर हो सकता है, लेकिन क्रिकेट के विस्तार के लिए एसोसिएट देशों को ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच मिलने चाहिए. अश्विन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि नीदरलैंड्स, स्कॉटलैंड, नेपाल, अमेरिका और आयरलैंड जैसी टीमों को केवल क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट तक सीमित नहीं रखना चाहिए. उन्हें द्विपक्षीय सीरीज में भी खेलने के ज्यादा मौके मिलने चाहिए. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बड़ी टीमों की हर द्विपक्षीय सीरीज में तीसरी टीम के रूप में एसोसिएट देशों को शामिल किया जा सकता है, जिससे उन्हें लगातार उच्च स्तर का अनुभव मिलेगा.
ICC का दावा
आईसीसी ने बताया कि नए बदलावों का मकसद मुकाबलों को ज्यादा रोमांचक बनाना, मुकाबले का लेवल बढ़ाना और खिलाड़ियों व प्रशंसकों के अनुभव को बेहतर करना है. आईसीसी की वार्षिक बैठक में इन बदलावों को मंजूरी दी गई. बोर्ड में एसोसिएट देशों के प्रतिनिधि भी शामिल थे और मुख्य कार्यकारी समिति (CEC) की सिफारिशों के आधार पर वनडे व टी20 वर्ल्ड कप के प्रारूप में बदलाव किया गया.
एसोसिएट देशों के लिए बड़ी चुनौती
क्रिकेट को वैश्विक खेल बनाने की कोशिशों के बीच एसोसिएट देशों की भागीदारी लगातार चर्चा का विषय रही है. पिछले कुछ वर्षों में नीदरलैंड्स, आयरलैंड, अफगानिस्तान और अमेरिका जैसी टीमों ने बड़े मंचों पर प्रभाव छोड़ा है. हालांकि, आलोचकों का मानना है कि अगर इन टीमों को नियमित रूप से शीर्ष देशों के खिलाफ खेलने का मौका नहीं मिलेगा तो उनका विकास धीमा हो सकता है. ऐसे में आईसीसी के नए फॉर्मेट को लेकर बहस सिर्फ टूर्नामेंट की फॉर्मेट तक सीमित नहीं है, बल्कि क्रिकेट के भविष्य और उसके वैश्विक विस्तार से भी जुड़ी हुई है.
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