MS Dhoni Retirement : 15 अगस्त 2020... देश आजादी का जश्न मना रहा था. तिरंगा शान से लहरा रहा था और हर तरफ स्वतंत्रता दिवस की खुशियां थीं. लेकिन इसी शाम भारतीय क्रिकेट में एक ऐसा ऐलान हुआ, जिसने करोड़ों क्रिकेट फैंस को अचानक भावुक कर दिया. शाम के ठीक 7 बजकर 29 मिनट पर महेंद्र सिंह धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया. धोनी ने सोशल मीडिया पर अपने करियर के खास पलों का एक वीडियो शेयर किया. बैकग्राउंड में फिल्म कभी-कभी का गीत बज रहा था और कैप्शन में उन्होंने लिखा था- 'आप सभी के प्यार और समर्थन के लिए बहुत धन्यवाद. आज 1929 बजे के बाद से मुझे रिटायर समझा जाए.' बस कुछ शब्द... लेकिन भारतीय क्रिकेट के एक शानदार अध्याय का अंत हो गया.
15 अगस्त ही क्यों चुना?
धोनी के संन्यास का दिन जितना चौंकाने वाला था, उससे ज्यादा चर्चा उनके संन्यास के समय की हुई. आखिर 15 अगस्त और शाम 7:29 बजे ही क्यों? धोनी ने खुद कभी आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया कि उन्होंने 15 अगस्त को ही संन्यास के लिए क्यों चुना. हालांकि, उनके सेना प्रेम को देखते हुए इस तारीख को लेकर एक मजबूत धारणा सामने आती है. धोनी को भारतीय सेना से बेहद लगाव रहा है. साल 2011 में उन्हें इंडियन टेरिटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद रैंक दी गई थी. साल 2015 में उन्होंने पैराट्रूपर की ट्रेनिंग पूरी की. 2019 में जम्मू-कश्मीर में वह 106 टेरिटोरियल आर्मी बटालियन (पैरा) के साथ भी रहे. यही वजह है कि धोनी के लिए 15 अगस्त सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि देश और सेना से जुड़ी भावना भी थी. उनके संन्यास के ऐलान में इस्तेमाल किया गया '1929 hrs' भी सेना में समय लिखने के तरीके जैसा था.
7:29 का राज क्या था?
धोनी के संन्यास के समय 19:29 को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हुई. इसकी एक अहम कड़ी 2019 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल से जुड़ी थी. 9 जुलाई 2019 को भारत और न्यूजीलैंड के बीच सेमीफाइनल खेला गया था. बारिश से प्रभावित इस मुकाबले में भारत लक्ष्य का पीछा करते हुए मुश्किल में था. धोनी ने आखिर तक उम्मीद बनाए रखी, लेकिन मार्टिन गप्टिल के शानदार थ्रो पर रन आउट हो गए. धोनी के आउट होते ही भारतीय फैंस की उम्मीदें टूट गईं. कुछ ही देर बाद युजवेंद्र चहल के आउट होने के साथ भारत का वर्ल्ड कप सफर खत्म हो गया. भारत के समय के मुताबिक टीम इंडिया के विश्व कप से बाहर होने का समय करीब शाम 7:29 बजे बताया गया. यही वह आखिरी मौका था, जब धोनी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बल्लेबाजी करते हुए मैदान से बाहर गए थे. फैंस ने इसे उनके अंतरराष्ट्रीय करियर के आखिरी अध्याय से जोड़कर देखा.
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एक और वजह, जो सामने आई
धोनी के संन्यास के समय भारत के पूर्व महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने भी इस फैसले पर अपनी राय रखी थी. उनका मानना था कि टी20 वर्ल्ड कप के टलने के बाद धोनी को शायद यह एहसास हो गया था कि अब भारतीय क्रिकेट को युवाओं की ओर आगे बढ़ना चाहिए. धोनी लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर थे. उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 2019 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल था. कोरोना महामारी के कारण टी20 वर्ल्ड कप भी टल गया. ऐसे में धोनी के लिए वापसी की संभावनाएं कम होती चली गईं. आखिरकार उन्होंने बिना किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस या लंबे बयान के सोशल मीडिया के जरिए अपने फैसले का ऐलान कर दिया. वहीं सुरेश रैना ने भी 15 अगस्त पर ही संन्यास लेने के पीछे के फैसले के बारे में भी बताया था.
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धोनी ने सिर्फ क्रिकेट नहीं छोड़ा, एक युग को विराम दिया
धोनी ने 2004 में बांग्लादेश के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था. इसके बाद करीब 16 साल तक उन्होंने भारतीय क्रिकेट को कई यादगार पल दिए. उन्होंने भारत को 2007 टी20 वर्ल्ड कप, 2011 वनडे वर्ल्ड कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जिताई. वह दुनिया के उन चुनिंदा कप्तानों में रहे, जिन्होंने तीनों आईसीसी सीमित ओवरों की ट्रॉफियां जीतीं. माही ने भारत के लिए 90 टेस्ट, 350 वनडे और 98 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले. कप्तान के तौर पर भी उनके नाम भारत के लिए सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैचों में नेतृत्व करने का रिकॉर्ड रहा.
