Indian Women Cricket Team: पाकिस्तान के खिलाफ 7 विकेट की जीत के बाद भारतीय महिला टीम की चर्चा एक बार फिर उसकी स्पिन गेंदबाजी को लेकर हो रही है. एशिया कप में पाकिस्तान की पूरी टीम 55 रन पर सिमट गई और भारत ने 8.4 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया. श्री चरणी और प्रेमा रावत ने तीन-तीन विकेट लिए, जबकि दीप्ति शर्मा ने दो विकेट चटकाए.
लेकिन भारत की इस जीत को सिर्फ स्पिन गेंदबाजों की सफलता के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी. इस टीम की सबसे बड़ी ताकत अब शायद यह है कि उसके पास एक से ज्यादा ऐसे विकल्प हैं, जो मैच का रुख बदल सकते हैं. यही टीम की सबसे बड़ी खूबी है. जो उसे एशिया कप में बाकी टीमों से बेहतर बनाती है.
स्पिन में भारतीय महिला टीम के पास कई विकल्प
पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय स्पिनरों ने शानदार प्रदर्शन किया. श्री चरणी ने 3 विकेट लेकर पाकिस्तान की बल्लेबाजी की कमर तोड़ी. प्रेमा रावत ने भी तीन विकेट लिए, जबकि दीप्ति शर्मा ने दो बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा.
इस प्रदर्शन की खास बात यह है कि भारत किसी एक स्पिनर पर निर्भर नहीं है. अगर एक गेंदबाज के खिलाफ बल्लेबाज संभलकर खेलते हैं, तो दूसरे छोर से विकेट लेने वाला विकल्प मौजूद है. दीप्ति के पास अनुभव है. प्रेमा रावत और श्री चरणी जैसी युवा गेंदबाजों ने भी अब बड़े मंच पर अपनी उपयोगिता दिखानी शुरू कर दी है. पाकिस्तान के खिलाफ मैच इसका ताजा उदाहरण है.
बल्लेबाजी में भी सिर्फ स्मृति-शेफाली पर निर्भरता नहीं
भारत की ताकत गेंदबाजी तक ही सीमित नहीं है. टीम की बल्लेबाजी में भी कई विकल्प हैं. पाकिस्तान ने भारत को 56 रन का छोटा लक्ष्य दिया था, लेकिन लक्ष्य का पीछा करते हुए फातिमा सना ने तीन विकेट लेकर भारत को शुरुआती झटका जरूर दिया. इसके बावजूद भारत ने मैच को हाथ से निकलने नहीं दिया और 8.4 ओवर में जीत हासिल कर ली.
यही गहराई आने वाले मैचों में भारत के काम आ सकती है. अगर किसी मुकाबले में स्मृति मंधाना या शेफाली वर्मा जल्दी आउट हो जाती हैं, तो टीम के पास आगे हरमनप्रीत कौर, ऋचा घोष, दीप्ति शर्मा और दूसरे बल्लेबाजी विकल्प मौजूद हैं. यानी अब भारत की बल्लेबाजी सिर्फ दो-तीन बड़े नामों के प्रदर्शन पर टिकी हुई नहीं दिखती.
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शेफाली ने पूरे किए 3000 टी20 इंटरनेशनल रन
पाकिस्तान के खिलाफ जीत के दौरान शेफाली वर्मा ने भले ही 12 रन बनाए, लेकिन मैच उनके लिए खास रहा. उन्होंने पारी की पहली ही गेंद पर छक्का लगाया और इसी ओवर में महिला टी20I में 3000 रन पूरे किए. 22 साल और 220 दिन की उम्र में शेफाली इस मुकाम तक पहुंचने वाली सबसे युवा खिलाड़ी बनीं. वह स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर के बाद 3000 T20I रन बनाने वाली तीसरी भारतीय महिला खिलाड़ी भी हैं.
यह रिकॉर्ड सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है. यह बताता है कि भारतीय महिला क्रिकेट में नई पीढ़ी कितनी तेजी से आगे बढ़ रही है. एक तरफ स्मृति और हरमनप्रीत जैसी अनुभवी खिलाड़ी हैं, तो दूसरी तरफ शेफाली, ऋचा, प्रेमा और श्री चरणी जैसी खिलाड़ी अपनी जगह मजबूत कर रही हैं.
भारत के पास हर विभाग में कई विकल्प मौजूद
भारत के पास इस समय बल्लेबाजी और गेंदबाजी, दोनों में कई अच्छे विकल्प मौजूद हैं. टीम की ताकत अब सिर्फ उसकी स्पिन गेंदबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि तेज गेंदबाजी में भी भारतीय टीम के पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो किसी भी मुकाबले का रुख बदल सकते हैं.
बल्लेबाजी में भी स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा जैसे बड़े नामों के अलावा कई धाकड़ खिलाड़ी मौजूद हैं, जो मुश्किल स्थिति में पारी संभालने के साथ तेजी से रन भी बना सकती हैं. वहीं ऑलराउंडरों की बात करें तो यहां भी भारत के पास काफी मजबूत विकल्प हैं. यही वजह है कि भारतीय टीम किसी एक खिलाड़ी या एक विभाग पर निर्भर नहीं दिखती और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत बनती जा रही है.
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