Dhruv Jurel Story: श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में ध्रुव जुरेल ने शानदार शतक जड़कर एक बार फिर अपनी काबिलियत का लोहा मनवा दिया. लेकिन शतक पूरा करने के बाद उनका सेलिब्रेशन सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया. जुरेल ने बाइसेप्स फ्लेक्स करते हुए अपने हाथ पर बना ‘जय जवान, जय किसान’ का टैटू कैमरे के सामने दिखाया. इस खास अंदाज ने फैंस का ध्यान उनकी बल्लेबाजी से आगे उनकी जिंदगी की कहानी की ओर खींच दिया. आखिर कौन हैं ध्रुव जुरेल और इस मुकाम तक पहुंचने के पीछे कितने संघर्ष छिपे हैं?
शतक के बाद दिखाया ‘जय जवान, जय किसान’ टैटू
श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में शतक पूरा करने के बाद ध्रुव ने बाइसेप्स फ्लेक्स किया और अपने हाथ पर बना ‘जय जवान, जय किसान’ टैटू कैमरे के सामने दिखाया. उनका यह सेलिब्रेशन देखते ही देखते चर्चा में आ गया. फैंस के लिए यह सिर्फ शतक का जश्न नहीं था. यह उस परिवार के प्रति सम्मान था, जिसने उन्हें क्रिकेटर बनाने के लिए अपनी क्षमता से ज्यादा किया.
करगिल युद्ध लड़ चुके पिता का बेटा है ध्रुव जुरेल
ध्रुव जुरेल की कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर के भारतीय टीम तक पहुंचने की कहानी नहीं है. इसके पीछे एक सैनिक परिवार, मां की कुर्बानी और बेटे के सपने को पूरा करने का जुनून है. आगरा में जन्मे ध्रुव के पिता नेम सिंह जुरेल भारतीय सेना में हवलदार रहे हैं और 1999 के करगिल युद्ध में भी हिस्सा ले चुके हैं. पिता चाहते थे कि उनका बेटा भी सेना में जाए और एनडीए की परीक्षा पास कर देश की सेवा करे. लेकिन ध्रुव का दिल क्रिकेट में था. क्रिकेट के प्रति उनका जुनून इतना ज्यादा था कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद उन्होंने अपना सपना नहीं छोड़ा.
मां ने गिरवी रख दी सोने की चेन
ध्रुव जुरेल के संघर्ष की सबसे भावुक कहानी उनकी पहली क्रिकेट किट से जुड़ी है. जब उनके पास क्रिकेट खेलने के लिए जरूरी सामान खरीदने के पैसे नहीं थे, तब उनकी मां ने बेटे के सपने के लिए अपनी सोने की चेन गिरवी रख दी थी. यह सिर्फ एक क्रिकेट किट खरीदने की कहानी नहीं थी. यह उस परिवार के भरोसे की कहानी थी, जिसने ध्रुव के सपने को अपनी आर्थिक परेशानियों से बड़ा माना. इसके बाद ध्रुव ने भी परिवार के इस भरोसे को टूटने नहीं दिया. उन्होंने मैदान पर लगातार मेहनत की और धीरे-धीरे घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई.
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पिता चाहते थे सेना में जाएं, ध्रुव ने चुना क्रिकेट
ध्रुव के पिता चाहते थे कि उनका बेटा एनडीए में जाए और भारतीय सेना का हिस्सा बने. आखिर वह खुद भी सेना में रहकर देश की सेवा कर चुके थे. लेकिन ध्रुव की मंजिल क्रिकेट थी. दिलचस्प बात यह है कि सेना का प्रभाव आज भी उनके व्यक्तित्व में दिखाई देता है. वह कई मौकों पर बल्ले को बंदूक की तरह पकड़कर सैनिकों को सलामी देने वाले अंदाज में जश्न मनाते दिखाई दिए हैं. अब उनके हाथ पर बना ‘जय जवान, जय किसान’ टैटू भी उनकी सोच और परिवार से जुड़े रिश्ते की कहानी बयां करता है.
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इंग्लैंड के खिलाफ मिला भारत के लिए टेस्ट डेब्यू का मौका
ध्रुव जुरेल को 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया. राजकोट में खेले गए तीसरे टेस्ट में उन्हें केएस भरत की जगह प्लेइंग इलेवन में मौका मिला और उन्होंने भारत के लिए टेस्ट डेब्यू किया. डेब्यू मैच की पहली पारी में जुरेल ने 46 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली. इसके बाद रांची टेस्ट में उन्होंने पहली पारी में शानदार 90 रन बनाए और दूसरी पारी में नाबाद 39 रन बनाकर भारत को मुश्किल मुकाबले में जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई. हाल ही में श्रीलंका के खिलाफ खेले गए पहले टेस्ट में 167 रनों की पारी खेली थी.
