Seema Kaliramna: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आठवां दिन भारत के लिए शानदार उपलब्धि लेकर आया. पूरे दिन पदक का इंतजार करने के बाद देर रात भारतीय दल को दो बड़ी खुशियां मिलीं. वेटलिफ्टिंग में लवप्रीत सिंह के सिल्वर मेडल जीतने के बाद महिला डिस्कस थ्रो में सीमा कालीरमन ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर भारत का गौरव बढ़ाया. इस जीत के साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के कुल पदकों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है. वहीं एथलेटिक्स में यह भारत का आठवां पदक रहा.
डेब्यू कॉमनवेल्थ गेम्स में सीमा ने जीता पदक
हरियाणा की रहने वाली सीमा कालीरमन ने अपने पहले ही कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतकर खास उपलब्धि हासिल की. ग्लासगो में खेले गए महिला डिस्कस थ्रो फाइनल में सीमा ने 58.65 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया. इस स्पर्धा में भारत की एक और खिलाड़ी निधि रानी भी शामिल थीं. निधि ने 57.10 मीटर की दूरी तय की और चौथे स्थान पर रहीं. हालांकि वह मामूली अंतर से पदक से चूक गईं.
चार प्रयास हुए फाउल
सीमा के लिए फाइनल मुकाबला आसान नहीं रहा. कुल छह प्रयासों में उनके चार थ्रो फाउल रहे. शुरुआती दबाव के बावजूद उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में 57.32 मीटर की दूरी तय कर तीसरे स्थान पर जगह बनाई. इसके बाद तीसरे प्रयास में सीमा ने अपना प्रदर्शन और बेहतर किया और 58.65 मीटर का थ्रो किया. इसके बाद वह अपने प्रदर्शन में सुधार नहीं कर सकीं, लेकिन कोई अन्य खिलाड़ी भी उनके इस स्कोर को पार नहीं कर पाया. इसी के साथ सीमा ने ब्रॉन्ज मेडल पक्का कर लिया.
पति रविंदर बने ताकत
सीमा कालीरमन की इस सफलता के पीछे उनकी मेहनत और प्रतिभा के साथ-साथ उनके पति रविंदर का भी अहम योगदान है. रविंदर सिर्फ जीवनसाथी ही नहीं बल्कि सीमा के कोच की भूमिका भी निभा रहे हैं. हरियाणा के भिवानी से आने वाली सीमा और रविंदर की मुलाकात डिस्कस थ्रो के मैदान पर ही हुई थी. रविंदर खुद इस खेल में सक्रिय रहे थे और जूनियर व सब-जूनियर स्तर पर नेशनल चैंपियन भी रह चुके थे. हालांकि चोट के कारण उनका खुद का खेल करियर आगे नहीं बढ़ सका. इसके बाद जब सीमा की मुलाकात रविंदर से हुई तो खेल को लेकर दोनों की सोच एक जैसी थी. सीमा के पिता ने भी बेटी के करियर को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से दोनों के विवाह का प्रस्ताव रखा. शादी के बाद रविंदर ने सीमा की ट्रेनिंग, तकनीक और फिटनेस पर लगातार काम किया.
कोरोना काल में शुरू की स्पोर्ट्स में पीएचडी
सीमा की कहानी सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं है. रविंदर की सलाह पर ही उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान स्पोर्ट्स में पीएचडी की शुरुआत की. खेल और पढ़ाई दोनों को साथ लेकर चलना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने इसे पूरी मेहनत के साथ पूरा किया. एक समय चोट के कारण सीमा को खेल से दूर रहना पड़ा. इसी दौरान उन्होंने बेटे को जन्म दिया. लेकिन मां बनने के सिर्फ 11 महीने बाद ही उन्होंने दोबारा ट्रेनिंग शुरू कर दी. परिवार के समर्थन और अपनी मेहनत के दम पर सीमा ने वापसी की और लगातार अपने प्रदर्शन को बेहतर करती गईं.
भारत के लिए यादगार रहा आठवां दिन
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के आठवें दिन भारत को लंबे इंतजार के बाद दो पदक मिले. लवप्रीत सिंह के सिल्वर और सीमा कालीरमन के ब्रॉन्ज मेडल ने भारतीय दल का उत्साह बढ़ा दिया. खासतौर पर सीमा की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने अपने पहले ही कॉमनवेल्थ गेम्स में पोडियम पर जगह बनाई है.
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