अकील हुसैन ने कहा -पावरप्ले में सधी हुई गेंदबाजी करना भी टीम को जीत की ओर ले जाना है

CSK vs DC 2026 : वेस्टइंडीज के खिलाड़ी अकील हुसैन, चेन्नई के ऐसे गेंदबाज बनते जा रहे हैं, जो उसे मुश्किल घड़ी में नैया पार करा सकता है. मुंबई इंडियंस के खिलाफ भी अकील हुसैन ने 17 देकर चार विकेट लिया था और मंगलवार को दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ पावरप्ले में बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए केएल राहुल का विकेट लिया.

CSK vs DC 2026 : दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ चेन्नई सुपरकिंग्स की आठ विकेट की शानदार जीत में उनके गेंदबाजों का भी अहम योगदान है, जिन्होंने दिल्ली की टीम को महज 155 रन पर रोक दिया. गेंदबाजों में सबसे बेहतरीन गेंदबाजी उनके बायें हाथ के स्पिनर अकील हुसैन ने की. मैच के बाद अकील ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पावर प्ले में गेंदबाजी के लिए मानसिक रूप से बहुत मजबूत होने की जरूरत है. खासकर वैसे पिच पर जहां स्पिनर्स को कुछ खास फायदा नहीं मिल रहा हो.

अकील ने चार ओवर में सिर्फ 19 रन दिए

चेन्नई सुपर किंग्स के लिए अकील हुसैन ने बेहतरीन गेंदबाजी की. उन्होंने 4 ओवर में सिर्फ 19 रन देकर एक विकेट लिया. अकील ने अपने चार ओवर्स में से तीन पावर प्ले में डाले, लेकिन किसी भी बल्लेबाज को इस बात की इजाजत नहीं दी कि वे उनकी गेंदों के साथ कोई छेड़खानी करें.केएल राहुल का अहम विकेट भी अकील ने ही चटकाया. अकील ने मुंबई इंडियंस के खिलाफ भी 17 रन देकर चार विकेट चटकाए थे.

अकील ने चार में से तीन ओवर पावरप्ले में किए

अकील ने मैच के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पावर प्ले में गेंदबाजी के लिए आपको मानसिक रूप से मजबूत भी होना पड़ता है. इसके लिए कौशल की जरूरत होती है, खासकर उन पिचों पर जहां स्पिन को मदद नहीं मिलती. पावरप्ले में सिर्फ दो फील्डर (30 गज के दायरे से) बाहर होते हैं, ऐसे में आप ज्यादा लालच नहीं कर सकते या हर गेंद पर विकेट ढूंढने नहीं जा सकते. विकेट के पीछे भागने से ज्यादा जरूरी है योजना पर टिके रहना. मैंने इस मैच में वही किया.अकील ने कहा कि आप पावर प्ले में अगर किफायती गेंदबाजी कर लेते हैं, तो वह भी टीम के लिए बड़ी जीत जैसा है.उन्होंने राहुल के विकेट का श्रेय कप्तान रुतुराज गायकवाड़ को देते हुए कहा, गेंदबाजी छोर बदलने का फैसला मेरा नहीं था, यह कप्तान का था. लेकिन आपको हर चुनौती के लिए तैयार रहना होता है.

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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