World Cup 2023 : विश्वकप में टीम इंडिया की जर्सी पर दिखेगा तिरंगा, BCCI ने जारी किया -3kaDream hai apna वीडियो

इंपाॅसिबल नहीं ये सपना, 3 का ड्रीम है अपना’ स्लोगन के जरिए बीसीसीआई 2023 के विश्वकप को अपने नाम करने के लिए टीम इंडिया को प्रोत्साहित कर रहा है. इस वीडियो को जूता बनाने वाली कंपनी एडिडास ने बनाया है. इस पूरे वीडियो में भारत का क्रिकेट के प्रति प्यार साफ नजर आ रहा है.

क्रिकेट का महाकुंभ विश्वकप 2023 का आगाज पांच अक्टूबर से होने वाला है. विश्वकप को लेकर सभी टीम उत्साहित है, एशिया कप में अपनी बादशाहत कायम करने के बाद टीम इंडिया का भी जोश परवान पर है और टीम किसी भी तरह इस बार विश्वकप पर अपना कब्जा जमाना चाह रही है. टीम के इस उत्साह को पूरे देश का समर्थन मिलना तय है. भारत में क्रिकेट को लेकर लोगों का प्यार जगजाहिर है और उसी प्यार को परवान चढ़ाने और तीसरी बार विश्वकप को अपने नाम करने के लिए बीसीसीआई ने एक वीडियो बुधवार को अपने सोशल मीडिया एकाउंट एक्स पर पोस्ट किया है. इस वीडियो में एक पंचलाइन दिया गया है-‘इंपाॅसिबल नहीं ये सपना, 3 का ड्रीम है अपना.’


एडिडास ने बनाया है वीडियो

‘इंपाॅसिबल नहीं ये सपना, 3 का ड्रीम है अपना’ स्लोगन के जरिए बीसीसीआई 2023 के विश्वकप को अपने नाम करने के लिए टीम इंडिया को प्रोत्साहित कर रहा है. इस वीडियो को जूता बनाने वाली कंपनी एडिडास ने बनाया है. इस पूरे वीडियो में भारत का क्रिकेट के प्रति प्यार साफ नजर आ रहा है. इस वीडियो में बताया गया है कि 1983 में विश्वकप जीतना एक स्पार्क था, जबकि 2011 में विश्वकप जीतना ग्लोरी था और 2023 में विश्वकप जीतना ड्रीम है.

तीसरी बार विश्वकप अपने नाम करना चाहती है टीम इंडिया

इस वीडियो में दिखाया गया है कि किस प्रकार तीसरी बार विश्वकप को अपने नाम करने के लिए टीम इंडिया के खिलाड़ी बेताब हैं. वे इस ड्रीम को पूरा करने के लिए सो नहीं पा रहे हैं. पूरे देश में इस विश्वकप को लेकर उत्साह है. हर आयु वर्ग के लोग इस ड्रीम को पूरा करने के बेताब हैं. टीम इंडिया 2011 के बाद से आईसीसी ट्रॉफी जीतने के लिए इंतजार कर रही है. इस आकर्षक रैप वीडियो में भारत की विश्व कप जर्सी की एक झलक भी दी गई है. इस वीडियो में दिखाया गया है कि विश्वकप में भारतीय टीम जो जर्सी पहनने जा रही है उसमें कंधे पर तिरंगा का तीन रंग बना होगा. पहले वहां पर सफेट पट्टियां होती थीं.

टीम इंडिया की जर्सी पर तिरंगा

एशिया कप में भारत ने जो जर्सी पहनी थी उससे विश्वकप की जर्सी अलग है. इस वीडियो में कप्तान रोहित शर्मा, विराट कोहली, हार्दिक पांड्‌या और मोहम्मद सिराज जो जर्सी पहने नजर आ रहे हैंउसमें उनके कंधे पर नारंगी, सफेद और हरे रंग की धारियां बनी हुई हैं. इसके अलावा विश्वकप की जर्सी में जो बड़ा बदलाव दिखेगा वो है, जर्सी पर ड्रीम इलेवन लिखा हुआ नहीं होगा क्योंकि आईसीसी इसकी इजाजत नहीं देता है.

एशिया कप जीतकर भारत ने अपनी दावेदारी मजबूत की

भारतीय टीम इस बार के विश्वकप को जीतने वाली संभावित टीम में से एक मानी जा रही है. टीम की दावेदारी को एक्सपर्ट काफी महत्व भी दे रहे हैं. एशिया कप में पाकिस्तान और श्रीलंका जैसी टीम को आसानी से पटखनी देकर भारत ने अपनी दावेदारी और मजबूत कर ली है. चूंकि इस बार भारत विश्वकप की मेजबानी कर रहा है, इसलिए टीम को अपने ग्राउंड पर खेलने का मौका मिलेगा. भारत का पहला मुकाबला आॅस्ट्रेलिया के साथ खेला जाएगा, जो चेन्नई के चेपाॅक स्टेडियम में खेला जाएगा.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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