चेहरे पर तमाचे जैसा…, Yuvraj Singh के 6 छक्कों को याद कर आज भी सिहर जाते हैं स्टुअर्ट ब्रॉड
Yuvraj Singh: दुनियाभर के क्रिकेट फैंस की जेहन में 2007 वर्ल्ड कप की वह घटना आज भी ताजा होगी, जब युवराज सिंह ने एक ओवर में छह छक्के जड़ दिए थे. गेंदबाज थे इंग्लैंड के युवा स्टुअर्ट ब्रॉड. ब्रॉड अब भी उस घटना को याद करते हैं, जिसने उनका करियर बदल दिया. उस झटके ने ब्रॉड को एक शानदार गेंदबाज बनने के लिए प्रेरित किया.
Yuvraj Singh: 2007 टी20 वर्ल्ड कप के दौरान भारतीय स्टार युवराज सिंह द्वारा इंग्लैंड के तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड (Stuart Broad) के एक ही ओवर में छह छक्के जड़ना क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार पलों में से एक है. ब्रॉड ने हाल ही में खुलासा किया कि यह घटना उनके लिए एक करारा झटका थी और इसने उनके करियर को बेहतर दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके परिणामस्वरूप वे 604 विकेटों के साथ इंग्लैंड के दूसरे सबसे अधिक टेस्ट विकेट लेने वाले गेंदबाज के रूप में संन्यास ले सके. ब्रॉड ने मैथ्यू हेडन के ‘ऑल ओवर बार द क्रिकेट’ पॉडकास्ट पर बात करते हुए कहा, ‘उस समय तक मैंने सिर्फ सात या आठ वनडे मैच खेले थे, टेस्ट मैच नहीं खेला था. मेरे लंबे सुनहरे बाल थे और मैं सोच रहा था कि मेरी किस्मत चमक रही है और फिर अचानक मुझे करारा झटका लगा.’
युवराज के हमले के बाद ब्रॉड का प्रदर्शन सुधरा
ब्रॉड ने कहा कि युवराज द्वारा उन पर किया गया हमला उनके लिए एक तात्कालिक चेतावनी थी कि उन्हें सुधार करने की जरूरत है. ब्रॉड ने कहा, ‘मुझे लगता है कि खेल का यही चक्र चलता है, आप शुरुआत में बहुत अच्छा प्रदर्शन करते हैं और फिर 26-27 साल की उम्र तक आपको लगता है कि आपने सफलता हासिल कर ली है. फिर आप पूरी लगन से काम करना बंद कर देते हैं. आप थोड़ा सुस्त पड़ जाते हैं, आपकी टीम उतनी अच्छी नहीं रहती, शायद आपको टीम से निकाल भी दिया जाता है. फिर 31 साल की उम्र में जब आपको सब समझ आ जाता है, तब आप वापसी करते हैं और अगले पांच साल तक आप शानदार प्रदर्शन करते हैं.’ Stuart Broad still shudders today remembering Yuvraj Singh 6 sixes in one over
6 छक्के खाने के 4 साल बाद बेहतरीन गेंदबाज बन गए ब्रॉड
ब्रॉड ने खुलासा किया, ‘मेरे लिए वह करारा झटका 20-21 साल की उम्र में लगा, इसलिए मैंने पांच साल यह सोचने में बर्बाद नहीं किए कि मुझे बेहतर होना है, मुझे अपनी गेंद फेंकने का तरीका सीखना है. मैंने अपने खेल के इर्द-गिर्द वॉरियर मोड नामक एक ढांचा बनाया, जिसमें तैयारी से जुड़ी हर चीज को सही करने के लिए जोड़ा गया था.’ उन्होंने आगे कहा, ‘जब मैं वास्तव में 25-26 साल का हुआ, तब तक मैं एक बेहतरीन खिलाड़ी के रूप में उस मुकाम पर पहुंच चुका था जहां मैं पहुंचना चाहता था. मुझे पता था कि कब मेरी गेंदबाजी खराब होती है, कब मेरी बॉडी लैंग्वेज खराब होती है और मुझे इसे कैसे सुधारना है.’
इंग्लैंड के दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज
ब्रॉड ने सुझाव दिया कि अगर उन्हें डरबन में युवराज के खिलाफ मिली हार का सामना न करना पड़ा होता, तो शायद उनका वह शानदार करियर न होता जो उन्होंने आगे चलकर हासिल किया. उन्होंने कहा, ‘बेशक, मैं चाहता हूं कि ऐसा न हुआ होता, लेकिन फिर मैं पीछे मुड़कर सोचता हूं कि शायद अगर ऐसा न हुआ होता, तो मैं पांच साल तक यह सोचते हुए इधर-उधर भटकता रहता कि मैं बहुत अच्छा हूं, और मेरा वह करियर न होता जो मेरा रहा है.’ ब्रॉड टेस्ट क्रिकेट और सभी प्रारूपों में इंग्लैंड के सर्वकालिक दूसरे सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं, जिन्होंने 167 मैचों में 604 टेस्ट विकेट और 344 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 847 विकेट लिए हैं.
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