3-4 मैच खेल सकता था... इंग्लैंड दौरे पर इग्नोर किए जाने पर कुलदीप यादव ने तोड़ी चुप्पी, गौतम गंभीर पर कही ये बात

Kuldeep Yadav on not getting chance in England Test Series: इंग्लैंड दौरे पर कुलदीप यादव बिना एक मैच खेले बेंच पर बैठे रह गए. वहीं एशिया कप 2025 में उन्होंने अपनी गेंदबाजी से तहलका मचा दिया है. तो आखिर 40 दिन पहले उन्हें टीम में जगह क्यों नहीं मिली थी, इस पर उन्होंने भारत के एशिया कप में ओमान के खिलाफ आखिरी ग्रुप स्टेज मैच से पहले चुप्पी तोड़ी है.

Kuldeep Yadav on not getting chance in England Test Series: एशिया कप 2025 में कुलदीप यादव भारत के दो मैचों में लगातार दो बार प्लेयर ऑफ द मैच रहे. उनकी धारदार गेंदबाजी ने टीम इंडिया के सितारे बुलंद किए हैं. लेकिन कुलदीप यादव की भारतीय प्लेइंग इलेवन में वापसी इतनी आसान नहीं रही. चाइना मैन लेफ्ट-आर्म रिस्ट स्पिनर को इंग्लैंड टेस्ट सीरीज में पूरी तरह से बाहर बैठने का निराशाजनक अनुभव सहना पड़ा था. यहां उन्हें पांच मैचों में एक भी बार प्लेइंग XI में शामिल नहीं किया गया. हालांकि अब उन्होंने एशिया कप में दो मैचों में 7 विकेट लेकर भारतीय टीम में अपनी अहमियत को सभी के सामने फिर से साबित कर दिया है. कुलदीप ने इस गर्मी में इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट की पूरी सीरीज में बाहर बैठने की निराशा पर चुप्पी तोड़ी है.

ओमान के खिलाफ भारत के अंतिम ग्रुप मैच से पहले मीडिया से बात करते हुए, कुलदीप ने इंग्लैंड में अपनी नॉन-सेलेक्शन का कारण बताया. उन्होंने हेड कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) की स्पष्टता की सराहना की. कुलदीप ने बताया, “मैसेज साफ था. गौतम गंभीर और मेरे बीच स्पष्ट संवाद था. मुझे लगा कि मैं 3-4 मैच खेल सकता था. दुर्भाग्यवश, यह मुख्यतः बल्लेबाजी गहराई के कारण संभव नहीं हो पाया. लेकिन शुरू से ही संदेश साफ था. यह कौशल की कमी की वजह से नहीं, बल्कि सिर्फ इसलिए कि हमें आवश्यक बल्लेबाजी गहराई की जरूरत थी. परिस्थितियों ने भी भूमिका निभाई. मैंने अपना समय इंजॉय किया और बहुत कुछ सीखा. जब आप नहीं खेलते, तो देखने से बहुत कुछ सीखते हैं और बेहतर खिलाड़ी बनते हैं. दूसरों को दोष देना आसान है, लेकिन अपनी कमजोरियों को स्वीकार करना और उन पर काम करना मुश्किल होता है.” 

जडेजा और वाशिंगटन को मिला मौका

जून में बेकेनहम में जब भारत ने प्रैक्टिस मैच खेला, तब पिच सूखी और प्रॉमिसिंग नजर आ रही थी. कुलदीप ने खुद भी उस समय माना था कि यह “स्पिनरों के लिए अच्छा है.” लेकिन जैसे-जैसे सीरीज आगे बढ़ी और पिचें विविधता की मांग कर रही थीं और उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला. रवींद्र जडेजा और वाशिंगटन सुंदर को प्राथमिकता दी गई, जो बल्लेबाजी में अधिक योगदान दे सकते थे. स्पिनर ने यह भी स्वीकार किया कि मैच परिस्थितियों में गेंदबाजी नहीं करने के बाद एशिया कप में आना एक चुनौती थी. इस गैप को पाटने के लिए उन्होंने इंग्लैंड में अपने समय का उपयोग फिटनेस और वर्कलोड मैनेजमेंट पर ध्यान देने के लिए किया.

फिटनेस पर किया काम

उन्होंने आगे कहा, “चुनौतियां हमेशा होती हैं क्योंकि जब आप पहला मैच खेलते हैं, तो आपकी रिद्म बहुत महत्वपूर्ण होती है… लेकिन मेरे लिए यह खुद पर काम करने, फिटनेस सुधारने और अपनी गेंदबाजी में वॉल्यूम जोड़ने का बहुत अच्छा समय था… फिर, मैंने दलीप ट्रॉफी का मैच खेला, जहां मुझे विकेट नहीं मिला, लेकिन मैंने 35 ओवर गेंदबाजी की, जिसने मुझे अपना रिद्म सेट करने में मदद की,” 

एशिया कप में अहम होंगे कुलदीप

केवल दो मैचों में सात विकेट लेकर कुलदीप वर्तमान में टूर्नामेंट के दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं. उनके प्रदर्शन ने यह फिर साबित कर दिया है कि इंग्लैंड में नजरअंदाज किए जाने के बावजूद, वह लिमिटेड ओवर्स क्रिकेट में भारत के सबसे बड़े मैच-विनर खिलाड़ियों में से एक हैं. अब भारत ओमान के खिलाफ और फिर पाकिस्तान के खिलाफ सुपर 4 का मैच खेलेगा, तो उनसे फिर एक बार शानदार प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी. 

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