पूर्व कोच गैरी कर्स्टन ने धौनी को लेकर दिया बड़ा बयान, तो मुझे युद्ध में भी जाने में कोई परेशानी नहीं होगी

Former coach Gary Kirsten made a big statement about MS Dhoni privilege to work with one of the best leaders : भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच गैरी कर्स्टन ने पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी की तारीफ करते हुए सोमवार को कहा कि उन्होंने जिनके साथ भी काम किया उसमें धौनी ‘सर्वश्रेष्ठ कप्तानों में से एक' रहे हैं. कर्स्टन के कोच रहते हुए धौनी की कप्तानी में ही भारतीय टीम ने 2011 में विश्व कप जीता था.

नयी दिल्ली : भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच गैरी कर्स्टन ने पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी की तारीफ करते हुए सोमवार को कहा कि उन्होंने जिनके साथ भी काम किया उसमें धौनी ‘सर्वश्रेष्ठ कप्तानों में से एक’ रहे हैं. कर्स्टन के कोच रहते हुए धौनी की कप्तानी में ही भारतीय टीम ने 2011 में विश्व कप जीता था.

52 साल के कर्स्टन 2008 से 2011 तक भारतीय टीम के कोच थे. विकेटकीपर बल्लेबाज धौनी क्रिकेट की दुनिया के इकलौते ऐसे कप्तान रहे है जिन्होंने आईसीसी के सभी खिताब जीते हैं. उन्होंने शनिवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था. कर्स्टन ने भारतीय टीम के कार्यकाल के साथ शानदार यादें देने के लिए धौनी का शुक्रिया किया. दक्षिण अफ्रीका के इस पूर्व सलामी बल्लेबाज ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘ मुझे सबसे अच्छे कप्तानों में से एक के साथ काम करने का शानदार अनुभव है.

भारतीय क्रिकेट टीम के साथ कई शानदार यादें देने के लिए धन्यवाद एमएस (धौनी).” कर्स्टन के कोच रहते भारत 2011 में 28 साल बाद विश्व चैम्पियन बना था. टीम ने इससे पहले 2010 में एशिया कप का खिताब भी जीता था. कर्स्टन ने उस समय धौनी के साथ मजबूत संबंध बनाया था और सोमवार को उन्होंने अपने पहले के एक बयान को फिर से दोहराया जिसमें दोनों के एक-दूसरे के करीब होने का पता चलाता है.

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उन्होंने कहा, ‘‘ अगर मेरे साथ धौनी हो तो मुझे युद्ध में भी जाने में कोई परेशानी नहीं होगी.” धौनी ने शनिवार को इंस्टाग्राम पोस्ट में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की थी. वह हालांकि 19 सितंबर से शुरू हो रहे इंडियन प्रीमियर लीग में खेलेंगे.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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