Ashes Snicko Controversy: ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड मैच में  तकनीकी विवाद, जेमी स्मिथ का आउट बना मुद्दा

Ashes Snicko Controversy: एशेज सीरीज के तीसरे टेस्ट में DRS और स्निको तकनीक फिर विवादों में है. जेमी स्मिथ को तीसरे अंपायर के फैसले में आउट दिए जाने पर इंग्लैंड नाराज दिखा. इससे एक दिन पहले एलेक्स केरी को भी इसी तरह के फैसले का फायदा मिला था. लगातार दो दिनों के विवाद ने क्रिकेट में तकनीक की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Ashes Snicko Controversy: एशेज सीरीज (Ashes Series) के तीसरे टेस्ट में लगातार दूसरे दिन तकनीक को लेकर बड़ा विवाद सामने आया. डिसीजन रिव्यू सिस्टम (DRS) और स्निको (Snicko) तकनीक एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई. गुरुवार को खेले गए मैच के दूसरे दिन इंग्लैंड के बल्लेबाज जेमी स्मिथ (Jamie Smith) को तीसरे अंपायर के एक विवादित फैसले में आउट करार दिया गया. इस फैसले से इंग्लैंड खेमे में नाराजगी दिखी तो वहीं ऑस्ट्रेलिया भी पहले दिन के फैसलों को लेकर पहले ही असंतुष्ट था. लगातार दो दिनों में आए ऐसे फैसलों ने क्रिकेट में तकनीक की विश्वसनीयता पर बहस को और तेज कर दिया है.

जेमी स्मिथ का विवादित आउट कैसे हुआ

घटना उस समय की है जब जेमी स्मिथ पैट कमिंस (Pat Cummins) की गेंद पर पुल शॉट खेलने की कोशिश कर रहे थे लेकिन गेंद बल्ले से दूर निकल गई. ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने विकेट के पीछे कैच की अपील की. मैदानी अंपायर नितिन मेनन ने खुद कोई फैसला नहीं दिया और मामला सीधे तीसरे अंपायर क्रिस गैफनी के पास भेज दिया. खास बात यह रही कि इस दौरान न तो बल्लेबाज ने और न ही फील्डिंग टीम ने डीआरएस की मांग की. इसके बावजूद तीसरे अंपायर ने रिप्ले और तकनीक के आधार पर फैसला सुनाया.

स्निको तकनीक पर उठे गंभीर सवाल

रीप्ले में स्निको तकनीक पर एक हल्की सी आवाज दिखाई दी लेकिन वह आवाज गेंद के बल्ले से गुजरने के एक फ्रेम बाद आई. इसके बावजूद तीसरे अंपायर ने इसे बल्ले का किनारा मानते हुए एलेक्स केरी के कैच को सही ठहरा दिया और स्मिथ को आउट करार दिया. इंग्लैंड के खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को यह फैसला समझ नहीं आया. उनका मानना था कि जब आवाज और गेंद का संपर्क साफ तौर पर मेल नहीं खा रहा था तो बल्लेबाज को आउट नहीं देना चाहिए था.

पहले दिन एलेक्स केरी को मिला फायदा

यह विवाद इसलिए भी बड़ा हो गया क्योंकि एक दिन पहले इसी तरह के मामले में ऑस्ट्रेलिया के एलेक्स केरी को जीवनदान मिला था. इंग्लैंड ने केरी के खिलाफ कैच की अपील की थी और अंपायर ने उन्हें नॉट आउट दिया था. इंग्लैंड ने डीआरएस लिया लेकिन स्निको में आई आवाज गेंद के बल्ले से गुजरने के समय से मेल नहीं खा रही थी. इस आधार पर अंपायर का फैसला बरकरार रखा गया और केरी आउट होने से बच गए. बाद में केरी ने इसी पारी में शतक जड़ दिया जिससे इंग्लैंड की नाराजगी और बढ़ गई.

ऑस्ट्रेलिया भी तकनीक से नाराज

गुरुवार को जेमी स्मिथ इससे पहले भी एक फैसले में बच चुके थे जब 16 रन पर उनके दस्ताने और हेलमेट से गेंद टकराने के बाद स्लिप में कैच की अपील हुई थी. तीसरे अंपायर ने तकनीक देखने के बाद कहा कि गेंद दस्ताने से नहीं लगी. यह भी साफ नहीं था कि उस कैच में गेंद जमीन से टकराई थी या नहीं. इस फैसले से ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी नाराज दिखे. मिचेल स्टार्क की झुंझलाहट स्टंप माइक में साफ सुनाई दी. उन्होंने कहा कि स्निको तकनीक को हटाने की जरूरत है क्योंकि यह लगातार गलत फैसले दे रही है.

तकनीक पर भरोसा या दोबारा सोच

लगातार दो दिनों में अलग अलग टीमों के खिलाफ आए विवादित फैसलों ने यह साफ कर दिया है कि तकनीक पूरी तरह से त्रुटिहीन नहीं है. खिलाड़ी और दर्शक दोनों ही अब यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या ऐसे मामलों में मैदानी अंपायर की भूमिका को ज्यादा अहमियत दी जानी चाहिए. एशेज जैसे बड़े मुकाबले में ऐसे फैसले मैच की दिशा और माहौल दोनों बदल सकते हैं. आने वाले दिनों में क्रिकेट बोर्ड और आईसीसी के लिए यह सोचने का समय है कि तकनीक के इस्तेमाल को और बेहतर कैसे बनाया जाए ताकि खेल की निष्पक्षता बनी रहे.

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By Aditya Kumar Varshney

आदित्य वार्ष्णेय एक अनुभवी खेल पत्रकार हैं, जो वर्तमान में कंटेंट राइटर के रूप में प्रभात खबर के साथ जुड़े हुए हैं. वह पिछले 5 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और स्पोर्ट्स बीट में गहरी पकड़ रखते हैं. आप क्रिकेट, फुटबॉल हॉकी, टेनिस और चेस जैसे खेलों पर लिखना पसंद करते हैं. आप मैच रिपोर्ट, विश्लेषणात्मक लेख, फीचर स्टोरी और एक्सप्लेनर आधारित कंटेंट तैयार करते हैं. आपने प्रभात खबर से पहले भारत समाचार में असिस्टेंट प्रोड्यूसर (आउटपुट विभाग) के रूप में काम किया है, वहीं स्टार स्पोर्ट्स में असिस्टेंट प्रोड्यूसर (क्रिकेट, हिंदी फीड) के तौर पर भी काम कर चुके हैं. आपके पास ब्रॉडकास्ट और डिजिटल दोनों प्लेटफॉर्म का मजबूत अनुभव है.

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