महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में उन्होंने जिस मुद्दे की बात की है वो वाकई दिल छूनेवाली है. उन्होंने ‘सपनों’ के बारे में बात की है जो कभी भेदभाव नहीं करती. जो कभी इस बात का फर्क नहीं करती कि सपना देखनेवाला कोई लड़का है या लड़की. साथ ही उन्होंने खिलाडियों को होनेवाली कई परेशानियों की ओर भी ध्यान दिलाया है. उन्होंने वीडियो में कहा है,’ जब घर में बेटी पैदा होती है तो हम कहते है लक्ष्मी घर में आई है, लेकिन उस लक्ष्मी को लक्ष्मी की तरह संजोकर रखना हमारी जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा,’ भारत की बेटियां, जिन्होंने खुद को चैंपियन की तरह खुद स्थापित किया है जिसमें सिंधू (पीवी सिंधू), साइना (नेहवाल), सानिया (मिर्जा), मिताली (राज) जैसे नाम शामिल है और यह लिस्ट बढ़ती जा रही है.’
तेंदुलकर ने आगे कहा,’ जब सपने भेदभाव नहीं करते तो हम क्यों करते हैं? मैं उनके परिवारवालों, उनके परिवार के सदस्यों और उनके कोच और उनके दोस्तों की सराहना करता हूं, जिन्होंने उनकी मदद की, उन्हें प्रोत्साहित किया, जिसकी बदौलत आज वे यहां खड़ी हैं. मैं उन पेरेंट्स को एक संदेश देना चाहता हूं कि वो अपने बेटी और बेटों दोनों को बराबर प्रोत्साहित करें ताकि वे उन्हें गौरान्वित महसूस करवा सकें.’
उन्होंने आगे कहा,’ ओलंपिक और किसी प्रमुख इवेंट से पहले हमारी उम्मीदें बढ़ जाती है. मैंने महसूस किया है कि चीजों को अच्छे के लिए बदल दिया गया है और हमने तैयारी के लिए एक लंबा रास्ता तय किया है. मैंने महसूस किया है कि ये बेहद जरूरी है कि हम अपने एथलीट्स पर पूरा ध्यान दें ताकि वे अपना लक्ष्य निर्धारित कर उसे पा सकें.’
उन्होंने एक रेसलर के बारे बात करते हुए बताया कि, पिछले ओलंपिक से पहले हमारा एक रेसलर अमेरिका की यात्रा की थी. उन्होंने रेसलिंग के मॉडर्न तरीके सीखे. क्या ऐसी तकनीक भारत में हो सकती है और क्या डिजिटल इंडिया के माध्यम से इस ट्रेनिंग को हमारे बाकी कोच के साथ शेयर किया जा सकता है.’
सचिन तेंदुलकर ने बैडमिंटन स्टार पुल्लेला गोपीचंद के बारे में बात करते हुए कहा है,’ पुल्लेला गोपीचंद कहते हैं कि भारत में बैडमिंटन का टैलेंट मौजूद है लेकिन वे यहां के कोचिंग स्टैंडर्ड को लेकर चितिंत हैं.’ उन्होंने सफलता का मंत्र देते हुए कहा,’ दृढ़ता, तैयारी और अभ्यास हमें हमारे लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करता है.’
