पूजा के समय घंटी क्यों बजाई जाती है? जानें इसके पीछे छिपा रहस्य

हिंदू धर्म में पूजा के समय घंटी बजाने की परंपरा सदियों पुरानी है. मान्यता है कि इसकी ध्वनि से नकारात्मकता दूर होती है और मन एकाग्र होता है.

Puja Rule: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ, अनुष्ठान और आरती के दौरान घंटी बजाने की परंपरा सदियों पुरानी है. घर के पूजा स्थल से लेकर मंदिरों तक, घंटी की ध्वनि के बिना पूजा को अधूरा माना जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पूजा के समय घंटी क्यों बजाई जाती है?आइए जानते है इसके महत्व के बारे में विस्तार से.

धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घंटी की मधुर ध्वनि से देवी-देवताओं का आह्वान होता है और वे पूजा में विराजमान होते हैं. ऐसा माना जाता है कि घंटी बजाने से वातावरण में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है. मान्यता यह भी है कि घंटी की गूंज 'ॐ' की ध्वनि के समान होती है. 'ॐ' को ब्रह्मांड का मूल नाद माना गया है, इसलिए घंटी की ध्वनि मन को शांत और एकाग्र करने में सहायक मानी जाती है.

वैज्ञानिक महत्व

कुछ मान्यताओं के अनुसार, घंटी बजने के बाद उसकी ध्वनि लगभग 7 सेकंड तक वातावरण में गूंजती रहती है. कहा जाता है कि यह कंपन शरीर के सात ऊर्जा केंद्रों (चक्रों) को सक्रिय करने में सहायक हो सकता है. हालांकि, इस दावे की वैज्ञानिक पुष्टि सीमित है. वहीं, ध्वनि का मनोवैज्ञानिक प्रभाव अधिक स्पष्ट माना जाता है. घंटी की मधुर आवाज मन को शांत करने, ध्यान भटकने से रोकने और पूजा के दौरान एकाग्रता बढ़ाने में मदद करती है. इससे व्यक्ति वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित कर पाता है और मानसिक तनाव भी कम महसूस हो सकता है.

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Published by: Neha Kumari

प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.
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