Watch Video: बंगाल की बामा काली माता का नृत्य, माता का अद्भुत रूप देखकर मन को मिलेगी शांति

Watch Video: बामा काली माता नृत्य पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के शांतिपुर में काली पूजा की रात किया जाने वाला एक अनोखा नृत्य है. यह नृत्य मां काली के उग्र रूप में किए गए तांडव को दर्शाता है. इस दौरान भक्त माता काली की विशाल प्रतिमा को अपने कंधों पर उठाकर नृत्य करते हैं. इसकी इस अनोखी और खूबसूरत परंपरा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. आप भी देखिए यह वीडियो.

Watch Video: सोशल मीडिया पर इन दिनों बामा काली माता नृत्य का वीडियो खूब वायरल हो रहा है. वीडियो में नजर आ रहा है कि रात के समय माता काली की शोभायात्रा निकाली जा रही है. हजारों की संख्या में श्रद्धालु सड़कों पर खड़े होकर माता की इस अद्भुत यात्रा को देख रहे हैं. माता काली की ऐसी अनोखी यात्रा आपने शायद ही कभी देखी होगी.वीडियो में दिख रहा है कि भक्त माता चंडी की विशाल प्रतिमा को कंधों पर उठाए हुए हैं. चारों ओर ढोल और ढाक की धुन बज रही है. संगीत की लय पर भक्त माता की प्रतिमा के साथ नृत्य कर रहे हैं, जिसे बामा काली नाच या बामा काली नृत्य कहा जाता है.

यह दृश्य इतना दिव्य और अलौकिक है कि लोग मंत्रमुग्ध होकर केवल माता की ओर देख रहे हैं और उनके साथ संगीत की धुन पर नृत्य कर रहे हैं. इस वीडियो ने सच में श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक परंपरा के एक अनदेखे स्वरूप को बहुत ही खूबसूरती से लोगों के सामने प्रस्तुत किया है.इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर @deckle_edge नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है. दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के शांतिपुर इलाके का है.

बामा काली स्वरूप

बामा काली माता दुर्गा का उग्र और तांत्रिक स्वरूप है. ‘बामा’ का अर्थ होता है बायां भाग, और ‘काली’ का अर्थ होता है काला या समय. माता काली का यह बामा रूप उस घटना को दर्शाता है जब माता काली ने भगवान शिव पर अपना बायां पैर रख दिया था. इसलिए माता के इस रूप को बामा काली कहा गया है.

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लेखक के बारे में

Author: Neha Kumari

नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.

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