Som Pradosh Vrat 2026: सोम प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है. यह व्रत विवाह, संतान, सुख और समृद्धि चाहने वालों के लिए लाभकारी माना जाता है. सोमवार का दिन चंद्रमा से संबद्ध होने की वजह से ऐसी मान्यता है कि सोम प्रदोष व्रत मानसिक तनाव को कम करने और चंद्र दोष से राहत दिलाने में मददगार साबित होता है. इस बार चैत्र कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 16 मार्च की सुबह 9:40 बजे शुरू होगी और 17 मार्च की सुबह 9:23 बजे समाप्त हो जाएगी. इस दौरान प्रदोष काल पूजा मुहूर्त शाम 5:58 बजे से रात 8:22 बजे तक रहेगी. यहां जानते हैं शिव कृपा पाने के लिए कौन का अवसर महत्वपूर्ण रहेगा.
सोम प्रदोष व्रत क्यों है खास?
सोम प्रदोष व्रत का पावन संयोग 16 मार्च को बन रहा है. सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन होता है इसलिए प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ने की वजह से अधिक शुभ और फलदायी माना जाता है. सोम प्रदोष व्रत मन की शांति, कर्म शुद्धि और भाग्य सुधार का विशेष अवसर होता है.
16 मार्च सोम प्रदोष व्रत का आध्यात्मिक महत्व
- इस दिन शिव जी की पूजा करने से अहंकार कम होता है.
- यह पूजा धैर्य और सहनशक्ति बढ़ाती है.
- शिव की उपासना करने से व्यक्ति अंदर से मजबूत होता है.
प्रदोष काल में पूजा विधि
- इस दिन सुबह स्नान करके और स्वच्छ कपड़े पहनने के बाद शिवलिंग पर शुद्ध जल और दूध अर्पित करें.
- फिर आप शिवलिंग पर तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाएं
- इसके बाद आप दीपक जलाकर शांत भाव से बैठें.
मंत्र जाप
“ॐ नमः शिवाय”/“ॐ सोमेश्वराय नमः” (108 बार)
सोम प्रदोष व्रत के विशेष लाभ
- इस व्रत को करने से मानसिक तनाव और बेचैनी में कमी आती है.
- नींद और एकाग्रता में सुधार होता है.
- यह व्रत रिश्तों में मधुरता लाती है.
- करियर में सही फैसले लेने की भी शक्ति मिलती है.
- जीवन में हमेशा स्थिरता और संतुलन बना रहता है.
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