शादी में सिंदूरदान से पहले चार फेरे क्यों लिए जाते हैं? जानें धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

Vivah ke Niyam: शादी की रस्मों में फेरे और सिंदूरदान का क्रम केवल परंपरा नहीं, बल्कि गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक अर्थ समेटे होता है. जानिए धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

Vivah ke Niyam: हिन्दू विवाह में चार फेरे केवल एक रस्म नहीं, बल्कि जीवनभर के साथ और सात जन्मों के बंधन का प्रतीक माने जाते हैं. वैदिक परंपरा में हर फेरा एक विशेष वचन और जिम्मेदारी को दर्शाता है. यही कारण है कि सिंदूरदान से पहले इन फेरों के जरिए रिश्ते को आध्यात्मिक और सामाजिक मान्यता दी जाती है. इस पवित्र प्रक्रिया से पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति पूर्ण समर्पण का संकल्प लेते हैं. आइए जानते हैं पंडित जगमोहन तिवारी से कि शादी में सिंदूरदान से पहले सात फेरे क्यों लिए जाते हैं और विधि का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व क्या हैं-

“विवाह का गूढ़ अर्थ और संस्कारों में इसकी अहमियत”

“विवाह” शब्द की उत्पत्ति वि + वाह से हुई है, जिसका अर्थ है-विशेष रूप से जिम्मेदारियों का वहन करना. सामान्य बोलचाल में इसे “शादी” कहा जाता है, लेकिन “विवाह” का अर्थ इससे कहीं अधिक गहरा और व्यापक है. यह केवल दो व्यक्तियों का सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि दो आत्माओं, दो परिवारों और दो संस्कृतियों का पवित्र मिलन होता है.

सोलह संस्कारों में अत्यंत महत्वपूर्ण

विवाह को सोलह संस्कारों में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है. विवाह एक ऐसा संस्कार है जो व्यक्ति को केवल व्यक्तिगत जीवन से उठाकर सामाजिक, नैतिक और आध्यात्मिक जिम्मेदारियों से जोड़ता है. विवाह के माध्यम से मनुष्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष-इन चार पुरुषार्थों की पूर्ति की दिशा में अग्रसर होता है.

विवाह का वास्तविक अर्थ है-

विवाह का वास्तविक अर्थ है- एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ निभाना, कर्तव्यों का पालन करना और जीवन की हर परिस्थिति में संतुलन बनाए रखना. यही कारण है कि इसे केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि जीवनभर निभाए जाने वाला पवित्र संकल्प माना गया है.

शादी में सात नहीं चार फेरे का हैं महत्व

पंडित जगमोहन तिवारी ने बताया कि आज कल दुल्हा दुल्हन सिंदूरदान से पहले सात फेरे ले रहे हैं, जबकि यह गलत हैं. विवाह पद्धति में लिखा हुआ है कि सिंदूरदान से पहले दुल्हा और दुल्हन को सिर्फ चार फेरे लेना चाहिए, जिसमें दुल्हन को तीन फेरे लेते समय आगे रहना हैं. वहीं आखिरी फेरा दुल्हा को आगे होकर लेने का विधान बताया गया हैं. प्रत्येक फेरा लेने का महत्व होता है. जैसे पहला फेरा धर्म का और दूसरा फेरा काम का होता हैं. वहीं तीसरा फेरा अर्थ का और चौथा मोक्ष का होता हैं.

सप्तपदी का महत्व और सात फेरों का उद्देश्य

विवाह संस्कार में अग्नि को साक्षी मानकर वर-वधू सप्तपदी यानी सात बचन लेते हैं, जबकि सात बचन लड़की को लेने का विधान है. वहीं पांच बचन लड़का लेता है. लेकिन टीवी और फिल्मों को देखकर आज कल लोग सात फेरा भी लेने लगे हैं, जबकि यह गलत हैं. पंडित जगमोहन तिवारी ने बताया कि फिल्म और गाने सुनकर विवाह पद्धति के नियम और विधि ही लोग बदल दिए हैं. विवाह पद्धति के अनुसार प्रत्येक फेरा एक विशेष वचन से जुड़ा होता है, जिसमें जीवन के सभी पहलुओं को शामिल किया गया है.

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शादी के सात वचन

हिन्दू विवाह की परम्परा के अनुसार, इन सात फेरों के साथ सात वचन भी लिए जाते हैं. ये वचन केवल भावनात्मक नहीं होते, बल्कि सामाजिक, नैतिक और आध्यात्मिक दायित्वों का प्रतीक होते हैं. ये पति-पत्नी को एक-दूसरे का सम्मान करने और जीवन की हर परिस्थिति में साथ निभाने की प्रेरणा देते हैं.

Q.1:- शादी में सात फेरे ही क्यों लिए जाते हैं?

Ans:- वैदिक परंपरा में सात संख्या को पूर्णता, संतुलन और आध्यात्मिक समरसता का प्रतीक माना गया है. सात फेरों के जरिए दंपत्ति जीवन के सात महत्वपूर्ण पहलुओं में साथ निभाने का संकल्प लेते हैं.

Q.2:- क्या हर फेरे का अलग-अलग महत्व होता है?

Ans:- हां, प्रत्येक फेरे का अपना विशेष अर्थ और वचन होता है, जिनमें भोजन और पोषण, स्वास्थ्य, धन-समृद्धि, एकता, संतान, प्रेम और विश्वास जैसे जीवन के महत्वपूर्ण पक्ष शामिल होते हैं.

Q.3:- क्या चार फेरे लेने के बाद ही विवाह पूरा माना जाता है?

Ans:- जी हां, हिन्दू रीति-रिवाजों में सप्तपदी के बाद ही विवाह को पूर्ण माना जाता है और यहीं से पति-पत्नी के जीवनसाथी बनने का बंधन प्रारंभ होता है.

Q.4:- सप्तपदी का वास्तविक अर्थ क्या होता है?

Ans:- सप्तपदी का अर्थ है ‘सात कदम साथ चलना’. यह विवाह का सबसे महत्वपूर्ण संस्कार है, जिसमें वर-वधू अग्नि को साक्षी मानकर सात कदम चलते हुए सात वचन लेते हैं.

Q.5:- क्या चार फेरों के बिना विवाह मान्य होता है?

Ans:- पारंपरिक हिन्दू विवाह में चार फेरे अत्यंत आवश्यक माने जाते हैं, इसके बिना विवाह की धार्मिक मान्यता अधूरी मानी जाती है.

Q.6:- चार फेरों में अग्नि को साक्षी क्यों माना जाता है?

Ans:- अग्नि को शुद्धता और सत्य का प्रतीक माना जाता है, इसलिए विवाह में अग्नि को साक्षी बनाकर लिए गए वचन पवित्र और अटूट माने जाते हैं.

Q.7:- क्या आधुनिक समय में भी चार फेरों का महत्व बना हुआ है?

Ans:- हां, बदलते समय के बावजूद सात फेरों का महत्व आज भी उतना ही है, क्योंकि यह केवल परंपरा ही नहीं, बल्कि जीवनभर साथ निभाने का आध्यात्मिक और सामाजिक संकल्प भी है.

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लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

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