Sawan 2026: सावन मास का पवित्र महीना भगवान भोलेनाथ की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है. मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन व्रत रखने, विधि-विधान से महादेव की पूजा-अर्चना और अभिषेक करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं. वे अपने भक्तों को सुख-शांति, समृद्धि और आशीर्वाद प्रदान करते हैं. शास्त्रों के अनुसार, महादेव अत्यंत भोले हैं और सच्चे मन से अर्पित की गई हर वस्तु स्वीकार करते हैं. हालांकि, कुछ ऐसी वस्तुओं का भी उल्लेख मिलता है जिन्हें शिवलिंग पर अर्पित करना वर्जित माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि अनजाने में भी इन वस्तुओं को चढ़ाने से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता और भगवान शिव अप्रसन्न हो सकते हैं.
शिवलिंग पर भूलकर भी न चढ़ाएं ये 6 चीजें
1. तुलसी के पत्ते
पौराणिक कथा के अनुसार, माता तुलसी अपने पूर्वजन्म में वृंदा थीं. उनके पति राक्षस जलंधर का वध भगवान शिव ने किया था. इससे दुखी होकर वृंदा ने संकल्प लिया था कि उनकी पूजा में तुलसी का उपयोग नहीं किया जाएगा. यही कारण है कि शिव पूजा में तुलसी के पत्ते अर्पित नहीं किए जाते.
2. हल्दी
हल्दी का उपयोग मुख्य रूप से सौंदर्य प्रसाधन और महिलाओं के सौभाग्य से जुड़े अनुष्ठानों में किया जाता है, जबकि शिवलिंग पुरुष तत्व और वैराग्य का प्रतीक माना जाता है. इसलिए भगवान शिव को हल्दी अर्पित नहीं की जाती.
3. केतकी और केवड़ा के फूल
शिव पुराण के अनुसार, भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच श्रेष्ठता के विवाद के दौरान केतकी के फूल ने ब्रह्मा जी के असत्य का साथ दिया था. इससे क्रोधित होकर भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा में सदैव के लिए वर्जित कर दिया. इसी कारण केतकी और केवड़ा के फूल शिवलिंग पर अर्पित नहीं किए जाते.
4. नारियल का पानी
भगवान शिव को साबुत नारियल अर्पित किया जा सकता है, लेकिन नारियल के पानी से शिवलिंग का अभिषेक करना वर्जित माना गया है. मान्यता है कि शिवलिंग पर चढ़ाई गई वस्तुएं निर्माल्य हो जाती हैं, जबकि नारियल का पानी ग्रहण किया जाता है. इसी कारण इसे अभिषेक में उपयोग नहीं किया जाता.
5. शंख से जल चढ़ाना
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव ने दैत्य शंखचूड़ का वध किया था. शंख को उसी दैत्य की अस्थियों का प्रतीक माना जाता है. इसलिए शिव पूजा में न तो शंख बजाया जाता है और न ही शंख से जल अर्पित किया जाता है.
6. टूटे या खंडित बेलपत्र
भगवान शिव को हमेशा ताजे और अखंडित तीन पत्तियों वाले बेलपत्र ही अर्पित करने चाहिए. टूटे, सूखे या कीड़े लगे बेलपत्र चढ़ाना शुभ नहीं माना जाता.
महादेव को क्या अर्पित करना चाहिए?
- शुद्ध जल या गंगाजल (अभिषेक के लिए)
- ताजे और अखंडित तीन पत्तियों वाले बेलपत्र
- कच्चा गाय का दूध, दही और शहद
- धतूरा, आक (मदार) के फूल और भांग
- सफेद चंदन और पवित्र भस्म
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