Raksha Bandhan 2026 Astrology Panchang Calculation: रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने की परंपरा पौराणिक काल से चली आ रही है. पौराणिक काल में माता लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था. महाभारत काल में द्रौपदी ने श्रीकृष्ण को राखी बांधा था. इन्हीं पौराणिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक समय में भी रक्षाबंधन मनाने की परंपरा है.
रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने या बंधवाने के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि शास्त्रों में कहा गया है कि शुभ मुहूर्त में किए गए काम का परिणाम भी शुभ ही होता है. ऐसे में पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार समझते हैं कि क्या 28 अगस्त को सुबह के बाद भी राखी बांध सकते हैं.
क्या सुबह के बाद बांध सकते हैं राखी?
सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार, राखी बांधाने के या बंधवाने के लिए तिथि और मुहूर्त का विशेष ध्यान रखना चाहिए. मिथिला पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 8:39 से 28 अगस्त को सुबह 9:27 बजे तक रहेगी. ज्योतिषाचार्य रतन कुमार मिश्र ने ज्योषीय गणना और मान्यताओं के आधार पर बताया कि 28 अगस्त को सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक राखी बांधी या बंधवाई जा सकती है.
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पंचांग और ज्योतिषीय गणना क्या कहती है?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, रक्षाबंधन यानी 28 अगस्त, शुक्रवार को ग्रहों के राजा सूर्य और बुध देव सिंह राशि में संचरण करेंगे. ऐसे में सिंह राशि में इन दोनों ग्रहों के मिलने से बुधादित्य योग बनेगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए अच्छा माना गया है. इसके अलावा सिंह राशि में चंद्र और राहु की मौजूदगी से ग्रहण योग बनेगा.
वैसे तो ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण योग को शुभ कार्यों के लिए अच्छा नहीं माना जाता लेकिन, चूंकि रक्षाबंधन बंधन के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इस योग का प्रभाव पर्व पर नहीं पड़ेगा.
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राखी बांधने के लिए अन्य मुहूर्त
- अभिजित मुहूर्त- 11:56 से दोपहर 12:48 बजे तक
- विजय मुहूर्त- दोपहर 2:31 से 3:22 बजे तक
