Rakshabandhan 2025: रक्षाबंधन है भाई-बहन के प्यार और सुरक्षा का त्योहार

Rakshabandhan 2025: जीवन में अनिश्चितताएं और संकट आम बात हैं. रक्षाबंधन हमें यह याद दिलाता है कि सुरक्षा और रक्षा केवल शारीरिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और आध्यात्मिक भी है. भाई-बहन का यह त्योहार प्रेम और सुरक्षा के बंधन को मजबूत करता है, जो जीवन में आश्रय और शक्ति देता है.

Rakshabandhan 2025: यह जीवन हर कदम पर असुरक्षित है. पल भर में कोई विपत्ति आ सकती है, कब क्या हो जाए, कोई नहीं जानता. इसलिए रक्षा और सुरक्षा सभी के लिए आवश्यक है. हम हमेशा न केवल अपने और अपने प्रियजनों की, बल्कि समस्त जीवित और निर्जीव तत्वों की रक्षा में लगे रहते हैं. यदि अपनी बात करें तो हम दैहिक कष्टों से बचने के लिए संयम बरतते हैं और रोग लगने पर समय रहते उपचार भी करते हैं, लेकिन भौतिक और दैवीय आपदाओं पर हमारा नियंत्रण नहीं है. बिजली गिरने से मौत हो जाए, बाढ़ में डूब जाएं, गर्मी से परेशान हो जाएं या ठंड से ठिठुर जाएं, कुछ कहा नहीं जा सकता. बचना हमारी किस्मत, ईश्वर की कृपा, वरदान, आशीर्वाद और शुभकामनाओं का फल होता है.

रक्षाबंधन आज, जानें राखी बांधने का शुभ समय

रक्षाबंधन का त्योहार हर वर्ष साव बार पूर्णिमा तिथि 8 अगस्त को दोपहर 2 बजकर 12 मिनट से आरंभ होकर 9 अगस्त को सुबह 1 बजकर 24 मिनट तक जारी रहेगी.

बंधन: रोगों और अशुभताओं का नाश करने वाला पर्व

देवताओं की आराधना से प्राप्त कृपा-वरदान, बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद, साथ ही मित्रों और छोटे-छोटे लोगों से मिलने वाली शुभकामनाएं भी अत्यंत प्रभावशाली होती हैं. रक्षाबंधन का उद्देश्य भी यही है – ‘सर्व-रोगोपशमनं सर्वाशुभ-विनाशनम्’, अर्थात सभी रोगों का नाश और सभी अशुभताओं का दूर होना. वेद में कहा गया है – ‘पुं पुमांसं परिपातु विश्वतः’, जिसका अर्थ है कि मनुष्य मनुष्यों की हर प्रकार से रक्षा करें. यहां ‘पुरुष’ का मतलब केवल पुरुष लिंग से नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति का दूसरे अनेक व्यक्तियों की रक्षा में तत्पर रहना है.

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श्रावण पूर्णिमा: वेदप्राप्ति दिवस और इसका शुभ महत्व

असल में मुख्य बात है रक्षण की. इसी से परिवार का निर्माण हुआ, समाज बना, सृष्टि चली और आज भी हम इसी विश्वास पर कायम हैं. पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रावण शुक्ल चतुर्दशी को मधु-कैटभ नामक असुर उत्पन्न हुए जिन्होंने ब्रह्माजी से वेद छीनकर पाताल में ले गए. श्रीहरि ने उन्हें ढूंढ़कर वेद वापस लिया और श्रावण पूर्णिमा को ब्रह्माजी को सौंपा. चूंकि चतुर्दशी को वेदों का हरण हुआ था, इसलिए वह दिन अपवित्र माना गया और पूर्णिमा को वेदप्राप्ति दिवस के रूप में शुभ माना गया. इसलिए चतुर्दशी को उपाकर्म और रक्षाबंधन करना उचित नहीं माना जाता, जबकि पूर्णिमा को शुभ कर्म के लिए माना गया.

रक्षाबंधन: परस्पर रक्षा का एक सांस्कृतिक स्वरूप

अतः इस दिन उपाकर्म नहीं होता और असुरों को दूर रखने का संकल्प लिया जाता है। परस्पर रक्षा की भावना विभिन्न रूपों में प्रकट होती है – व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, शासकीय, नैतिक और धार्मिक। रक्षाबंधन भी इनका एक रूप है. बहन अपनी भाई की कलाई में राखी बांधकर उसकी दीर्घायु, स्वास्थ्य और सुख-शांति की कामना करती है, तो भाई भी बहन की सुरक्षा का वचन देता है. यह परस्पर रक्षा का भाव दोनों का आत्मबल बढ़ाता है. इससे चाहे बहन दूर कहीं विवाहित हो, वह दिन दोनों को बचपन की यादों में डुबो देता है. राखी की वह पतली-सी डोरी प्रेम के बंधन को मजबूत करती है और दोनों के सुख-दुःख में साझेदारी का भाव बढ़ाती है. यह हमारे समाज की एक बड़ी देन है.

रक्षाबंधन: बाहरी उत्सव में आंतरिक रक्षा की भावना

रक्षाधर्म को भगवान विष्णु से जोड़ा गया है, जिन्हें पालनकर्ता माना जाता है। पराई पीड़ा को समझकर मदद करना भी वैष्णवी भावना है. भले ही रक्षाबंधन का उत्सव साल में एक दिन मनाया जाता है, पर यह बाहरी उत्सव आंतरिक रक्षा की भावना को मजबूत करता है. यही कारण है कि यह पर्व अपनी प्राचीनता और पौराणिक महत्व के साथ आज भी जीवंत है.

भाई-बहन के त्योहार के रूप में रक्षाबंधन

भाई-बहनों के त्योहार के रूप में स्थापित यह रक्षाबंधन धार्मिक, ज्योतिषीय और पौराणिक मार्गों से जुड़ा हुआ है. यदि ऐसा न होता तो यह दिन केवल एक सामान्य दिन होता. इसमें पुजारी वर्ग का भी विशेष योगदान है, जो यज्ञ-पूजा और आशीर्वाद के माध्यम से रक्षा कवच का संचार करते हैं. यद्यपि यह परंपरा कुछ हद तक क्षीण हुई है, लेकिन आज भी जीवित है.

ऋषि परंपरा और श्रावणी पूर्णिमा का महत्व

यह ऋषि परंपरा अत्यंत समृद्ध है. आपदाओं के समय ऋषि-मुनि और साधु-संत गावों के निकट व्रत करते थे, यज्ञ और अध्ययन के लिए श्रावणी पूर्णिमा को वेद भाग का निर्धारण करते थे तथा लोक-कल्याण के लिए रक्षा-पोटलिका बनाते थे. भविष्योत्तर पुराण में वर्णित है कि पुरोहित स्वच्छ कपड़ों में अक्षत, सरसों, स्वर्णखंड आदि रखकर रक्षा-पोटलिका तैयार करते थे, जो कलाई में बांधने योग्य होती थी. यह कार्य मुख्यतः राजपरिवार के लिए होता था, लेकिन जन-पुरोहित जन-जन तक इसे पहुंचाते थे. अभिमंत्रित पोटलियों की संख्या यजमानों के अनुसार होती थी.

जैसे पूजा में वैदिक और पौराणिक दोनों प्रकार के मंत्रों का प्रयोग होता है, वैसे ही रक्षाबंधन में भी दोनों तरह के मंत्र प्रचलित हैं.

वैदिक मंत्र है:

“यदा बध्नान् दाक्षायणा हिरण्यं शतानीकाय सुमनस्यमानाः।
तन्मऽ आबध्नामि शत-शारदायुष्मान् जरटष्टिर्ययासम्।”

पौराणिक मंत्र है:

“येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वां प्रतिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।”

यह रक्षा संस्कार जाति-बंधनों से परे रहा है. पुरोहित सभी वर्गों को रक्षणीय मानकर रक्षा-कवच बांधते थे और लोग अपनी क्षमता अनुसार उन्हें दक्षिणा देते थे. शास्त्रों के अनुसार, इस दिन विधिवत किया गया रक्षा-विधान व्यक्ति को पूरे वर्ष कुप्रभावों से बचाता है.

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लेखक के बारे में

Author: Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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